Best Hindi poetry on India you will love (2020)

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Best Hindi poetry on India

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सर के है आब लावारिस, घर पर बैठा इंसान है
जहां खेलते थे सब बच्चे, खाली वह हर मैदान है।

मंदिर और मस्जिद है बंद, खुली राशन का दुकान है
हौसला है फिर भी दिलों में, क्योंकि मेरा भारत महान है

हस्पतालों में जूझ रहे हैं सब डॉक्टर, इस वक्त इंसानियत ही भगवान है,
खाकी में निकले वीर सिपाही, उनको हार हिंदुस्तानियों का सलाम है।

घर में रहकर हर नागरिक दे रहा अपना योगदान है
हौसला है फिर भी दिलों में क्योंकि मेरा भारत महान है।

पूरी दुनिया का दुश्मन अब एक है, पृथ्वी आप जंग के मैदान है,
सरहदों में आज भी सिपाही, दे रहे प्राणों का बलिदान है।

माना के वक्त है मुश्किल, पर इरादे आब चट्टान है
हौसला है फिर भी दिलों में, क्योंकि मेरा भारत महान है

(जय हिंद,वंदे मातरम)
जब गली गली और गांव गांव ज्ञानदीप जल जाएगा
लड़का लड़की और दहेज का हर बंधन कट जाएगा
राष्ट्रहित के पुलकित स्वर में जब शंखनाद हो जाएगा
सच कहता हूं भारत सोने का चिड़िया कहलायेगा ।

अभी कहीं नारी कमजोर बनकर जीती है
अनहोनी का डर रहता है घर से नहीं निकलती है,
इस समाजके हर बंधन को वह अपना कर्तब समझती है
दहेज प्रथके कु चक्रव्यू मैं तिल तिल कर के मरती है।

क्यों बाप भी बेटी को अपने बोझ समझती है
क्यों हर हत्यारा औरत का अपने को मर्द समझता है
जिस दिन इस रोटी का युद्ध से शंखनाद हो जाएगा
सच कहता हूं भारत सोने का चिड़िया कहलायेगा।

याद करो वह कुर्बानी जब इंकलाबी डोले थे
भारत मां के वीर दीवाने सर के बल भी दौड़े थे।

मां भी अपने बेटों को तब काला तिलक लगाती थी
उनके चरणों की माटी भी चंदन कहलाती थी।

उस मां की तो चिखे भी तब देश राग बन जाती थी
जिस मां के अपने बेटों की आरती घर पर आती थी।
भारत की यह पावन धरती बलिदानों की छाती थी।

कहां गई वह नेत्र किताब जो बचपन में तुम सीखी थी
मानवता की नेक दुहाई ग्रंथों से जो फेरी थी
कश्मीर से जेएनयू तक अपने अलगाव फैलाते हो
भारत मां के टुकड़ों पर यह कैसा गाना गाते हो?

जब भी देश का बेटा सरहद पर लड़ने को जाता है
वीर सपूत के सम्मान में पर्वत भी सीर झुकाता हैं
लेकिन जो भारत मां के टुकड़ों का गाना गाते हैं
राष्ट्रवाद के ऐसे पापी जंगली गीदड़ कहलाते हैं।

आज मैं जंगली गीदड़ को इंसान बनाने आया हूं
भारत मां के टूटे सपनों को याद दिलाने आया हूं
अपने अंतर मन की मैं कुछ बेेथा बताने आया हूं
सोने की चिड़िया को फिर से पंख लगाने आया हूं।

(जय हिंद, जय भारत)

I ❤️ My India
सुनो इधर आओ, कुछ पत्थर ले आओ, एक कब्र खुदआओ, 
और उस पर लिखो भारत माता की जय
और उसमें मुझे दाफनाओ।

 दाफनाओ मुझे क्योंकि मैंने असली भारत देखा है
पेट के लिए करते हार इंसा को महाभारत देखा है।

देखे  हैं मेंने वह रावण भी जो सीता ओं को हर लेते
पर देखना पाया वह राम कहीं जो यह रावण से लड़ लेते हैं।

