20+ Great Chanakya Neeti Quotes Change your Thoughts

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Who is Chanakya?

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Best Chanakya Neeti Quotes to Be Postive

Chanakya-Neeti-Quotes
कोई काम शुरू करने से पहले,
स्वयं से तीन प्रश्न कीजिए,
मैं यह क्यों कर रहा हूं?
इसके परिणाम क्या हो सकते हैं?
और क्या मैं सफल होऊंगा?
और जब गहराई से सोचने पर इन प्रश्न के
संतोषजनक उत्तर मिल जाए, तभी आगे बड़िए।
दुनिया की सबसे बड़ी शक्ति नौजवानी
और औरत का सुंदरता होता है।
अगर सांप जहरीला ना भी हो,
तो उसे खुद को जहरीला दिखाना चाहिए।
स बात को बक्त ना होने दीजिए,
कि आपने क्या करने के लिए सोचा है।
बुद्धिमानी से इसे रहस्य बनाए रखिए।
और इस काम को करने के लिए दिर रहिए।
शिक्षा सबसे अच्छा मित्र है,
एक शिक्षित व्यक्ति हर जगह अपना सम्मान पाता है।
शिक्षा सौंदर्य और यौवन परास्त कर देती है।
जैसे ही भय आपके करीब आए,
उस पार आक्रमण कर उसे नष्ट कर दीजिए।
किसी मूर्ख व्यक्ति के लिए
किताबें उतनी ही उपयोगी है,
जितना कि एक अंधे व्यक्ति के लिए आईना।
कोई व्यक्ति अपने कार्यों से महान होता है,
अपने जन्म से नहीं। सबसे बड़ा गुरु मंत्र है,
कभी भी अपने राज दूसरों को मत बताइए।
यह आपको बर्बाद कर देगा।
Chanakya-Neeti-Quotes
पहले पांच सालों में अपने बच्चे को बड़े प्यार से रखिए,
अगले पांच साल उन्हें डांट डपट के रखिए।
जब वह शोला साल का हो जाए तो
उसके साथ एक मित्र की तरह व्यवहार करिए।
आपके वयस्क बच्चे ही आपके सबसे अच्छे मित्र हैं।
हर मित्रता के पीछे कोई ना कोई स्वार्थ होता है,
ऐसी कोई मित्रता नहीं जिसमें स्वार्थ ना हो।
यह एक करवा साथ है।
अपमानित होके जीने से अच्छा मरना है,
मृत्यु तो बस एक पल का दुख देती है,
लेकिन अपमान हर दिन जीवन में दुख लाता है।
कभी भी उनसे मित्रता मत कीजिए
जो आपसे कम या ज्यादा प्रतिष्ठित हो,
ऐसी मित्रता कभी आपको खुशी नहीं देगी।
सेवक को तब परखें जब वह काम ना कर रहा हो,
रिश्तेदार को किसी कठिनाई में, मित्र को संकट में,
और पत्नी को घोर विपत्ति में।
जिस प्रकार एक सूखे पेड़ को
अगर आग लगा दी जाए,
तो वह पूरा जंगल जला देते हैं।
उसी प्रकार एक पापी पुत्र,
पूरे परिवार को बर्बाद कर देता है।
ऋण, शत्रु और रोग को समाप्त कर देना चाहिए।
बन की अग्नि चंदन की लकड़ी को भी जाला देती है।
अर्थात दुष्ट शक्ति किसी का भी अहित कर सकते हैं।
सिंह भूखा होने पर भी, तिनका नहीं खाता।
शत्रु की दुर्बलता जानने तक,
उसे अपना मित्र बनाए रखें।
एक ही देश के दो शत्रु, परस्पर मित्र होता है।
आपातकाल में स्नेह करने वाला ही सच्चा मित्र होता है।
मित्रों के संग्रह से बल प्राप्त होना है।
जो धैर्यवान नहीं है, उसका न वर्तमान है न भविष्य।
संकट में बुद्धि ही काम आती है।
लोहे को लोहे से ही काटना चाहिए।
यदि माता दुष्ट है तो, उसे भी त्याग देना चाहिए।
यदि स्वयं के हाथ में बीष फेल रहा है,
तो उसे काट देना चाहिए।
सांप को दूध पिलाने से, बिष ही बढ़ता है, ना की अमृत।
एक बिगड़ैल गाय सौ कुत्तों से ज्यादा श्रेष्ठ हैं।
