20 Best Hindi poetry on love sad by Gulzar (2020)

Hey searching for Hindi poetry on love. In this article, You will get the best #Gulzar sad love #poetry with images. And many more #Stories you love.

Related:- 5 Best Hindi short moral story (2020)

Hope you know Tellerify is the Best Website for readers, In our Blog, you will get a lot of Hindi and English stories with many more categories.

Ok without wasting your time see…

20 Best Hindi poetry on love sad by Gulzar

~1~

किसी से मिलने की अब तमन्ना क्या करें खुद से मिले यहां एक जमाना हो गया।

झूठी बात पर भी जो वाह-वाह या करता है वही लोग हमें अक्सर बर्बाद किया करते है।

हर कागज की किस्मत नहीं होती किताब हो जानाकुछ कश्ती बनकर बारिशों में तैर जाया करती है।

इजहार से पता नहीं चलता साहब किसी के प्यार का इंतजार बताता है कि तलब गार कैसा है।

लोग कहते हैं कि संगत का असर होता है लेकिन कांटो ने देखो आज तक महकना नहीं सीखा।

वह जीने हमने सौंपी है दिल की सभी भड़कानेवह आज अपना एक पल देने में हजार बार सोचते हैं।

जब किसी को भूल पाना मुश्किल हो जाए तो समझ जाना कि उस शख्स याद बनकर जिंदगी भर रुलाने वाला है।।

~2~

Hindi poetry on love sad by Gulzar

इश्क उसी से करो जिनमें कमियां बेशुमार हो यह खूबियों से भरे चेहरे तो इतराते बहुत है।

फर्क तो अपनी अपनी सोच का है जनाब  वरना दोस्ती भी मोहब्बत से कम नहीं होती।

अगर मोहब्बत उससे ना मिले जिसे आप चाहते हैं तो मोहब्बत उसको जरूर देना जो आपको चाहता है।

यह दायरे यह बंदिशे किसी और पर थोपना जनाब मैं तो हवा का झोंका हूं मुझे आवारगी पसंद है।

काश कभी फुर्सत में उन्हें खयाल आ जाए के कोई याद करता है उन्हें अपनी जिंदगी समझकर।

वह शख्स का गम कोई तो सोचे जी से रोते हुए देखा ना हो आज तक किसी ने।

वह बेवफा है यह जानते थे मगर खामोश इसलिए रहे की उसकी आखिरी हद देखनी थी।

~3~

जख्म खाने की कोई उम्र नहीं होती जनाब हर उम्र के अपने अलग जख्म होता है।

मुद्दतों बाद मिली है आज खुद की खबर औरों की परवाह करते करते हम खुद को भुला बैठे थे।

कभी देर तक बातें करते करते यूं ही सो जाते थे आज उन्हें बातों को याद करते करते रात गुजर जाती है।

किसी ने थोड़ा सा अपना वक्त दिया था मुझे मैंने आज भी उसे संभल कर रखा है।

बड़ी लंबी गुफ्तगू करनी है तुमसे तुम आना एक पूरी जिंदगी लेकर।

एक मामूली सा खयाल ही तो हूं मैं कभी बिछड़ कर मिल जाऊं राहों में तुम्हें तो तुम देख कर मुस्कुरा देना।

जब दो प्यार करने वालों के बीच कोई तीसरा आ जाए तो समझ जाना कि रिश्तो में बेवफाई होने वाली है।

~4~

तुम शौक से चलाओ मेरे दिल के आशियाने को हम दुआ करेंगे कि तुम्हारा हाथ ना जले।

जब उसने एक नया दर्द दिया तो तब यह खयाल आया के हम ही ने तो दुआओं में उसके सारे दर्द मांगे थे।

सबको शौक है यहां दरारों में झांकने का दरवाजा खोल दो अगर तो कोई हल तक ना पूछेगा।

अच्छा लगता है मुझे उन लोगों से बात करना जो मेरे कुछ भी ना होकर मेरे बहुत कुछ है।

क्या फर्क पड़ता है कि कैसे हैं हम जिसने जैसी राय बना ली उसके लिए वैसे ही हम।

जब नींद नहीं आती तो तब अक्सर यह एहसास होता है के दौलत शोहरत से ज्यादा तो कीमती ये सुकून होता है।