देखा है मैंने वह अपाहिज बाप जिसका बच्चा सरकारी स्कूल में जाता है
पढ़ता लिखता नहीं है साहब वह जो खाना मिलता है ना
उसे घर ले आता है।

घर वाला भी खाता है, घर वाली भी खाती है
वह जो बांध बनते हैं ना साहब कागजों पर
उस नरेगा में काम करने जाती है।

दर्द भी बहुत होता है पर वोट भी हम देते है
५०० में गुजारा नहीं चलता है साहब
 १००० में खुद को बेच देते हैं।

देखा है मैंने वह भारत भी जहां दुर्गा पूजी जाती है
और देखा है मैंने वह भारत भी जहां बेटी कोख में मारी जाती है।

देखा है मैंने चुनर चली करते देवी मूरत पे
देखा है मैंने चुनर चली उतरते भोली सूरत से।

प्यारी प्यारी गुड़िया अब कोठो में दिख जाती है
कलियों के मुस्कान चांद नोटों पर बिक जाती है।

तब लगता है मुझको शायद अगर अच्छा होता वह कोख़ में मर जाती है
तब तो उसका जिस मर जाता लेकिन रूह तो जिंदा होती।

देखा है मैंने वह भारत भी जहां सूरज पहुंच ना पाता है
बचपन बंद कमरों में साहब दिन रात चूड़ियां बनाता है।
२२ घंटे काम वह करता२ घंटे सो पाता है
और भूख क्या होती उससे पूछो सूखे निवाला भी पानी के साथ निकल जाता है।

जितने तारे रोज रात को फलक सजाने आते हैं
उतने नन्ने चांद जमी पर भूखे ही सो जाते हैं।

(भारत माता की जय)
आजादी का एक दीवाना नाम भगत सिंह लिखता था
गांव के बाकी सारे बच्चों की तरह ही तो दिखता था।

सब गुड्डे गुड़िया खेलते थे, उनको आजादी प्यारी थी
भगत सिंह के सीने में दबी हुई चिंगारी थी।

उसके आंखों के सामने जलियांवाला बग हुआ
जनरल डायर ओके आदेशों से कैसा खूनी फाद हुआ।

उस दबी हुई चिंगारी ने जन्म दिया एक ज्वाला को
क्रांतिकारी बना भगत सिंह त्याग प्रेम की माला को।

सन दर्स को मारा बलिदानों की कसम भगत सिंह खाई थी
के यह धमाके संसद में बहरे को गूंज सुनाई थी।

भेजा जेल भगत सिंह को उल्टी गोरों की चाल हुई
और पहली बार ११६ दिन की भूख हड़ताल हुई।

वह आरा रहा के जिसने सपने इंकलाब के देखे थे
उस मूंछ ताऊ के आगे घुटने अंग्रेजों ने टेके थे।

वह दोषी सिद्ध हो रहे थे और मौत का पंजा कस्ता था
और जज को देखकर भगत सिंह दीवानों जैसा हंसता था।

जो चाहता भगत सिंह आखिर वह अंजाम हुआ
तीनों को फांसी दी जाए कोर्ट में यह ऐलान हुआ

मां से मिलकर बोला बेबे मैं दूध का कर्ज चुकाऊंगा
आजादी का हर दीवाने में मैं नजर तुझको आऊंगा।

मां से बोला तू मत रोना यह धरती मेरी माता है
रोएगा गर्व करें मां के तो कुछ भी नहीं समझ आता है।

२३ मार्च का दिन आया यह भूमंडल ही डोल उठा
जेल का हर कोना उस दिन रंग दे बसंती बोल उठा।

भगत सिंह की आमिरशाह आदत नियति भाग गई होगी
जब चूमा होगा भगत सिंह ने रस्सी कांप गई होगी।

पत्थर दिलवाले अंग्रेजों के दिल भी बिघल गए होंगे
और जल्लाद ओके आंखों से भी आंसू निकल गए होंगे।