अर्थात एक विपरीत स्वभाव का परम हितेषी व्यक्ति,
उन सौ लोगों से श्रेष्ठ है जो आपकी चापलूसी करते हैं।
काल के मोर से आज का कबूतर भला।
अर्थात संतोष सबसे बड़ा धन है।
आग सिर में स्थापित करने पर भी जलाती है,
अर्थात दुष्ट व्यक्ति का कितना भी सम्मान कर ले,
वह सदा दुष्ट ही होता है।
Chanakya-Neeti-Quotes
अन्न के सिवाय कोई दूसरा धन नहीं है।
भूख के समान कोई दूसरा शत्रु नहीं है।
बीघा ही निर्धन का धन है।
बीघा को चोर भी नहीं चुरा सकता।
शत्रु के गून को भी ग्रहण करना चाहिए।
अपने स्थान पर बने रहने से ही मनुष्य पूजा जाता है।
सभी प्रकार के भय से,
बदनामी का भय सबसे बड़ा होता है।
किसी लक्ष्य की सिद्धि में, कभी शत्रु का साथ ना करें।
सोने के साथ मिलकर चांदी भी
सोने जैसा दिखाई पड़ती है।
अर्थात सत्संग का प्रभाव मनुष्य पर अवश्य पड़ता है।
टेकुली नीचे सिर झुका कर ही कुंए से जल निकलती है,
अर्थात कपटी यह पापी व्यक्ति सदैव मधुर वचन
बोल कर अपना काम निकाल लेते हैं।
सत्य भी यदि अनुचित है, तो उसे नहीं कहना चाहिए।
समय का ध्यान नहीं रखने वाला व्यक्ति,
अपने जीवन में निर्विघ्नं नहीं रहता।
जो जिस कार्य में कुशल हो,
उसे उसी कार्यों में लगाना चाहिए।
दोस्त हीन कार्यों का होना दुर्लभ होता है।
किसी भी कार्यों में पल भर की भी विलंब ना करें।
चंचल चीन वाले कार्यों, कभी समाप्त नहीं होते।
पहले निश्चय करिए, फिर कार्यों आरंभ करें।
भाग्य पुरुषार्थी के पीछे चलता है
अर्थ धर्म और कर्म का आधार हे।
शत्रु दंड नीति के ही योग्य है।
कठोर बानी अग्निदह से भी,
अधिक तीव्र दुख पहुंचाती है।
यासनी व्यक्ति कभी सफल नहीं हो सकता।
शक्तिशाली शत्रु को कमजोर समझ कर ही,
उस पर आक्रमण करे।
अपने से अधिक शक्तिशाली और सामान बल बाले से शत्रुता ना करें।
मंतना के गुण रखने से ही कार्य सिद्ध होता है।
योग्य सहायकों के बिना
निर्णय करना बहुत कठिन होता है।
एक अकेला पहिया नहीं चला करता।
अबिनित स्वामी के होने से तो,
सामी का ना होना अच्छा है।
जिसकी आत्मा सयोंमित होती है,
वही आत्मविजई होता हैं।
शत्रु के सबसे घातक हथियार होता है उकसाना।
शत्रु ऐसा प्रयास करता है कि आपको उकसाना जाए,
जिससे आपको क्रोध आए।
क्रोध में शक्ति और विवेक आधी हो जाती है,
और शत्रु आपकी कमजोरी का फायदा उठाता है।
इसलिए शत्रु जब आपको उकसाने का प्रयास करें,
तो कछुए को भांति क्रोध को समेट कर
अपने अंदर रख लो।
और अपनी पूरी तैयारी के साथ वार करो।
इसलिए कभी भी शत्रु के शत्रु के उकसावे पर
तुरंत प्रतिक्रिया नहीं करनी चाहिए।
बल्कि सही वक्त का इंतजार करना चाहिए।
लेकिन शत्रु को श्यमा नहीं करना चाहिए।
क्षमा करने से शत्रु का मनोबल बाड़ता है।
दुष्ट के साथ आप कितना भी अच्छा व्यवहार करें,
को अपना स्वभाव नहीं बदल सकता।
सांप का जहर तो केवल उसके दांतो में होता है,
बिच्छू का विष पूंछ में,
लेकिन दुष्ट के तो अंग अंग में जहर होता है।
इसलिए दुष्ट पर कभी भरोसा मत करो
दुष्ट कभी मित्र नहीं हो सकता।
दुष्ट के साथ उसी प्रकार व्यवहार करना चाहिए,
जैसे यह विषैले सांप के साथ किया जाता है।
यानी उसका फन कुचल देना चाहिए।