जब कोई अपना गुस्से में कहे कि मुझे अकेला छोड़ दो तो समझ जाना कि उस वक्त उसे आपकी बहुत जरूरत है।

~5~

रवैया देखकर बेटों का  बूढ़े बाप की यह खयाल आया जब बारिश ठहर जाती है तो छतरी बोझ लगने लगती है।

सब तारीफ कर रहे थे अपने अपने यार की हमने नींद का बहाना बनाकर महफिल छोड़ दी।

पल भर की बातें फिर महीनों की दूरी आदत तुम्हारी भी थोड़ी तनख्वाह सी है।

दुनिया वह किताब है जो कभी पढ़ी नहीं जा सकती लेकिन जमाना वह उस्ताद है जो सब कुछ सिखा देता है।

यह सोचकर कटवा दिया कमबख्त ने वह पेड़ के आंगन में मेरे होकर पड़ोसी को छांव देता है।

तुम्हें चाहने वाला जब तुम्हें वक्त देना बंद कर देता है तो समझ जाना कि वह किसी और का हो चुका है।

अकल आई थी हमें मशवरा देने लेकिन इसकी ने उसे मुस्कुराकर टाल दीया।

~6~

वो मन बना चुके थे हमसे दूर जाने का और हमें लगा कि हमें मनाना नहीं आता।

ना जाने किसने पढ़ी है मेरे हक में दुआ आज तबीयत में थोड़ा आराम सा है।

तुझे लिखते वक्त महसूस होता है अक्सर मुझे खुद से बिछड़े एक जमाना हो गया।

खामोशियां बहुत कुछ कहती है कान लगाकर नहीं दिल लगाकर सुनो।

बहुत देर कर दी तुमने मेरे दिल की धड़कन महसूस करने में वह दिल नीलाम हो गया जिस पर कभी हुकूमत तुम्हारी थी।

अगर मोहब्बत किसी से बेहिसाब हो जाए तो समझ जाना कि वो किस्मत में नहीं है।

बनाकर उसने मेरे संग रेत का महल ना जाने क्यों उसने बारिशों को खबर कर दी।

~7~

Hindi-poetry-on-love-sad-by-Gulzar

दाद देते हैं तुम्हारे नजर अंदाज करने के हुनर को जिसने भी सिखाया, उस्ताद कमाल का होगा।

क्यों शर्मिंदा करते हो रोज यूं हाल पूछकर हाल हमारा ही है जो तुमने बनाकर रखा है।

मिल गया होगा कोई गजब का हमसफर वरना मेरा यार यूं ही बदलने वाला ना था।

नींद भी नीलाम हो जाती है दिलों की महफिल में किसी को भूल कर सो जाना इतना आसान नहीं होता।

यकीन था कि मुझे भूल जाओगे तुम खुशी इस बात की है कि तुम उम्मीद पर खरे उतरे।

किसी ने कहा था मोहब्बत फूल जैसी होती है कदम रुक गए मेरे, बाजार में जॉब फूलों को बिकते देखा।

याद नहीं की और उठा था या मैं रूठा था लेकिन साथ हमारा जरा सी बात पर छूटा था।

अजीब खेल है इस मोहब्बत का किसी को हम ना मिले, कोई हमें ना मिला।

~8~

तुझे बेहतर बनाने की कोशिश में तुझको ही वक्त नहीं दे पा रहा हूं,

माफ करना ए जिंदगी तुझको ही जी नहीं पा रहा हूं।

खुद से ज्यादा संभाल कर रखता हूं मोबाइल अपना क्योंकि रिश्ते सारे अब इसी में कह दें।

बचपन में भरी दुपहरी मैं भी नाप आते पूरा मोहल्ला जब से डिग्रीया समझ में आई पांव चलने लगे हैं।

जो खानदानी रईस है वह रखते हैं मिजाज नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है तुम्हारी दौलत नहीं रही है।

वक्त रहता ही नहीं कहीं ठीक कर अब आदत उसकी भी कुछ इंसान सी है।

लगता है जिंदगी कुछ खफा है चलिए छोड़िए साहेब, कौन सी पहली दफा है?

सिर्फ एक सफाफ पलटकर उसने बीती बातों के दुहाई दी है फिर लौट के जाना होगा, यार ने यह कैसी दुहाई दी है!

