5 Best Hindi short moral story (2020) PDF

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5 Best Hindi short moral story

best-hindi-short-moral-story-लोमड़ी-और-मुर्गी

लोमड़ी और मुर्गी

एक समय की बात है, एक मुर्गी खाने में एक लाल मुर्गी रहती थी, उसने अपना घर खुद बनाया था। वह दिन रात मेहनत करके अपना खाना खुद ही जमा कर दी थी, वह मुर्गी बहुत ही मेहनती थी।

उसके घर के पास जो तालाब था, उसके करीबी एक चालाक लोमड़ी अपने बीवी के साथ रहता था। वह बहुत ही चला था।

हमेशा अपने बीवी को खुश रखने के लिए अच्छा खाने का शिकार करता था। लोमड़ी और उसके बीवी की नजर हमेशा वह लाल मुर्गी पर पड़ी रहती।

लोमड़ी जब भी वह लाल मुर्गी देखता तो उसके दिमाग में एक ही बात घूमती। वह सोचता था, यह लाल मुर्गी बहुत स्वादिष्ट होगी, मैं अपने बीवी को यह मुर्गी तोहफे में दूंगा। फिर हम इस मुर्गी को पकाएंगे बड़े बर्तन में।

ऐसे ही एक दिन लोमड़ी ने आपने बाजार का खेला उठाया और अपने बीवी से कहा, मैं उस लाल मुर्गी को पकड़ने जा रहा हूं। आज रात को हम उस मुर्गी को खाएंगे।उसे पकाने की तैयारी करो, और बड़े से बर्तन में पानी उबले, तब तक मैं वापस आता हूं।

बीवी से यह बात कहां कर लोमड़ी उस लाल मुर्गी के घर के पास चला गया। लोमड़ी की बीवी बहुत खुश थी,और उसने मुर्गी को पकाने के लिए बाड़ी सी कराई निकाली।

उसमें पानी और मसाला डालकर पानी को उबालने के लिए रख दिया।

उसी वक्त वह लाल मुर्गी घर से बाहर निकली, और रात के लिए खाना जुटाने में लग गई। उसने चालाक लोमड़ी को पैर के पीछे छुपा हुआ नहीं देखा।लाल मुर्गी खाना खोजते खोजते घर से दूर चली गई। 

लोमड़ी ने सोचा यही सही मौका है। और वह तुरंत मुर्गी के घर के अंदर घुस गया। लोमड़ी ने पूरी तैयारी करी थी,कि वह लाल मुर्गी के लौटने के बाद वह उसे कैसे पकड़ेगा।

कुछ ही देर बाद वह लाल मुर्गी अपने रात के खाने की थैली लेकर वापस लौटे। उसने घर में घुसकर घर का दरवाजा बंद किया। जैसे ही लोमड़ी ने देखा कि मुर्गी के भागने के सारे रास्ते बंद हो गए हैं, तब वह मुर्गी को पकड़ने के लिए उस पर टूट पड़ा।

मुर्गी ने लोमड़ी के साथ बहुत हिम्मत से लड़ाई की। मुर्गी ने छठ से अपनी थैली नीचे छोरी, और वो उड़कर लकड़ी के ऊपर जा कर बैठ गई। मुर्गी ने बैठकर सांस ली और लोमड़ी से उसने कहा,”वह चालाक लोमड़ी तुम मेरे घर के अंदर क्या कर रहे हो? तुम कितनी भी कोशिश कर लो मुझे पकड़ नहीं पाओगे।”

लोमड़ी ने कहा, “तुम कितनी देर तक मुझ से बचने की कोशिश करती रहोगी?”

फिर लोमड़ी ने देखा कि शायद अभी मुर्गी को पकड़ना मुमकिन नहीं है। यह मुर्गी बहुत होशियार है, बहुत फुर्तीली भी हे।

पर लोमड़ी भी बहुत चालाक हे। लोमड़ी ने एक पल के लिए सोचा,और उसने झट से अपने दिमाग में योजना बनाएं और उसने कहा,”मैं और मेरी पत्नी तुम्हें पकड़ के रात को खाना चाहते थे, मैं मेरी पत्नी को निराश नहीं कर सकता।

मुर्गी जहां ऊपर खड़ी थी उसके सामने नीचे जाकर वह लोमड़ी खड़ा हो गया। और वह गोल गोल वही घूमने लगा। वह अपने पूछ को पकड़ने की कोशिश कर रहा था।

