5 Best Hindi short moral stories for class 7&8(2020)

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5 Best Hindi short moral stories for class 7&8

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मूर्ख माली

बहुत दिन पहले के बाद है, एक फलो के बाग का माली बहुत ही परिश्रम से अपने बाग में काम करता था। इस कारण उसका बाग बहुत सुंदर था।

एक दिन उस मालिक के मित्रों ने आकार उसको कहा,

दोस्त, शहर में मेला लगा है, और आज मेले का अंतिम दिन है। चलो आज हम दोनों मेला घूम आए।

माली ने माना करते हुए कहा, “मेरे बाग के पेड़-पौधों का पानी कौन देगा?”

उसी बाग में एक पेड़ पर एक बंदर भी रहता था, जिसे माली प्यार से बंदरू कह कर बुलाता था। वह मालिका बहुत अच्छा दोस्त था। जब बंदरु ने दोनों दोस्तों कि बातें सुनी, तो पेड़ पर से लटकते हुए वह कहने लगा,

“मेरे दोस्त तुम मेला घूमने जाओ, मैं तुम्हारे पेड़ पौधों पर पानी डाल दूंगा।”यह सुनकर माली अपने दोस्त के साथ मेला घूमने चला गया।

जैसे ही माली और उसका मित्र मेला घूमने निकले, तभी मालिक के दोस्त बंदारू ने अपने ढेर सारे बंदर दोस्त को बुलाकर, उनको बाग में पानी डालने का काम बताया।

तब उसके मित्र बंदरों में से एक बंदर पूछा,”हम हर पौधों में कितना पानी डालें?”

माली के दोस्त बंदारू ने कहा,”मुझे मालूम नहीं, और मैं पूछना भी भूल गया। शायद जितना बड़ा पौधे है उतना ही उसमें पानी डालेगा। क्योंकि पौधों के झड़े पानी पीती है। इसलिए छोटी जड़े थोड़ा पानी पिए गी और बड़ा जड़े ज्यादा पानी पिए गी।”

उसकी बात सुनकर, उसके दोस्त बंदरों में से एक बंदर ने कहा, हमें कैसे पता चलेगा किस पौधे का जड़ बड़ा है और किसकी छोटी?

माली के दोस्त बंदरों ने कहा, हमें सब पौधों को उखाड़ कर उनकी जड़ों की नाप देखनी होगी। और सब बंदर सारे पेड़ पौधों उखाड़ उखाड़ कर उनकी जड़ों की नाप को देखकर पानी देने लगे।

जब शाम को माली लौटा तो अपनी मूर्खता पर बहुत क्रोध आया। उसने एक जानवर की बात कैसे मान ली थी। के बंदरो उसके परिश्रम से तैयार किए हुए गए सुंदर बाग के पौधों में पानी डाल देगा !

Moral : बिना विचारे जो करें, वह पीछे पछताए।

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सूझ बूझ

रामलाल कपड़े की बारे व्यापारी थे। बे अपनी पत्नी और बच्चे के साथ एक गांव में रहते थे। अक्सर कपड़ों की खरीदारी के लिए उनको शहर जाना पड़ता था। नेमचांद उनका जिगरी दोस्त था।

एक बार रामलाल के जन्मदिन पर नेमचंद ने एक कीमती घड़ी उनको तोहफे में दी। रामलाल को भरी बहुत पसंद आई, वे उसे संभल कर रखते थे।

उनके यहां तीन नौकर थे। राम लाल के मकान के बगल में ही नौकर रहते थे। एक दिन रामलाल को कपड़े खरीदने शहर जाना था। बे नहा धोकर तैयार हो गए और पत्नी से कहा, “राधा जरा मेरी घरी ला दो तो।”

राधा को कमरे में घड़ी कहीं नहीं मिली। वह लौट कर आई और बोली, “सोनिया जी कमरे से घड़ी गायब है, मुझे कहीं नहीं मिली।”

रामलाल निराश हो गए, उन्होंने तुरंत नौकरों को बुलाया। इन्होंने घड़ी छुड़ाने की बात से इनकार किया।