रोग, सांप और शत्रु इन्हें कभी घायल करके ना छोड़े।
रोग का पूरा उपचार नहीं हुआ, तो वह फिर से प्रभावी होकर उभर सकता है।
सांप को घायल छोड़ दिया तो,
वह और भी घातक हो सकता है।
और शत्रु अगर घायल होकर बच गया, 
तो वह अंदर ही अंदर बदले की आग में जलता है,
और फिर हमला कर सकता है। 
इसलिए शत्रु पर बार करो तो ऐसा, 
की वह फिर उठ ना सके।
भारत के इतिहास में पृथ्वीराज चौहान और मोहम्मद 
गौरी की कहानी इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।
Chanakya-Neeti-Quotes
अपने शत्रु से कभी घृणा मत करो, 
शत्रु से घृणा करने पर आप उसके बारे में
सोचने समझने के शक्ति खो देते हैं।
आप उसकी केवल कमजोरी देख पाते हैं, ताकत नहीं।
इसलिए शत्रु को एक मित्रों की तरह देखें।
और उसकी हार छोटी बड़ी बातों की खबर रखें।
ताकि युद्ध की हालात में शत्रु को बचकर निकलने का कोई रास्ता ना मिल सके।
अपने शत्रु को पराजित करने का
सबसे अच्छा तरीका यही है, 
कि कभी उस पर पहला बार हथियार से ना करें। 
शत्रु को पहले अपने कूटनीति में फंसाए, 
यानी उसकी शक्तियां और सहयोगियों को
उससे दूर करें। 
जब शत्रु सब तरफ से अलग-थलग पड़ जाए, 
तब उस पार भरपूर प्रहार करना चाहिए।
अपने कमजोरी किसी को ना बताएं, 
मूर्ख लोगों से कभी वाद विवाद ना करें।
धन को सोच समझकर खर्च करें। 
आपका एक दोष आपके सभी गुणों को
नष्ट कर सकता है।
आलस्य को त्याग दें,  आलस्य मनुष्य की कोई
वर्तमान और भविष्य नहीं होता।
अपमानित होके जीने से, मरना अच्छा है। 
अपमान हर दिन जीवन में दुख लाता हैं।
काम या यादा प्रतिष्ठा के लोगों से मित्रता ना करें। 
ऐसी मित्रता कभी आपको खुशी नहीं देगी।
जो बात ना सुने उस पर विश्वास ना करें।
खुश रहना है तो लगाव से दूर रहे। 
वर्तमान में जीवन बिताओ।
एक बुद्धिमान मनुष्य और विवेक बाण व्यक्ति
हमेशा वर्तमान में जीते हैं।
हमें भूतकाल के बारे में कभी
पछतावा नहीं करना चाहिए, 