मुर्गी सब कुछ ऊपर से देख रही थी और वह सोचने लगी, ऐसे तो लोमड़ी थक जाएगा। लोमड़ी और तेज अपनी पूछ को पकड़ने के लिए गोल गोल घूमने लगा। मुर्गी ध्यान से उस लौंडे की हरकतें देख रही थी।

पर वह समझ नहीं पा रही थी कि वह लंगड़ी कर क्या रहा है। लोमड़ी को गोल गोल घूमते देखकर मुर्गी का सर घूमने लगा। और वह खुद को संभाल नहीं पाई। उसका संतुलन बिगड़ गया, और वह नीचे लोमड़ी के थैले में जा गिरी।

लोमड़ी ने थैले को अपने कंधे पर उठाया, और वह तालाब की ओर चलने लगा। लोमड़ी बहुत खुश हो गया। उसने सोचा मुर्गी कितनी स्वादिष्ट होगी।

लोमड़ी धीरे-धीरे तालाब की ओर बढ़ रहा था। क्योंकि मुर्गी को पकड़ने के लिए उसको बहुत मेहनत लगी थी। वह बहुत थक चुका था, उसकी हालात खराब हो चुकी थी। वह एक भी कदम नहीं चल पा रहा था, और उसने सोचा…

लगता है रात होने में अभी काफी समय है, मैं थोड़ा आराम करता हूं।लोमड़ी ने थैले को बड़े से पत्थर के पास रख दिया, और वोह पत्थर पर जाकर सो गया। बहुत जल्दी उसे नींद आ गई।

लाल मुर्गी ने अपना दिमाग लगाया और वह थैले के बाहर आ गई, बाहर आकर उसने लोमड़ी को सोते देखा। और वह आश्चर्य में पड़ गई।

लाल मूवी की बहुत ही हिम्मत वाली थी, उसने हिम्मत जुटाकर बड़े-बड़े पत्थर उस थैले से बांध दिया।और फिर जितनी जल्दी हो सके वह अपने घर चली गई।

लोमड़ी की नींद टूटी, वह उठा लेकिन उसे कुछ भी पता नहीं चला। उसने थैले को अपने कंधे पर उठाया और तालाब की ओर चल पड़ा। लोमड़ी की बीवी ने उसे देखा और कहा…”तो तुम लाल मुर्गी को ले आए? “

लोमड़ी ने कहा…”हां हां”, और वह पूछा पानी गरम हो गया?

लोमड़ी की बीवी ने अपने मुंह से उस खेलें को खोलो।

और उस थैले को कराई में पलट दिया, सारे पत्थर उस  गरम पानी में गिरने लगा। खौलता पानी लोमड़ी और उसके बीवी पर भी गिरा, और वह दोनों की मौत हो गई।

लाल मुर्गी ने फिर कभी उस चालाक लोमड़ी को नहीं देखा। और वह खुशी-खुशी शांति से अपना जीवन बिताने लगी।

Moral : अती चालाकी भारी पड़ सकती है।

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लालची कुत्ता

बहुत साल पहले की बात है, एक गांव में एक आवारा कुत्ता, भूख से मारा, खाने की तलाश में घूम रहा था। वह बहुत घुमा लेकिन खाने के लिए उसे कुछ नहीं मिला।

घूमते घूमते हो एक कसाई की दुकान पर आ पोंछा। उसे वहां पर एक हड्डी के साथ मांस का टुकड़ा पड़ा हुआ देखा। वह बहुत खुश हुए, और अपने आप से सोचने लागा…”कितना स्वादिष्ट मांस मिल गया खाने के लिए, और साथ में भी एक हड्डी भी है। बहुत मजा आएगा खाने के लिए।”

ऐसा सोचकर उसने मांस का टुकड़ा उठाया और खाने का आनंद उठाने के हेतु एक सुरक्षित और शांत जाएगा ढूंढने के लिए वहां से भाग चला गया।

उसे एक पेड़ के नीचे मन चाहती जाएगा मिली। वहां पर वह मांस का टुकड़ा और हड्डी दोनों खाने लगा। थोड़े समय में ही, उसने मांस तो पूरा खा लिया और बच गई सिर्फ हड्डी।