रामलाल को पक्का यकीन था की, तीनों में से कोई एक जरूर घरी चोरी की है। लेकिन सबूत नहीं था। रामलाल को एक उपाय सूझा।

उन्होंने तीनों नौकरों को बुलाकर बराबर लंबाई वाली तीन लकड़ीया दी और कहां,” तुम लोग आज रात को अपनी-अपनी लकड़ी अपने अपने सिरहाने रखकर सो जाओ। कल सवेरे लकड़ी लेकर मेरे पास आओ। रात की समय लकड़ी की लंबाई एक इंच बढ़ने वाली है। यह जादुई लकड़ियां है।”

तीनों नौकर अपनी अपनी लकड़ी सिरहाने रखकर सो गए। सुबह होने की पहले एक नौकर फूट गया। वह बेचैन था। उसने अपनी लकड़ी निकाली, और उससे एक इंच का टुकड़ा काट दिया। उसने सोचा लकड़ी की लंबाई जरूर एक इंच बड़ी होगी।

सवेरा होते ही रामलाल ने तीनों नौकरों को बुलाया और लकड़िया जांच ली। दो नौकरों की लकड़ीया बराबर थी।

तीसरे की लकड़ी एक इंच छोटी थी। वही असली चोट था।रामलाल ने तुरंत पुलिस को बुलाया और चोर को सौंप दिया।

Moral : सूझ बूझ से काम लोगे तो, जरूर सफल होंगे।

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पिता की सीख

बहुत समय पहले की बात है, चिड़ियों ने अपने लिए एक बुद्धिमान तथा दयालु नर बतख को राजा चुना।

वह अपने शासन को बहुत ही सुरक्षित ढंग से चला रहा था। वह किसी भी नाइके कार्य को बहुत ही ध्यान पूर्वक, सोच समझकर, अधिक से अधिक समय देकर करता था। चाहे वह कोई बड़ी बात हो या छोटी से छोटी।

उस राजा के महल में एक बहुत सुंदर बतख पुत्री ने जन्म लिया। जब वह बड़ी होने लगी तो दिन प्रतिदिन और भी अधिक सुंदर दिखने लगी। वह पूरे राज्य में सबसे सुंदर बत्तख थी।

शीघ्र ही राजा अपनी उस अकेली पुत्री के लिए एक अच्छा पति खोजने लगा। परंतु राजकुमारी स्वयं अपना बर चुनना चाहती थी।

इस कारण एक दिन राजकुमारी बतख में अपने पिता से कहा,”पिताजी मैं अपना बर स्वयं सुनना चाहती हूं,”

राजा अपना पुत्री से बहुत प्यार करता। इसलिए वह अपने पुत्री को अपना पति स्वयं चुनने अज्ञा दे दी।

उसी समय राजा ने अपने दरबार में एक महासभा का आयोजन करवाया। जिसमें सब नर पक्षी आमंत्रित किए गए। अधिकतर नर पक्षी यह जानने के लिए आए कि संभव है, राजा अपनी पुत्री का विवाह उनसे कर दे।

बे सब राजा और राजकुमारी के सामने से चलते हुए आए। परंतु कोई भी राजकुमारी की योग्य और सपनों का सुंदर पति नहीं दिखा।

फिर एक सुंदर मोर घमंड के साथ चलते हुए आया। वह सुंदर मौत बहुत ही शिष्टाचार के साथ अपने सुंदर रंगीन पंरो को फैलाते, थोड़ा-थोड़ा नाचते हुए, राजा और राजकुमारी के सामने खड़ा हो गया।

वह समय वह जानता था की वह बहुत अच्छा दिखता है। इस कारण वह मन-ही-मन कहने लगा,”मैं जानता हूं के राजकुमारी मुझे ही पसंद करेगी, मैं यहां पर सबसे सुंदर पक्षी हूं !”