देह छोड़ दी भगत सिंह ने बनके इबादत गूंज उठा
देह छोड़ दी भगत सिंह ने बनके शहादत गूंज उठा
इंकलाब के नारों से फिर सारा भारत गूंज उठा।

२३ साल का एक लड़का आजादी का दीवाना था
वह शहीद ए आजम कहलाया बस तुम्हें यही बदलाना  था ।

आजादी के अफसरों को जब भी कोई शायर गाएगा
सुखदेव, भगत और गुरु तुम्हारा नाम हमेशा आएगा।

शहीदों की मजारों पर भरेंगे हर बरस मिले
वतन पे मरने वालों का यही निशान होगा।

(इंकलाब जिंदाबाद, भारत माता की जय)

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जब बहता है खून, तब दीवारें भी रोती है
सोच कर हैरान हूं कि वह मां कैसे सोती है।

सब कहते हैं मेरे जिंदगी में परेशानी
लेकिन क्या तूने कभी सोनी उनकी कहानी है

गोली उन्हें लगती है, दर्द होता यहां है
जरा सोच, उसके सामने तेरी यह परेशानी क्या है।

अगर वहां एक सैनिक बहा सकता है अपना खून
तो मैं भी ला सकता हूं अपने काम में जुनून।

हैरान हूं सोच कर की इन शहीदों का हिसाब कौन देगा
अगर एक सैनिक ना हुए तो इस देश की जिम्मेदारी कौन लेगा।

लोग कहते हैं कि भगवान सब ठीक कर देगा
मगर मैंने इन्हीं में भगवान को देखा।

सोचता हूं की यह इतनी हिम्मत कहां से लाते हैं
हमारे लिए क्यों यह अपना खून बहता है।

वहां सरहद पर दुश्मन करते इन पर वार है
मगर सह लेते हैं ये क्योंकि इन्हें अपने देश से प्यार है।

कितने जाने गई आज तक हमारे लिए
कितने कुर्बानी दी आज तक हमारे लिए
कितने दर्द सहे आज तक हमारे लिए
कितने शहीद हुए आज तक हमारे लिए
कितनी माय रोई आज तक हमारे लिए
और आगे भी लड़ते रहेंगे सिर्फ हमारे लिए।

जी तो करता है की इनके लिए जान दे दूं
सोचता हूं इस देश के लिए क्या योगदान दे दूं
तो अंदर से आवाज आई, तू कुछ करके दिखा 
तू कुछ बन के दिखा

वहां सैनिक लड़ रहा है, मार रहा है, हर चीज का हिसाब होगा
सैनिक की मेहनत बेकार नहीं जाएगा,अगर तेरे पास एक ख्वाब होगा।

यह लोग भी अजीब है, डर डर के जीता है
मगर सैनिक, मार मार के जीता है।

तो निकालो अपने अंदर से मौत का डर
क्योंकि एक दिन सबको मरना है
तो जा पाता है कि एक दिन सबको मरना है
तो ऐसी जिंदगी से क्या डरना है।

बस मन में यह ठान लो कि मरने से पहले कुछ करना है
जिंदगी में शीश सिर्फ मां बाप और भगवान के झुकाऊंगा।

यह वादा रहा मेरा कि मरने से पहले इस देश के लिए,
इस मिट्टी के लिए कुछ करके दिखाऊंगा
जन गण मन अधिनायक जय है भारत भाग्य विधाता
मन में कोई डर नहीं क्योंकि साथ में है भारत माता।

(जय हिंद, वंदे मातरम)
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इतिहास का मैं आईना हूँ,तहज़ीब का रंग सुनहरा हूँ
गंगा-जमुना मेरी आँखें,मैं नए भारत का चेहरा हूँ।