अब उसे थोड़ा प्यास लगी थी, पर उसे उस हड्डी को नहीं छोड़ कर जाना था। तो वह वहां उस हड्डी को मुंह में लेकर एक पानी के प्रवाह के पास आ गए।

उस प्रभाव पर एक छोटा सा पुल बांधा हुआ था, और कुत्ता उस पुल पर आ गया था। पानी पीने के लिए वह पानी की तरफ झुका तो पानी में उसका प्रतिबिंब दिखाई दिया।

पर उसे लगा पानी में मुंह में हड्डी लिए हुए कोई और कुत्ता मौजूद है। उस पानी में प्रतिबिंब हड्डी को देखकर उसे खुद को कहा…”वह हड्डी कितनी मजेदार दिख रही है, काश मुझे खाने को मिल जाए”

पर जैसे ही वह उस प्रतिबिंब वाली हड्डी के लिए अपना मुंह खोला, उसके मुंह में जो हड्डी था वह नीचे पानी में गिर गई। जैसे ही हड्डी पानी में गिर गई तो उसके गिरने की वजह से प्रतिबिंब भी नष्ट हो गया।

तभी उस कुत्ते को ध्यान आया, के दूसरी हड्डी हासिल करने के कोशिश में, जो हड्डी उसके पास थी वह भी खो चुका है।

Moral : जो चीज हमारे पास है उसका ख्याल रखना चाहिए। और कभी भी लालची नहीं होना चाहिए।

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घमंडी चील

एक बार की बात है, एक घमंडी चील थी। वह पहाड़ के शिखर पर रहती थी। उसे बहुत घमंड था क्योंकि वह माउंट एवरेस्ट की सबसे ऊंचे सिर में रहती थी। दुनिया की सबसे ऊंची चोटी।

उसके बच्चे ने उसको पूछा… मां कभी हम यहां से नीचे जाएंगे?चील ने बोला… हां जब तुम बड़े हो जाओगे तब जाना।पर एक बात याद रखना… मैं बहुत बार नीचे गई हूं, और मुझे बस वहां हर तरफ गंदे जानवर और पक्षी दिखते हैं।उनकी हमारी रहन-सहन से कोई बराबरी नहीं, तो हम उनसे कभी बड़े है। यह हमेशा याद रखना बच्चे।

फिर एक दिन एक महान आदमी माउंट एवरेस्ट पर ध्यान करने आया। वह बिल्कुल चील के घोसले के पास ध्यान करने बैठ गया।चिल ने देखा और बोला कितना गंदा आदमी है वह। हमें उसे सावधान रहना होगा।

हर रोज छीलने नीचे जाकर जंगल से अपने बच्चों के लिए खाना लेकर आती थी। वह महान आदमी रोज चील को जाते हुए दिखता था। एक दिन उस महान आदमी ने चील को बुलाया।

महान आदमी ने बोला…”ओ चिल मेरे पास आओ”

चील ने हिचकी चाकी बोला…”तुम क्या चाहते हो”

महान आदमी ने बोला, मैं तुमको रोज यहां से आते जाते हुए देखता हूं। तुम और मैं सिर्फ इस पहाड़ के शिखर में रहता हूं क्यों ना हम दोस्त बन जाए?

चलने विद्रूप की हंसी हसी और बोला…”मैं तुमसे दोस्ती नहीं कर सकती, क्योंकि तुम गरीब और गंदे हो। खुद को देखा भी है कभी ?”

महान आदमी ने पूछा… क्या तुम ऐसा सोचती हो?

चिल ने बोला… वैसे मुझे अपने बच्चों के लिए खाना लेकर आना है। तुमसे बात करने के लिए समय नहीं है मेरे पास।यह कहकर चिल ने अपने परिवार के लिए खाना ढूंढने निकल गए, और महान व्यक्ति  वहीं पर खड़ा रहा।

कुछ देर बाद जेल खाना लेकर वापस आया और देखा महान व्यक्ति वहीं पर खड़ी थी। महान व्यक्ति को देखकर चिल ने कहा… मैंने बोला था तुमसे नहीं दोस्ती करनी है । फिर क्यों खड़े हो?

