डायनोसोर और बड़ी छिपकली | Pancha Tantra Story with moral pdf

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डायनोसोर और बड़ी छिपकली

एक बड़ा जंगल था, उस जंगल में डायनासॉर रहा करता था। उस जंगल के चारों ओर बहुत बड़ा तालाब था। उस तालाब में एक वरी छिपकली रहा करती थी। एक दिन माता डायनासॉर ने तीन अंडे दिए और उनके देखभाल करने लगी। एक दिन बड़ी छिपकली पानी से बाहर आकर कहने लगा, “आज बहुत जोरों से भूख लगने लगी है चलो जंगल में जाकर देखती हूं।” छिपकली जंगल में घूम रही थी इतने में उसकी नजर डायनासोर के अंडे में परी। वह खुशी से झूम उठा और बोला, “अरे वाह इतने बड़े अंडे इन्हें खाने में तो बहुत मजा आएगा।”

इतने में तीन अंडे में से एक अंडा फूट जाता है, और डायनासोर का बच्चा बाहर आ जाता है। वह बच्चा जोर जोर से चिल्लाने लगता है। तभी वहां डायनासॉर अपने बच्चे की आवाज सुनकर आ जाती है। वह बच्चे ने डायनासोर को देखकर कहा, “मां मां मुझे बहुत भूख लगी है, मुझे कुछ खाने के लिए दो ना।” मां ने कहा, “हां बेटा मुझे नहीं पता कि तुम इतने जल्दी बाहर ओगे। मैं तुम्हारी भोजन के लिए ही गई थी।” बच्चे ने कहा, “ठीक है मां भोजन लाओ। मा ने कहा, “बस बेटा मैं अभी लाती हूं। तुम अपने भाइयों का ध्यान रखना।” यह कहकर माता डायनासोर भोजन के लिए वहां से निकल जाती है।

तभी वहां बड़ी छिपकली आ जाती है। ओ कहने लगा, “मुझे बहुत जोरों से भूख लगी है, अब मैं तुम्हें खाऊंगी।” बच्चा डायनासोर ने यह देख कर कहा, “अरे दुष्ट छिपकली तुम यहां से चली जाओ, मेरे होते हुए तुम मेरा और मेरे भाइयों का कुछ नहीं कर सकता, कुछ नहीं बिगाड़ सकती।” छिपकली यह सुनकर हंसने लगा और बोला, “ततुम नन्ही सी जान है। तुम मुझे यह अंडे खाने से कैसे रोकोज?” डायनासोर ने फिर से बोला, “तुम हमारी ताकत को नहीं जानती। हमारी एक दहाड़ भी पूरे जंगल में गूंजती रहती है समझी!” यह कहकर बच्छा डायनासॉर मदद के लिए चिल्लाती है।

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बच्चे की आवाज मा डायनासोर की पास पहुंच जाती है। बच्चे की आवाज सुनकर मां डायनासोर कहने लगा, “अरे यह तो मेरी बच्चे की आवाज है। लगता है वह मुसीबत में है। मुझे जल्दी उसके पास जाना चाहिए।” माता डायनासोर जल्दी ही उसके बच्चों तक पहुंच जाती है। उसे देख कर बड़ी छिपकली वहां से भाग जाती है। बच्चे ने उसको मां को देखा और बोला, “मा मा मैंने मेरे भाइयों को कुछ नहीं होने दिया।”

मा यह सब देख कर बोला, “हां बेटा तुम अब थोड़े बड़े हो गए हो। लेकिन इतने भी बुरे नहीं हो कि वह दुष्ट छिपकली से लड़ सको। वह अभी चली गई है लेकिन वह दोबारा जरूर आएगा, जरा संभल कर रहना बेटा।” यह कहकर माता डायनोसोर अपने बच्चों के साथ सो जाती है। अगले दिन माता अपने बच्चों की भोजन की तलाश में फिर से चली जाती है।

वह माता डायनासोर नदी के किनारे जाती है। वहां बड़ी छिपकली आ जाती है। और वह हंसने लगा और बोलने लगा, “तुम मुझे पानी में कुछ नहीं कर सकते।” यह कहकर छिपकली पानी में चली जाती है। और माता डायनासोर भोजन लेकर अपने बच्चों के पास चली जाती है। तभी वहां नर डायनासोर यानी बच्चों का पिता वहां आ जाती है। उसे सारी बात पता चलती है। पिता डांसर यह सब सुनकर बहुत गुस्सा हो जाती है और वह बोलती है, “ठीक है अब एक काम करो यहां से जंगल में चली जाओ उस बड़ी छिपकली को तो अब मैं देख ही लूंगा।”

यह सुनकर माता डायनासोर जंगल में चली जाती है। और पिता डायनासोर बच्चों के साथ उनकी देखभाल में रहता है। तभी वहां वह बड़ी छिपकली आती है। उसने सोचा, “अरे वाह लगता है यह अंडे अकेले हैं, कि आज मैं उन्हें छोडूंगी नहीं। और आज मैं इन्हें खाकर रहूंगी।” यह कहकर वह छिपकली हंसने लगा।

जैसे ही छिपकली अंडे के पास जाती है, तभी अचानक पिता डायनासोर वहां पर आकर छिपकली को अपने मुंह पर दबाकर मार देता है। और फिर डायनासोर के बच्चे खुशी से झूम उठते हैं, और नाचने लगते हैं, और गाने लगते हैं। पिता डायनासोर बच्चों से कहते हैं सुनो बच्चों, “अब तुम्हें कोई परेशान नहीं करेगा। मैं हरदम तुम्हारी देखभाल करूंगा। तुम कोई चिंता नहीं करना।”

Moral : बुराई का हमेशा अंत होता है और अच्छाई हमेशा जीत जाती है।

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