~9~

यूं तो जिंदगी में नमक की कमी ही रही लेकिन जब भी मिला जख्मों पर ही मिला।

नाराज तो नहीं थे तेरे जाने से मगर हैरानी इस बात से थे कि तुमने मुड़कर तक नहीं देखा।

कौन कहता है कि अकेले हम हजारों गम हरदम साथ रहते हैं मेरे।

हर शख्स को नफरत यहां झूठ से है लेकिन परेशान हूं मैं यह सोच कर कि फिर झूठ बोलता कौन है?

कभी समझौता किया तो कभी हंसकर ख्वाहिशोंको मर गए रिश्तो को बचाते बचाते हम खुद से हार गए।

पत्थर नहीं हूं मैं, मुझमें भी नमी है दर्द बयां नहीं करता, बस इतनी सी कमी है।

कौन कहता है कि वक्त बहुत तेज है कभी किसी का इंतजार तो करके देखो।

~10~

शराब की बोतल से है यह इमानदारी कोई छोड़ता नहीं और कोई छूता तक नहीं।

मैं सूरज के साथ रहकर भी भुला नहीं आदाब लोग जुगनू का साथ पाकर मगरूर हो जाता है।

फुर्सत में करेंगे हिसाब तेरे साथ ए जिंदगी उलझे हुए हैं हम अभी खुद को ही सुलझाने मैं।

जिसका भी चेहरा खिला,वह अंदर से कुछ और निकला मासूम सा कबूतर नाचा तो मोर निकला।

फसलों का एहसास तो तब हुआ जब मैंने कहा ठीक हूं, और उसने मान लिया।

मैं वक्त का मुजरिम हूं, लेकिन यह वक्त ने कैसा इंसाफ किया जब तक जीते हो जलते रहो, जब चले जाओगे कहना माफ किया।

तू कितनी थी खूबसूरत क्यों ना हो जिंदगी खुशमिजाज दोस्तों के बगैर तू अच्छी नहीं लगती।

बेवजह कोई इल्जाम लग जाए तो क्या कीजिए फिर यूं कीजिए फिर वह गुना कर लीजिए।

~11~

सोचता हूं दोस्तों पर मुकदमा कर दूं इसी बहाने तरीकों पर मुलाकात तो होगी।

ठुकरा दो अगर, दे कोई जिल्लत से समंदर अगर इज्जत से जो मिल जाए तो कतरा भी बहुत है।

बहुत छाले थे उसके पैरों पर कमबख्त उसूलों पर चला होगा।

बचपन में भारी दुपहरी में नाप आते थे पूरा मोहल्ला जब से डिग्रियां समझ में आई, पाव जलने लगे।

कुछ जख्मों की कोई उम्र नहीं होती नाउम्र साथ चलते हैं, जिस्म के खाक होने तक।

फितरत दो कुछ यूं भी है इंसान की बारिश खत्म हो जाए तो छतरी बोझ लगने लगती है।

एक कशमकश है, जिंदगी कैसे बसर करो पैरों को काट फेंके या चादर बड़ी करें।

इतना क्यों सिखाएं जा रहे हो जिंदगी हमें कौन सी यहां संदिया गुजारनी है।

~12~

बहुत गुरूर था छत को छत होने पर एक मंजिल और बनी छात् फर्श हो गई।

मुझे परखने में पूरी जिंदगी लगा दी उसने काश कुछ वक्त समझने में लगाया होता।

तेरे जाने से कुछ बदला तो नहीं रात भी आई थी, दिन भी आया था हां… मगर नींद नहीं।

एक उम्र और थी कि जादू में यकीन था एक उम्र यह है की हकीकत से भी शक है।

फुर्सत ही महंगी है वरना सुकून तो इतना सस्ता है कि चाय के प्याली से मिल जाता है।

बदले हैं मिजाज उनके कुछ दिनों से वह बात तो करते हैं, लेकिन बातें नहीं करते।

फासला बना लिया तुमने मैंने दीवार पक्की कर ली

जरा सी गलतफहमी में देखो कितनी तरक्की कर ली।

~13~

जी लो हर लम्हा बीत जाने से पहले लौटकर सिर्फ यादे आते हैं, वक्त नहीं।

कैसे कह दूं कि बदले में कुछ नहीं मिला सबक कोई छोटी चीज तो नहीं।

इत्तेफाक से ही सही रंग सब ने दिखाए हैं चेहरे सब ने बदले हैं, सामने सबके आए हैं।

हंसता तो मैं रोज हूं मगर खुश हुए जमाना हो गया।

वजह पूछने का मौका ही ना मिला वह लहजा बदलते गए, और हम अजनबी होते गए।

कुछ चीजें कमजोर हिफाजत में भी महफूज रहती है जैसे मिट्टी की गुल्लक में लोहे के सिक्के।