राजकुमारी ने देखा कि वास्तव में वहां मोर ही सबसे सुंदर पक्षी है। उसने अपने पिता से कहा,”मुझे सबसे ज्यादा मोर अच्छा लगा। मैंने उसे पसंद किया है। इस कारण मैं मोर से ही विवाह करूंगी।”

जब मोर ने यह सुना तो उसने कहा,मुझे राजकुमारी ने चुना क्योंकि मैं बहुत सुंदर हूं। फिर वह घमंड के साथ चारों ओर और ही नाचने लगा।

अब सारे नर पक्षी दुखी हो गए थे, जबकि यह सब बहुत अच्छे नर पक्षी दिखते थे। परंतु उसमें से कोई भी मौत के सामान सुंदर और अच्छा नहीं दिख रहा था।

इधर जब राजा ने मोर का व्यवहार देखा तू अपनी पुत्री से कहा,”यह आवश्यक नहीं है, जो ऊपर से सुंदर हैं, वह मन से सुंदर हो।”राजकुमारी ने अपने पिता के बाद बहुत ध्यान से सुने। कि उसके पिता उसे क्या समझाना चाहते हैं।

इसलिए राजा बतख के समझाने पर उसकी पुत्री, सुंदर बतख राजकुमारी ने नम्र स्वभाववाले  नर बतख के साथ विवाह किया। फिर वे दोनों अपने जीवन में आनंद से रहने लगे।

Moral : जीवन में सदा, तुझे यदि अहंकार है, तो कहीं ना कहीं तेरी हार है। आनंद का सुख यदि पाना है, तो बड़ों की सीख अपनाना है।

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हाथी की मित्रता

बहुत पुरानी बात है, एक जंगल में एक हाथी मित्र की तलाश में इधर-उधर घूम रहा था। उसे पेड़ पर एक बंदर दिखाई दी और उसे बोला,”बंदर भाई क्या तुम मेरा मित्र बनोगे?”

बंदर बोला,’ आप तो बहुत बड़े हैं, आप मेरी तरह एक पैर में धूल भी नहीं सकते। तो फिर आपकी और मेरी दोस्ती कैसे होगी?

अगले दिन हाथी कि मुलाकात एक खरगोश से हुई। और हाथी ने खरगोश को कहा,”खरगोश जी क्या तुम मेरे मित्र बनना पसंद करोगे?”

खरगोश ने हाथी को बोला,”आप तो बहुत बड़े हैं, आप मेरे घर में घुस भी नहीं सकेंगे। मेरी और आपकी दोस्ती मुमकिन नहीं।”

हाथी अब मेंढक के पास पहुंचा और मेंढक को बोला, “मेरा कोई मित्र नहीं है। मेंढक भाई तुम अगर मुझे अपना दोस्त बना लो तो तुम्हारी बड़ी कृपा होगी।”

मेंढक बोला,”अरे वाह, मान ना मान मैं तेरा मेहमान। तुम इतने बड़े और हम इतना छोटा, कुछ तो सोचो, यह बीमेल की दोस्ती नहीं हो सकती। फिर तुम मेरी तरह खुद अब तो भी नहीं सकते। जाओ भाई कहीं और अपना दाल खिलाओ।”

अचानक हाथी को एक लोमड़ी दिखाई दी। उसने उसे रोका और पूछा,”लोमड़ी सुनो क्या तुम मुझे अपना मित्र बनाना पसंद करोगे?, देखो ना मत कहना। मैं बड़ी उम्मीद से तुम्हारे पास आया हूं। बोलो, बनोगे ना तुम मेरे मित्र? “

लोमड़ी ने बोला,”ना बाबा ना। अपना आकर तो देखो?

गलती से मैं तुम्हारे पांव के नीचे आ गई तो मेरी तो चटनी बन जाएगी। आप कृपया कोई और घर देखो।

यह कहकर लोमड़ी चला जाता है।

हाथी ने बोला,” कमाल हो, कोई मुझे अपना मित्र नहीं बनाना चाहता।”

अगले दिन हाथी ने देखा जंगल के सभी जानवर बहुत तेजी से भाग रहे थे। तो उसने भागते हुए लोमड़ी को रुका कर पूछा,”क्या हुआ? क्यों ऐसे भाग रहे हो?”