ना ही भविष्य की चिंता होना चाहिए।
किसी मूर्ख व्यक्ति के लिए किताबें उतनी ही 
उपयोगी है जितना कि एक अंधे व्यक्ति के लिए आईना।
मूर्ख व्यक्ति के सम्मुख रहस्य की
कोई बात नहीं करना चाहिए, 
और खास करके अपने दिल की बात
तो बिल्कुल नहीं करना चाहिए।
मूर्ख व्यक्ति को अपना अपमान का भय नहीं होता। 
मूर्ख व्यक्ति को इसी प्रकार उपकर का 
उपदेश देना ठीक नहीं। 
मूर्ख व्यक्ति उपकार करने वाले का भी
अपकर कर देता है। 
इसके विपरीत जो उसके विरुद्ध आचरण करता है,
वह व्यक्ति विद्वान कहता है।
मूर्ख का कोई मित्र नहीं है। 
और मूर्ख लोगों का क्रोध उन्हीं का नाश कर देता है। 
और मूर्ख से मूर्खों जैसी ही भाषा बोले। 
मूर्ख व्यक्ति को अपने दोष दिखाई नहीं देते हैं। 
उसे केवल दूसरे के दोष ही दिखाई देते हैं।
स्वामी द्वारा एकांत में कहे गए गुप्त रहस्य को मूर्ख व्यक्ति प्रकट कर देते हैं। 
मूर्ख से विवाद नहीं करना चाहिए। 
मूर्ख से विवाद करनी जैसी गलती
और दूसरा नहीं होता।
किसके कुल में दोष नहीं है ?
कौन ऐसा है जो रोग से पीड़ित ना रहे हो?
कौन ऐसा होगा जिसे कभी दुख ना मिला हो?
कौन है जो हमेशा सुखी रहा हो?
आपका आचरण
आपके कुल यह परिवार को बतलाता है, 
आपकी बोली आपके देश को बताती है। 
आपके आधार संस्कार आपके प्रेम भाव को,
और आपका शरीर आपके भोजन को बताता है।
Chanakya-Neeti-Quotes
कन्या का विवाह अच्छे कुल में करना चाहिए। 
पुत्रों को बिद्या और अध्ययन में लगाना चाहिए। 
शत्रु को दुख पहुंचाना उचित है, 
और मित्रों को धर्म का उपदेश देना उचित है।
दुर्जन और सर्प मैं चुनाव करना हो तो, 
सर्प चुने दुर्जन नहीं। 
क्योंकि सर्प ने तो एक ही बार डंसता है, 
परंतु दुर्जन व्यक्ति हर कदम पर आपको डंसता  है।
राजा लोग कुलीन लोगों को
इसलिए सम्मान दे कर संग्रहित करते हैं, 
क्योंकि यह लोग आदि अर्थात उन्नति की समय मध्य अर्थात 
साधारण समय में और अंत अर्थात विपत्ति में,
राजा का साथ नहीं छोड़ता है।