महान व्यक्ति ने कहा इन बच्चों को बहुत भूख लगी थी।

इसलिए मैं इनको कुछ खाना दी थी।

चिल  ने बोला यह बच्चे हमेशा अच्छा जीवन जीते हैं यह तुम नहीं समझोगे।

महान व्यक्ति ने बोला… सुनाई चिल बेशक तुम खुद को सबसे बड़ी पक्षी समझते हो, लेकिन तुम्हें खाना ढूंढने के लिए जमीन पर ही आना पड़ता है। तो फिर तुम सबसे बाड़ी पक्षी कैसे हुई ?

किसी को घमंड नहीं करना चाहिए, याद रहे हम उसी के सहारे जिंदा है, जो हमें धरती देती है। फिर चाहे अमीर हो या गरीब ।

चिल ने महान व्यक्ति के बाद समझी और कहीं… मुझे गलती हो गई है, मुझे माफ कर दो।

Moral : किसी को घमंड नहीं करना चाहिए। फिर वह अमीर हो या गरीब। घमंड पतन का मूल कारण।

best-hindi-short-moral-story-लालच-बुरी-बला-है

लालच बुरी बला है 

बहुत पुरानी बात है, एक गांव में एक किसान रहता था। वह काफी परेशान था, उस गांव में सब की फसल अच्छी होती थी, लेकिन किशन के फसल इतनी अच्छी नहीं होती थी।

उसके पास इतनी धन भी नहीं था, जिससे वह अपने खेती के लिए अच्छे बीज या फिर उन्नत तकनीक खरीद सके। काफी समय से उसके फसल सुखी हुई थी।

एक दिन वो किसान परेशानी की करण खेत में ही सो गए, और अपने घर नहीं जाता। अगले दिन जब सुबह होती है तो वह किसान उठता है और उसे उसके खेत के पास एक साप नजर आए।

तो वह सोचने लगे…

अरे यह साप मेरे खेत के पास है, लगता है यह इस खेत का कोई देवता है। मैंने इसकी पूजा नहीं की इसलिए मेरा खेत सूख गए।

मेरी फसल की सूखी हुई है, कल से मैं इसके लिए रोज दूध ले आऊंगा। और इसे दूध पिला कर इस का आशीर्वाद ग्रहण करूंगा। शायद मेरी फसल अच्छी हो जाए।

इतना कहकर किशन चला जाता है, और अपने घर से एक कटोरी दूध लाता है। और किसान उस दूध की कटोरी को सांप के बिल के पास रख कर कहता है…

“हे साप देवता, मैं नहीं जानता था की आप इस खेत का देवता है।और मैंने आपकी पूजा नहीं की, मुझे क्षमा करें और यह दूध ग्रहण करें, और मुझे अपनी आशीर्वाद दें।”

यह कहकर को दूध रखकर चला जाता है। अगले दिन किसान खेत पर आता है और देखता है कि वहां पर एक सोने का मुद्रा रखा है।

किसान इस मुद्रा को देखकर सोचता है, अरे यह कैसे स्वर्ण मुद्रा मुझे मिली है! लगता है यह साप ने ही इसे मुझे दी है,मुझे इसे रख लेना चाहिए। और इसे मैं रोज दूध पिलाऊंगा।

और यह कहकर वह किशन वहां से चला जाता है, तो इस तरह से किशन आव उस साप के लिए रोज दूध लाने लगा। और साप भी उसे रोज एक एक स्वर्ण मुद्रा देने लगा।

ऐसा करते करते किसान उस सांप से काफी मुद्रा इकट्ठा कर लेते हैं। एक दिन किसान का बेटा खेत पर आकर  यह सब करते हुए उसे देख लेता है।

और उसे पूछता है….”पिता जी यह सब आप क्या कर रहे हो? और इस सांप को दूध क्यों पिला रहे हो? क्या यह सब आपको काटेगा नहीं? आपको ऐसे डर नहीं लगता क्या?”