तो लोमड़ी ने कहा,”हाथी दादा पीछे शेर है। और वह खतरनाक शेर हम सबको मार कर खाना जाना चाहता है। तभी सब जानवर अपनी अपनी जान बचा कर कहीं छुप जाना चाहता है।”

वह खूंखार शेर तो सब जानवर के पीछे हाथ धोकर पड़ा था। तब हाथी जाकर शेर को कहा,”श्रीमान क्यों व्यर्थ में इन सब की जान के पीछे पढ़े हो? सारे जानवरों को या एक दिन में मरकर खा लोगे?”

तब वह खूंखार शेर ने बहुत गुस्से से जवाब दिया,”जा जा अपना रास्ता देख ! तुझे क्या जो मेरा दिल करेगा मैं वह करूंगा।

हाथी को समझ आ गया कि लातों के भूत बातों से नहीं मानते। उसने शेर को जोर से एक लात मारी, और उसको मुझसे उठा कर पटक दिया। तब शेर की होश ठिकाने आ गए। और वह डर कर बहुत जोर से वहां से भाग गया।

हाथी ने जब सारे जानवरों को यह खुश खबर सुनाइए, तो सबकी खुशी का ठिकाना ना रहा। सभी ने हाथी को धन्यवाद दिया। और कहा, हमारा मित्र बनने के लिए सचमुच तुम्हारा आकर बिल्कुल ठीक है। आज से हम सभी तुम्हारे मित्र हैं।

Moral : मित्रों वह जो मुसीबत में काम आए।

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भूत का बच्चा

एक गांव में एक कुआं था, गांव के सारे लोग उस कुएं से ही पानी भरते थे। उस कुएं का पानी कभी खत्म नहीं होता था । सब कुछ अच्छे से चल रहा था।

के अचानक एक दिन गांव की औरतें कुएं पार पानी भर रहे थे, तभी अचानक बाल्टी जो कुएं से पानी खींच रही थी वह वही अटक गई। जैसे उसको कोई अंदर से पकड़ लिया हो।

औरतें सोचने लगी के, क्या हुआ, बाल्टी क्यों अटक गई? सभी औरतें मिलकर जोर लगाइए, पर बाल्टी नहीं हिलती। सब डरकर वहां से चली जाती है।

पूरे गांव में एक खबर फैल जाती है। अगले दिन कुछ लोग फिर कुएं में जाते हैं, और वह कहने लगा, “अरे भाई यह कुए वाली बात तो सारे गांव में फैल गई, देखते हैं यह बात कितने सच है।”

वह आदमी कुएं में बाल्टी डालकर पानी खींचता है, तो पानी से भरे बाल्टी आसानी से ऊपर आ जाती है। तब वह लोग हंसने और बोलने लगा,”लो भाई बाल्टी तो बाहर आ गई, ऐसे ही पूरे गांव में शोर मचा रखा है।”

तभी अचानक कुएं में से पानी उछलकर बाहर आता है,

जिसे देखकर सभी हैरान रह जाते हैं। वह कहने लगा,

“अरे यह क्या हुआ? कुए का पानी अपने आप बाहर कैसे आया? लगता है कुएं में कोई भूत है”।और वहां से भागने लगा।

इस तरह वह कुआं पूरे गांव में भूतिया कुआं नाम से प्रसिद्ध हो जाता है। कोई भी उस कुएं के पास नहीं जाता।

एक दिन पिंकू नाम का एक लड़का उस गांव में उसके नानी के घर रहने आए। वह सब बच्चों के साथ खेल रहा होता है, के उसके बल उस कुएं के पास चला जाता है। तो वह बल लेने कुएं के पास जाता है।

सब बच्चे उसको कुए के पास जाने में मना करता है। लेकिन वह नहीं मानता। और वहां खड़े होकर कुएं में झांकता हुए बोलने लगे,”अरे वाह कितना सुंदर हुआ है,

इसका पानी भी कितना स्वच्छ है, और दोस्तों को बोले तुम सब यहां आओ। इस कुएं का ताजा ताजा पानी पीते हैं। वैसे भी ब्यास से मेरा गला सुखा जा रहा है।”

लेकिन उसके दोस्तों ने कहा,”नहीं नहीं हम वहां नहीं आएंगे, पिंकू तुम भी वापस आ जाओ जल्दी। वहां ज्यादा देर मत रुको तुम। वह भूतिया कुआं है।”

फिर पिंकू आश्चर्य होकर पूछता है ,क्या भूतिया कुआं?