प्रलय की समय में सागर भी 
अपने मर्यादा को छोड़ देता।
सागर की प्रकृति मैं तो बदलाव आ भी सकता है, लेकिन सज्जन अर्थात साधु लोग
प्रलय मैं भी अपनी मर्यादा नहीं छोड़ते।
मूर्ख लोगों से दूर ही रहना उचित है।
क्योंकि देखने में वह मनुष्य ही है,
लेकिन आपने वचनों से आपको फूल के समान
वैसे ही चुभाते है, जैसे कि एक अंधे को कांटा।

सुंदरता, तऋणता और अच्छे कुल में
जन्म लेने के बाद भी, विद्याहिन मनुष्य बिना
सुगंध के पलाश के फूल के समान शोभा नहीं देता।

कोयल की शोभा उसके स्वर में है,
स्त्री की शोभा उसका पतिव्रत धर्म में है,
कुरूप व्यक्ति की शोभा उसकी बिद्रोता में है,
और तपसियो की शोभा उनके क्षमा सिलता में है ।
कुल के रक्षा के लिए यदि
यह व्यक्ति को त्यागना पड़े तो उसे त्याग दें।
उसी प्रकार गांव के रक्षा के लिए एक कुल को,
देश की रक्षा के लिए एक गांव को त्याग दें।
लेकिन आत्म सम्मान की रक्षा के लिए
यदि पूरे पृथ्वी का त्याग करना पड़े, तो उसे त्याग दें।

उपाय करने पर निर्धनता नहीं रहती,
प्रभु का नाम जप करने वाले का पाप नहीं रहता। 
मोन रहने से कलह नहीं होता और वह जो जागृत है उनके पास भय नहीं आता।

सुंदरता के कारण सीता का हरण हुआ,
अत्यंत अहंकार के कारण रावण का विनाश हुआ, 
अत्याधिक दान के कारण राजा बली बांधा गया।
 इसलिए अति को हमेशा त्याग दें।
समर्थ व्यक्ति को कौन सी वस्तु भारी है?
कार्यों में तत्पर के लिए कौन सा स्थान दूर है?
विद्वान के लिए कौन जगह विदेश है?
प्रिय वचन बोलने वाले का कौन शत्रु बनता है?

एक ही सुगंधित फूल वाले वृक्ष से
जिस प्रकार सारा वन सुगंधित हो जाता है,
उसी प्रकार एक सुपुत्र से
सारा कुल सुशोभित हो जाता है।
आग से जलते हुए एक ही सूखे वृक्ष से
सारा वन ऐसे ही जल जाता है।
जैसे कि एक कुपुत्र से पूरे कुल का नाश होता है।
विद्या से युक्त एक ही सुपुत्र से पूरा कुल
वैसे ही आनंदित हो जाता है,
जैसे पूर्णिमा से पूरी रात्रि।
शोक और दुख देने वाले बहुत से पुत्रों को
पैदा करने में क्या लाभ?
उनको आश्रय देने वाला तो एक पुत्र ही काफी है, 
जिससे कुल का सम्मान बढ़ता है।

पुत्र को पांच वर्षों तक प्यार करना चाहिए।
उसके बाद दश वर्षों तक अर्थात पंद्रा बर्श की 
आयु तक उसे दंड से सुधारना चाहिए।
शोला साल आने पर उसके साथ
मित्र जैसा व्यवहार करना चाहिए।

देश में भयानक उपद्रव होने पर,
शत्रु के आक्रमण के समय, 
भयानक अकाल के समय यह दुष्ट लोगों को
जो छोड़कर भाग जाता है,
वही जीवित रहता है।
जिसके पास धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष
इनमें से एक भी नहीं है,
उसके लिए अनेक जन्म लेने का फल
केबल मरण ही होता है।

जहां मूर्खों का सम्मान नहीं होता,
जहां अन्न संचित किया जाता है, 
जहां पति पत्नी में झगड़ा नहीं होता,
वहां लक्ष्मी बिना बुलाए ही ही निवास करती है।
इस संसार में कोई व्यक्ति अपने जन्म से नहीं
बल्कि अपने कर्मों से महान बनता है।
अपने कर्मों पर विश्वास रखिए राशियों पर नहीं।
क्योंकि राशि तो राम और रावण दोनों की एक ही थी। 
लेकिन उनको फल अपने अपने कर्मों के अनुसार मिले।

अगर आप प्रयास करने के बाद भी असफल हो जाते हैं, 
तो भी उस व्यक्ति से बेहतर होंगे,
जिसके बिना किसी प्रयास के ही सफलता मिल गई हो। 
असंभव शब्द का प्रयोग केवल कायर ही करते हैं, 
बहादुर और बुद्धिमान व्यक्ति तो
अपने मार्ग खुद बनाते हैं।