मैं कल भी था, मैं आज भी हूँ, 
मैं नव-युग का अंदाज़ भी हूँ।

सारी दुनिया का घर मुझ में
इस मिट्टी का आदर मुझ में।

मैं देशभक्त भी गहरा हूँ
मैं नए भारत का चेहरा हूँ।

मैं बेटी की मुस्कान में हूँ
मैं नारी के सम्मान में हूँ।

विज्ञान में और किसान में हूँ
हर वीर में और जवान में हूँ।

मैं सीमाओं का पहरा हूँ
मैं नए भारत का चेहरा हूँ।

अब चाँद पे पाँव जमाना है
सूरज से आँख मिलाना है।

इक नया सवेरा लाना है
संकल्प नया दोहराना है।

ना ठहरा था, ना ठहरा हूँ
मैं नए भारत का चेहरा हूँ।

(वंदे मातरम, जय हिंद)

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ये बात है उस शाम की
ना अल्लाह की ना राम की।

कि जल रही थी ये जमीं
बीघल रहा था आसमां।

शाहदतों की जीत पर
मचल रहा था ये जहां।

लाशों की उन चीत्कार से
बंध चुका था एक समां।

सब मग्न खुद की धुन में थे
न तू वहाँ न मैं वहाँ।

सुना है कुछ काफिरों ने
बड़ा लंबा जाल बिछाया था।

सदियों के सोने की चिड़िया को भी 
पीतल कर डाला था।

कुचल कर सैकड़ों बलिदानों को
बापू ने नाम कमाया था।

तू हिन्दू है तू मुस्लिम है
सबपर स्टैंप लगाया था।

केहकर कि सबकी मर्जी है
नेहरू का हिंदुस्तान बनाया था।

अब भी पूछती है ये धरती
क्या तूने मुझे बताया था।

बंटवारे कि इन रंजीशों से
तिरंगा भी अब बच ना सका,

हरा मुसलमां हो गया और
भगवा हिन्दू केहलाने लगा।

सबकी करनी का बोझ लिए
है श्वेत अब भी स्वतंत्र खड़ा,

चौबीस तीलियों के चक्र ने
सारे धर्मों को बांध रखा।

सत्तर सालों की अज़ादी
कल रात बिलख कर रोई थी

खाक हुए सारे सपने
जो सदियों से संजोई थी।

झूठे जुमलों की बारिश से था 
आकाल पड़ा खलिहानों में

क्षण क्षण रुकती इन सांसो से
विद्रोह हुआ गलियारों में 

लगते हैं हाय हाय के नारे
अब मंदिर में और रमजानों में

है खुदा भी सकते में आखिर
ये कैसा मर्ज़ हुआ इंसानों में।

हर घर को लूट लिया मिलकर
इस मुल्क के चौकीदारों ने।

(जय हिंद, जय भारत)

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हम क्या जाने क्या हैं आजादी
हमने कोन सा अंग्रेजी का चाबुक खाया हैं,