और सारे बात जानने के लिए पिंकू दोस्तों के पास ज्यादा है। और उनसे पूछता है, अरे दोस्तों मुझे भी तो जरा इस कुएं के बारे में बताओ! इसे भूतिया कुआं क्यों कहते हैं?

पिंकू के दोस्त उसको सारी बातें बताते हैं, पिंकू के मन में इस कुएं के बारे में सच जानने का जिज्ञासा होती है।

पिंकू बोला, अरे यार तुम लोग भी कितना डरते हो।

आओ इस कुएं का सच्चाई पता करते हैं।

उसके दोस्तों ने बोला, नहीं पिंकू, गांव के लोगों ने इस हुए का सच्चाई पाता लगाई थी। उन्हें भी यही पता चला के इस कुएं में भूत है। तुम चलो यहां से।

पिंकू दोस्तों के साथ वहां से चला तो जाता है, लेकिन कुए का राज जानने का जिज्ञासा उसके मन में खत्म नहीं हुई।

और अंधेरा होने के बाद, वह कुएं के पास जाने के लिए घर से निकल जाता है। कुएं के पास पहुंचने ही वाला होता है, के दूर उसे कुछ हिलता हुआ नजर आता है। वह वही पैर के नीचे छुप कर देखने लगता है।

एक अजीब सी आकृति उसे कुए पर बैठी दिखाई देती है। पिंकू बिना डरे उसके पास जाता है, और उससे पूछता है,”कौन हो तुम? और यहां क्या कर रहे हो?”

और तब उस मूर्ति ने जवाब दिया,”अरे बच्चे, मैं भूत हूं।

और इस कुएं में रहता हूं।”

पिंकू बिना डरे कहा, वह अच्छा! तो तुम ही इश्क में के भूत हो? तुम यहां क्यों रहते हो? और क्यों ही तुम लोगों को इतना डराते हो?

भूत ने बोला, अरे मैं किसी को नहीं डराता, लोग अपने आप डरकर भाग जाते हैं। मैं तो अपने परिवार के साथ यहां से गुजर रहा था, लेकिन मैं उनसे बिछड़ गया। और रहने की जगह ढूंढते ढूंढते, इस कुएं में आकर छुप गया। मैं किसी को डराता नहीं था। मैं तो खेलता था, लेकिन लोग डर कर भाग जाते थे। मैं तो दोस्त बनाना चाहता था, जो मुझे मेरे परिवार से मिलाने को मदद करें। लेकिन सब पहले से डर कर भाग जाते हैं।

यह सुनकर पिंकू ने बोला, अरे तुम घबराओ नहीं, मैं तुम्हारा दोस्त बनूंगा। और तुम्हें तुम्हारी परिवार से मिलाऊंगा। पर वह सब है कहां?

भूत ने बोला, हो सब पहाड़ के पीछे जंगल में घूमने गए हैं। लेकिन मैं छोटा हूं ना इसलिए वहां का रास्ता मुझे पता नहीं है।

पिंकू बोला, ठीक है दोस्त, मैं तुम्हें वहां ले जाऊंगा।

ऐसा कहते ही पिंकू उस भूत के बच्चे को लेकर, पहाड़ी वाले जंगल की तरफ चला जाता है।

और अगले ही सुबह पिंकू सारे गांव वालों को इकट्ठा करता है और उन्हें कुए की सच्चाई बताता है। गांव वाले उस नटखट भूत के बारे में जानकारी बहुत खुश होते हैं।

ज्यादा खुश तो उन्हें इस बात की होती है कि उन्हें उनका कुआं वापस मिल गया। तो इस तरह वह गांव उस भूतिया कुएं की डर से मुक्त हो जाता है।

Moral : सच जाने बिना किसी भी बात पर विश्वास नहीं करना चाहिए।

END

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