पिता की दौलत पर क्या घमंड करना,
मजा तो तब हे जब दौलत अपनी हो
और पीता घमंड करें।
धन का घमंड केवल दो ही लोगों को होता है,
पहला जिसके खानदानी दौलत मिली हो,
और दूसरा जिसने धोखे से पैसा कमाया हो।
अगर आप जीवन में शक्तिशाली बनना चाहते हैं,
तो अपने आप को शिक्षित करें।
दुष्ट इंसान की मीठी बातों पर कभी भरोसा मत करें।
वह अपना मूल स्वभाव कभी नहीं छोड़ सकता।
जैसे शेर कभी हिंसा नहीं छोड़ सकता।

यह बात हमेशा याद रखिए,
अगर कोई आपका बुरा करता है,
तो वह उसका कर्म है।
लेकिन आप कभी किसी का बुरा मत करिए,
क्योंकि यह आपका धर्म है।
सुखी जीवन का सबसे बड़ा मंत्र यह है,
हमें अपनी राज़ की बातें
कभी किसी को नहीं बतानी चाहिए।
जो लोग ऐसा करते हैं,
उन्हें भयंकर कष्ट झेलना पड़ता है।

नमक की तरह करवा ज्ञान देने वाला ही
सच्चा मित्र होता है।
इतिहास गवाह है आज तक नमक में
कभी कीड़ा नहीं लगे।
भाग्य भी उसका साथ देता है
जो हर संकट का सामना करके
अपने लक्ष्य के प्रति अटूट रहता है।
चाहे किसी के लिए
आप अपने वजूद ही क्यों ना दांव पर लगा दो,
वह तब तक आपका रहेगा,
जब तक आप उसके काम के हो।
जिस दिन आप उसके काम के नहीं रहोगे
क्या कोई गलती कर दोगे,
आपकी सारी अच्छाइयां भूल कर
वह अपनी औकात दिखा देगा।

संसार जरूरत के नियम पर चलता है,
सर्दियों में जिस सूरज का इंतजार होता है,
उसी सूरज का गर्मियों में तिरस्कार भी होता है।
आप की कीमत कब होगी,
जब लोगों को आपकी जरूरत होगी।
हमेशा दूसरों के गलतियों से सीखो,
अपने ही ऊपर प्रयोग करके सीखने से,
तुम्हारे आयु कम पड़ेगी।
गाय को कभी पशु ना समझो,
और माता पिता को कभी मनुष्य ना समझो।
क्योंकि यह तीनों ही साक्षात भगवान के स्वरूप है।
कोई भी कार्य शुरू करने से पहले,
खुद से तीन प्रश्न कीजिए,
मैं यह क्या कर रहा हूं?
इसके परिणाम क्या हो सकते हैं?
क्या मैं सफल हो पाऊंगा?
जब गहराई से सोचने पर
इस प्रश्न के संतोषजनक उत्तर मिल जाए,
तभी आप आगे बड़िये।
आंख के अंधे को दुनिया नहीं दिखती,
बासना के अंधे को विवेक नहीं दिखता,
मद के अंधे को अपने से श्रेष्ठ नहीं दिखता,
और स्वार्थ के अंधे को अपना दोष कभी नहीं दिखता। 
व्यक्ति अपने गुणों से ऊपर उठता है,
ऊंचे स्थान पर बैठने से ऊंचा नहीं हो जाता।

कष्ट और विपत्ति,
मनुष्य को शिक्षा देने वाले श्रेष्ठ दो गुण हैं।
जो व्यक्ति साहस के साथ उनका सामना करता है,
वही एक दिन विजई होता है।
अपनी जुबान की ताकत कभी
अपनी माता पिता पर ना अस्माइए,
जिन्होंने आपको बोलना सिखाया है।

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