हकीकत की रसिया पे लटक कर ना जाने कितने ख्वाब खुदकुशी कर गए।

~14~

Hindi-poetry-on-love-sad-by-Gulzar

यूं तो गलत नहीं होते अंदाज़ चेहरों के लेकिन लोग वैसे ही नहीं होते जैसे नजर आते हैं।

हम तो बने ही थे तबाह होने के लिए तेरा छोड़ जाना तो महज एक बहाना था।

फिर नहीं बस्ते वह दिल जो एक बार टूट जाते हैं कब्रे कितने भी सवार लो, कोई जिंदा नहीं होता।

आप हिचकियां आती है तो बस पानी पी लेते हैं अब यह बहन छोड़ दिया कि कोई याद करता है।

नफरत करना तो हमें कभी सीखा ही नहीं मैंने तो दर्द को भी चाहा है अपना समझ कर।

उन रास्तों से गुजरने से भी डरते हैं अब हम जिन रास्तों पर कभी उनसे मुलाकात हुई थी।

क्यों लफ्ज़ ढूंढते हो खामोशी में मेरे तुम मेरी आंखों में देखो, तूने कोई फसाने मिलेगी।

~15~

मेरी मां आज भी अनपढ़ है मैं रोटी एक मांगता हूं, वह तो ला कर देती है।

लोग चले हैं जन्नत के पाने की खातिर दे खबरों को इंतला कर दो की मां घर पर ही हैं।

तूने तो रुला कर रख दिया जिंदगी जा कर पूछ मेरी मां से कितने लाडले थे हम।

एक रात में अपने कमरे में अकेले सो रहा था अचानक एक आहट से मेरी आंखें खुल गई

सामने फरिश्ते को देखा तो मैंने घबराकर पूछा यहां कैसे?

फरिश्ते ने कहा… तेरी मां को लेने आया हूं!

मैं घबरा गया…

दिल बैठ गया, आंखें नम हो गई।

मैंने कहा एक सौदा करते हैं फरिश्ता मुस्कुराया और बोला…

लेने तो मैं तुझे ही आया था, लेकिन तुझसे पहले तेरी मां ने सौदा कर लिया।

क्यों बोझ हो जाते हैं वह झुके हुए कंधे साहब जिन पर चढ़कर तुम सारा जहां देखा करते थे।

~16~

लोग तरसते हैं कि कोई फिकरमंद हो वरना कौन ठीक होता है यूं हालचाल पूछने से।

कद बढ़ता नहीं साहब यूं ही पिंरिया उठाने से ऊंचाईयां तो मिलती है, सिर्फ सर झुकाने से।

आप ना कोई शिकवा, कोई गिला, ना मालाल रहा सितम तेरे ही बेहिसाब थे, सब्र मेरा भी कमाल रहा।

वह पत्थर कहां मिलता है, बताना जरा दोस्तों जिसे लोग दिल पर रखकर एक दूसरे को भूल जाते हैं।

बड़ी अजीब सी है इस शहर की रोशनी उजालों के बावजूद भी चेहरे पहचानना मुश्किल है।

मोहब्बत का खुमार उतरा तो यह एहसास हुआ जिसे मंजिल समझते थे, वह तो बे मकसद रास्ता निकला।

मुमकिन नहीं है हर किसी के नजर में बेगुनाह रहना बस खुद से यह वादा करो कि अपनी नजर में बेदाग रहें।