यह सुनकर किसान मुस्कुराता है, और अपने बेटे से क्या होता है…” बेटा यह सांप इस खेत का देवता है, और यह दूध पिलाने से मुझे काटता नहीं, बल्कि यह हमेशा मुझे आशीर्वाद देता है। इसको दूध देने से मुझे हर रोज एक स्वर्ण मुद्रा मिलती है।

यह सुनकर किसान के बेटे के मुंह में एक शरारतें मुस्कान आ जाता है। और उसके मन में एक नए शरारत सोचती हैं। फिर वह अपने पिताजी को कहता है, पिताजी कल से मैं भी इस आपको दूध पिलाऊंगा।

और इसे दूध पिला कर मुझे भी स्वर्ण मुद्राएं मिलेगी। क्या पता यह मेरे सेवा से प्रसन्न होकर मुझे कुछ और ही आशीर्वाद में दे दे। किसान अपने बेटे के बात सुनकर मुस्कुराता है, और फिर उसे कहता है…”हां बेटा क्यों नहीं, लेकिन ध्यान रहे यह सांप तुमको काटना ले।”

अगले दिन किसान का बेटा उस सांप के लिए दूध लाने लगा। फिर दूसरे दिन जब किसान का बेटा उस सांप के लिए दूध लाता है, तो उसे एक स्वर्ण मुद्रा मिलती है।

और वह कहता है…” अगर यह सांप रोज एक स्वर्ण मुद्रा देता है, तो ना जाने इसके पास कितने स्वर्ण मुद्राएं होंगी। क्यों ना मैं एक साथ ही यह सारे मुद्राएं ले लो।

हम इसे  रोजी दूध देते है और यह हमसे केवल एक स्वर्ण मुद्रा देता है।

अगले ही दिन जब किसान का बेटा दूध लेकर आता है, तो सांप अपने बिल से बाहर निकलता है। और किसान का बेटा सांप को मारकर सारे स्वर्ण मुद्राएं एक साथ लेने के लिए, उस सांप को एक छोरी से वार करता है।

और सांप भी उसको गुस्से से काट लेता है। और किसान का बेटा वही मर जाता है। और सांप भी घायल अवस्था में वहां से चला जाता है। किसान अपने बेटे का अंतिम संस्कार वही खेत में कर देता है।

Moral : हमें कभी भी लालच नहीं करना चाहिए, लालच बहुत बुरी चीज होती है।

best-hindi-short-moral-story-ईमानदारी-का-इनाम

ईमानदारी का इनाम

बहुत समय पहले की बात है, किसी गांव में बाबूलाल नाम का एक पेंटर रहता था। वह बहुत ईमानदार था, लेकिन वह बहुत गरीब होने की कारण घर-घर जाकर पेंट की काम किया करता था।

उसकी आमदनी बहुत कम थी, बहुत मुश्किल से उसका घर चलता था। पूरा दिन मेहनत करने के बाद भी, ओ सिर्फ दो वक्त की रोटी ही जुगाड़ कर पता था।

वह हमेशा चाहता था, उसे कोई बड़ा काम मिले।जिससे उसकी आमदनी अच्छी हो। पर वह छोटी-छोटी काम भी बहुत लगन और ईमानदारी से करता था।

एक दिन उसे गांव के जमींदार ने बुलाया और कहा…

” सुनो बाबूलाल, मैंने तुम्हें यहां पर एक बहुत जरूरी काम के लिए बुलाया है। क्या तुम वो काम करोगे?”

बाबूलाल ने कहा…”जी हुजूर,जरूर करूंगा।

बताइए क्या काम है?”

जमींदार ने कहा…”मैं चाहता हूं तुम मेरे नाउ पेंट करो। और यह काम आज ही हो जाना चाहिए।बाबूलाल ने कहा “जी हुजूर यह काम मैं आज ही कर दूंगा”।नाव पेंट करने का काम पकड़ बाबूलाल बहुत खुश हुआ। 

जमींदार ने कहां, यह सब तो ठीक है लेकिन यह काम करने के लिए तुम कितने पैसे लोगे?

बाबूलाल बोला…”पैसा सा तो इस काम के १५०० लगते हैं, बाकी आपको जो पसंद है दे देना”

जमींदार ने कहा, ठीक है तुम्हें १५०० मिल जाएंगे। पर काम अच्छा होना चाहिए। बाबूलाल ने कहा, जी हुजूर आप चिंता मत कीजिए, आपका काम बढ़िया ही मिलेगा।

जमींदार उसके नाउ दिखाने बाबूलाल को नदी किनारे ले जाता है। नाउ देखने के बाद बाबूलाल जमींदार से थोड़ा समय मांगता है। और आपना रंग का सामान लेने के लिए चला जाता है।

सामान लेकर जैसे ही बाबूलाल आता है, वह नाउ को रंगना शुरू कर देता है। जब बाबूलाल नाउ रंग रहा था,