आजादी के कीमत उनसे पूछो
जिन्होंने इसके लिए सब कुछ गवाया है।

आजादी के कीमत उनसे पूछो 
जिन्होंने हर कदम पहरा देखा है,

आजादी के कीमत उनसे पूछो
जिन्होंने दिनों में भी अंधेरा गहरा देखा है।

आजादी के कीमत उनसे पूछो
जिन्होंने जीवन काले पानी में गुजारा था,

आजादी की कीमत उनसे पूछो
जीने अपना भारत जान से भी प्यारा था।

आजादी की कीमत उनसे पूछो
बंटवारे में जिनका घर तोड़ा था,

आजादी की कीमत उनसे पूछो
जिन्होंने देश के लिए अपना घर छोड़ा था।

आजादी की कीमत उनसे पूछो
जो हंसते-हंसते फांसी में झूले थे,

आजादी की कीमत उनसे पूछो
जो देश की खातिर सब कुछ भूले थे।

आजादी की कीमत उनसे पूछो
जिन्होंने अपने खून से माथे पर तिलक लगाया था,

आजादी की कीमत उनसे पूछो
जो अपने लाल को खून से लाल देखकर मुस्काया था।

आजादी की कीमत उनसे पूछो
जिन्होंने अपनी पुत खोए थे,

आजादी की कीमत उनसे पूछो
जो हंसते-हंसते मौत की नींद सोए थे।

आजादी की कीमत उनसे पूछो
जिन्होंने कांटा दिया पर सर अपना झुकाया नहीं,

आजादी की कीमत उनसे पूछो
जिनका बेटा कभी लौट कर घर आया नहीं।

आजादी की कीमत उनसे पूछो
जिन्होंने बेटे की मौत पर जय हिंद नारा लगाया था

आजादी की कीमत उनसे पूछो
जिन्होंने पहली दफा तिरंगा फेर आया था।

अरे हमने क्या किया इसके लिए
बस पुरखो से विरासत में पाई है,

आजादी के कीमत तो उनसे पूछो
जिन्होंने इसकी कीमत चुकाई है।

(जय हिंद, जय भारत)

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आजादी की कभी शाम नहीं होने देंगे
शहीदों की कुर्बानी बदनाम नहीं होने देंगे,

बची हो जो एक बूंद भी की तब तक
भारत माता कि आंचल कभी नीलाम नहीं होने देंगे।

लहराए गा तिरंगा नीले आसमान पर
भारत का नाम होगा सबकी जुबान पर,

ले लेंगे उसकी जान या दे देंगे अपनी जान
कोई जो उठाएगा आंख हमारे हिंदुस्तान पर।

काले गोरे का भेद नहीं
हर दिल से हमारा नाता है,

कुछ और ना आता है हमको
हमें प्यार निभाना आता है।

हम अपने खून से लिखे कहानी ये वतन मेरे
करें कुर्बान हस्कर ये जवानी ये वतन मेरे।

दिली ख्वाहिश नहीं कोई मगर यह इल्तेज़ा बसे है
हमारे हौसले पा जाए मानी ये वतन मेरे।

गूंजे कहीं पर शंख, कहीं पे आजान हैं
बाइबल है, ग्रंथ साहब है, गीता का ज्ञान है।

दुनिया में कहीं और मंजर नसीब नहीं
दिखा दो दुनिया को की यह हिंदुस्तान है।

यह मेरे वतन के लोगों तुम खूब लगा लो नारा
यह शुभ दिन है हम सब का लेहराओ तिरंगा प्यारा।

(जय हिंद, १५ अगस्त स्वतंत्रता दिवस)

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जो अब तक ना खोला वह खून नहीं पानी है
और जो देश की काम ना आए वह बेकार जवानी है।

जमाने भर में मिलते हैं आशिक कहीं
मगर वतन से खूबसूरत कोई सनम नहीं होता,
नोटों में लिपट कर, सोने में सिमटकर मरे हैं कहीं
मगर तिरंगा से खूबसूरत कोई कफ़न नहीं होता।

मैं भारत बरस का हरदम सम्मान करता हूं
यहां की चांदनी मिट्टी का गुणगान करता हूं,
मुझे चिंता नहीं है स्वर्ग जाकर मोक्ष पाने की
तिरंगा हो कफन मेरा, बस यही अरमान रखता हूं।

कर जज्बे को बुलंद जवान
तेरे पीछे खारी आवाम,
हर पत्ते को मार गिरा एंगे
जो हमसे देश बटवा एंगे।

कतरा भी बहा दिया वतन के वास्ते
एक बूंद तक ना बचाई इस तन के वास्ते,
यूं तो मरते हैं लाखों लोग हर रोज
पर मरना तो वह है जो जान जाए वतन के वास्ते।

आओ झुक के करे सलाम उन्हें
जिनके हिस्से में यह मुकाम आता है,
कितने खुशनसीब है वह लोग
जिनके खून वतन के काम में आता है।

तैरना है तो समंदर में तेरे
नालों में क्या रखा है,
प्यार करना है तो देश से करो
औरों में क्या रखा है।

खूब बहती है अमन की गंगा, बहने दो
मत फैलाओ देश में दंगा, रहने दो,
लाल हरे रंग में ना बांटो हमको
मेरे छत पर एक तिरंगा रहने दो।

यह मेरे वतन के लोगों 
जरा आंख में भर लो पानी
जो शहीद हुए हैं उनके
जरा याद करो कुर्बानी।

(भारत माता की जय)

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