चूम लो हर मुश्किल को अपना मान कर क्योंकि जिंदगी जैसी भी है, है तो अपने ही।

~17~

Hindi-poetry-on-love-sad-by-Gulzar

उजालों में मिल ही जाएगा कोई ना कोई तलाश उसकी करो जो अंधेरों में भी साथ दे।

मंजिलों से भी गुमराह कर देता है कुछ लोग हर किसी से रास्ता पूछना अच्छा नहीं होता।

मुझे रिश्तो की लंबी कतार से कोई मतलब नहीं कोई दिल से हो मेरा, वह एक शख्स से ही काफी है।

एक फरवाही बताती है के खयाल कितना है वरना रिश्तो में कोई तराजू नहीं होता।

जो हम रूठ जाए तो मनाएगा कौन बस इसी फिक्र में खुश रह लेते हैं।

चीखकर देखी है कभी तनहाई तुमने

मैंने देखी है…

बड़ी इमानदार लगती है।

आंखों के नीचे काले घेरे बताते हैं होठों पर जो मुस्कान है, वह छुट्टी है।

~18~

यह चंद दिन की दुनिया है गालिब यहां पलकों पर बिठाया जाता है, नजरों से गिराने के लिए।

जिंदगी उसी की है, जिसकी मौत पर जमाना अफसोस करें यूं तो गलीब हर शख्स दुनिया में आता है, मरने के लिए।

रफ्तार जिंदगी की कुछ यूं बना कर रख कि दुश्मन भले ही आगे निकल जाए, पर दोस्त कोई पीछे ना छूटे।

हैरा हूं तुझे मस्जिद देखकर गलीब ऐसा भी क्या हुआ जो खुदा याद आ गया

मुस्कान बना के रखो तो सब साथ है गालिब वरना आंसुओं को तो आंखों में भी पनहा नहीं मिलती।

हजारों ख्वाहिशें ऐसी कि हर ख्वाहिश पर दम निकले

बहुत निकले मेरे अरमान लेकिन फिर भी कम निकले।

मेहरबां हो कि बुला लो मुझको चाहो जिस वक़्त मैं गुजरा हुआ वक्त नहीं जो वापस नहीं आ सकता।

~19~

Hindi-poetry-on-love-sad-by-Gulzar

नींद में भी गिरते हैं मेरे आंखों से आंसू जब भी ख्वाबों में तुम मेरा हाथ छोड़ देते हो।

खुद को बदलते बदलते इतना भी मत बदल जाना आईना सामने हो तो अपना चेहरा भी याद नहीं रहे।

तब्दीलियां जब आती है मौसम की अदाओं में किसी का यूं बदल जाना बहुत याद आता हैं।

मुझे डर नहीं है आब किसी को खोने का मैंने जिंदगी में अपनी जिंदगी खोई है।

सोचा था एक निशान छोड़ दूंगा उसके माथे पर पर एक करने से पहले

उसने किसी और का हाथ थाम लिया।

जब किसी खास इंसान तुम्हें नजर अंदाज करने लगे तो समझ जाना कि उसकी सारी जरूरतें खतम हो गई है।

ना जाने क्या कमी रही मोहब्बत में हमारी दिल को जितना साफ रखा उतना ही सताया उसने।

~20~

छोड़ दी हमने हमेशा के लिए उसकी आरजू करना जिसे मोहब्बत की कदर ना हो उसे दुआओं में क्या मांगना।

फरिश्ते ही होंगे जिनको मुकम्मल हुआ इश्क इंसानों को तो हमने बर्बाद होते देखा है।

वह इतराते रह गए चलाकियो में अपने वह समझ ही नहीं पाई की वह खोया क्या है।

तेरे प्यार की हिफाजत कुछ इस तरह से कि हमने जब भी किसी ने प्यार से देखा 

तो नजरें झुका ली हमने।

काश कोई इस तरह भी वाकिफ हो मेरी जिंदगी से के में बारिश में खड़ा रहूं और वह मेरे आंसू पढ़ ले।

तरस गए हैं तुम्हारे लंबे से कुछ सुनने को हम प्यार की बात ना सही शिकायत ही कर लो।

जिस दिन तुम्हारा सबसे करीबी साथी, तुम पर गुस्सा करना छोड़ दें

तो समझ जाना कि तुम उसे खो चुके हो।

End

I hope You like Our Hindi poetry on love sad by Gulzar collection. Please comment below which poetry you love the most? I think you like to visit Hindi Moral Stories For Kids.

Like us on facebook Feel free to comment your thoughts. Thank You!

Comments are closed.