उसने देखा, नाउ में एक छेद है।

बाबूलाल ने सोचा, अगर इसे ऐसे ही पेंट कर दिया तो यह डूब जाएगा। पहले इस छेद को ही बंद कर देता हूं। ऐसा कहकर और छेद को भर देता है। और नाउ को पेंट कर देता है।

फिर वह जमींदार के पास जाता है और कहता है,

“हुजूर नाउ का काम पूरा हो गया, आप चलकर देख लीजिए।” जमींदार ने कहा, ठीक है चलो।

फिर दोनों नदी किनारे पहुंच जाता है ,नाउ को देखकर जमींदार बोलता है…” अरे वाह बाबूलाल, तुमने तो बहुत अच्छा काम किया है। ऐसा करो तुम कल सुबह आकर अपना पैसा ले जाना। बाबूलाल ने कहा, ठीक है हुजूर। और फिर दोनों अपने अपने घर पर चला जाता है।

जमींदार के परिवार ने अगले दिन ही उस नाउ से नदी के उस पर घूमने जाते हैं। शाम को जमींदार का नौकर रामू जो उस नाउ को देखभाल करता था, छुट्टी से वापस आता है।

और परिवार को घर पर ना देख कर जमींदार से परिवार वालों के बारे में पूछता है। जमींदार उसे सारी बात बताता है। जमींदार का बात सुनकर रामू चिंता में पड़ जाता है।

उसे चिंतित देखकर जमींदार पूछता है, क्या हुआ रामू?

यह बात सुनकर तुम चिंतित क्यों हो गए?

रामू ने कहा, सरकार लेकिन उस नाउ में तो छेद था।

रामू के बात सुनकर जमींदार भी चिंतित हो गए। तभी उसका परिवार मौज-मस्ती करके वापस लौटे। सब को सुरक्षित देखकर जमींदार चैन की सांस लेता है।

फिर अगले दिन जमींदार बाबूलाल को बुलाता है और कहता है, “यह लो बाबूलाल, तुम्हारा मेहनताना। तुमने बहुत बढ़िया काम किया है। मैं बहुत खुश हूं।”

बाबूलाल पैसा लेकर गिनता है तो हैरान हो जाता है। क्योंकि वह पैसे बहुत ज्यादा थे। और वह जमींदार को कहता है, आपने मुझे गलती से ज्यादा पैसे दे दिए हैं।

जमींदार ने कहा, नहीं बाबूलाल, मैं गलती से नहीं दिया हूं। यह तुम्हारी मेहनत का ही पैसा है। बाबूलाल ने कहा,

हमारे बीच में तो १५०० की बात हुई थी? यह तो ६००० है? तो यह मेरी मेहनत का कैसे हुआ?

जमींदार ने कहा, क्योंकि तुमने एक बहुत बड़ा काम किया है। बाबूलाल ने पूछा, कैसा काम हुजूर?

जमीन जाने कहां, तुमने इस नाउ के छेद को भर दिया। जिसके बारे में मुझे पता भी नहीं था।

अगर तुम चाहती है तो उसे ऐसे भी छोड़ सकते थे। या फिर उसके लिए तुम अधिक पैसे मांग सकते थे। पर तुमने ऐसा बिल्कुल नहीं किया। जिसके वजह से मेरा परिवार वालों ने उस नाव में सुरक्षित सवारी कर सके।

अगर तुम उस छेद को ना भरते तो मेरा परिवार डूब भी सकते थे। आज तुम्हारी वजह से वह सुरक्षित है। इसलिए यह पैसे तुम्हारी मेहनत और ईमानदारी के हैं।

बाबूलाल ने कहा, फिर भी हुजूर इस छेद को भरने के लिए इतने पैसे तो नहीं लगते।

जमींदार ने कहा, बस बाबूलाल बस। अब तुम कुछ मत कहो। यह पैसे तुम्हारा ही है, तुम इसे रख लो। उसके बाद जमींदार के पैसे लेकर बाबूलाल बहुत खुश हुआ।

और कहने लगा, बहुत-बहुत धन्यवाद जमीदार साहब। ऐसा कहकर वह खुशी-खुशी वहां से चला गया।

Moral : हमें अपना काम पूरा लगन और ईमानदारी से करना चाहिए।

Conclusion

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