5 Best Hindi short moral stories for class 6 (2020)

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5 Best Hindi short moral stories for class 6

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जादुई कटोरा

एक बार एक गांव में एक गरीब किसान रहता था। वह और उसके पत्नी बहुत उदार थे। जब उनके और बच्चे हो गए, तो इतना नहीं कमा पाते थे जो उनका पेट भर सके। उनके लिए भरपेट खाना मिलना ही दावत जैसा होता है।

खुद अपने लिए भोजन जुटा पाने के संघर्ष के बावजूद, किसी भूखे इंसान को बिना खिलाए नहीं जाने देते थे। वह कुछ नहीं तो चावल का दलिया ही मेहमान को खाने के लिए देता है।

एक दिन जब वह भोजन करने के लिए बैठे ही है, तब एक फकीर उनके घर आया। किसान और उसके पत्नी ने फकीर के साथ चावल दलिया बाटा। जब आया था फकीर बहुत कमजोर नजर आया था। लेकिन दलिया खाकर उसने बेहतर महसूस किया। उसका चेहरा इस अमृत रूपी भोजन करके चमक रहा था।

उसने किसान को कहा, मैंने इससे पहले इतनी उधर पति पत्नी नहीं देखे। कृपया उस बर्तन को लाए जिसमें यह दलिया पकाया था। मैं उसे अक्षय पत्र में बदल दूंगा।

किसान के पत्नी वह बर्तन ले आई और फकीर को दे दिया, फकीर ने बर्तन को अपना हथेली में रखा। अब बर्तन को एक थाली में टक्कर कुछ मंत्र उच्चारण किया।

और फिर फकीर ने कहा, अब तुम्हें खाने के लिए संघर्ष नहीं करना होगा। जो भी चीज राजा के रसोई में सकेगी, वह तुम्हारे इस बर्तन में मिलेगी। यह कहकर वह उठा और चला गया।

पति पत्नी को उसका बात का विश्वास नहीं हुआ, वह बस उनका आशीर्वाद समझ लिया। जब किसान के पत्नी ने दलिया पकाना चाहा, और बर्तन से थलिया को हटाया, तो वह बर्तन को लजीज खानों से भरा पाया। जिससे बहुत सुगंध आ रही थी।

और पेट भर खाने के बावजूद खाना खत्म ही नहीं हो रहा था। इस खाने का स्वाद राजा के रसोई में पकाए गए खाना की जैसा है। उस बर्तन से वो पति पत्नी और उसके बच्चे ही नहीं रसिक भोजन खाया, बल्कि घर में आए मेहमानों को भी वह खाना परोसा।

घर में जो मेहमान आता किसान उसको कहता, महोदय कृपया परोसा खाना ग्रहण करें, लेकिन इसके बारे में कुछ पूछना। इसी तरह और सब से प्रार्थना करता था।

जिसमें उसके घर खाना खाया वह बाहर गया और कहा, किशन के घर परोसे गए खाना बहुत स्वादिष्ट है। ऐसा खाना तो फिर राजा के रसोइयों में मिलता है।

जब भी किशन के घर बर्तन के अंदर खाना आता, राजा के रसोई में खाना कम हो जाता। इस बात को राजा के रसोई में खाना पकाने वाला ने पकड़ा। राजा के परिवार के लिए जितना खाना पूरा हो जाए, उससे ज्यादा बनाने के बाद भी खाने का चीजें काम पर जा रही थी।

जब रसोईया पूरा भरा बर्तन हलवा बनाता और ढक्कन बंद करता, पर खुलने के समय हुक्म हो जाता था। क्योंकि ऐसा रात के समय होता, तो रसोई मैं सोचा कोई चोर ऐसा कर रहा है। लेकिन रसोइयों को पता नहीं था कि चोर कौन है।

आखिरकार यह बात उस को राजा को बताना ही पड़ा। पहले तो राजा ने उसका बात भरोसा ही नहीं किया, लेकिन बाद में राजा ने भी देखा, बर्तनों में सच में ही खाना कम हो जाता है।

राजा ने यह मसला मंत्री को बताया। मंत्री ने भी बर्तन में खाने का मात्रा कम होते देखा। यह रहस्य राजा के महल के दीवारों में नहीं रह पाया। गांव में सबको पता चल गया के, कोई राजा के महल से खाना चोरी करता है।

उसके साथ ही सबको पता चलता है किसान के घर में राजसिक खाना पकता है। जो सबको खाने को मिलता है। दोनों बातें वापस में कुछ ऐसी जुरी कुछ लोगों को शक हुआ जो खाना राजा के घर से गायब हो रहा है, वही किसान के घर मिल रहा है।

मंत्री ने बोला, ना मुमकिन। मैं पहले ही पता कर चुका हूं। यह किसान गांव के बाहर एक झोपड़ी में रहता है। वह बहुत गरीब है। लेकिन सब कहते हैं वह ईश्वर सामान है। क्या उन्होंने हमारे महल में सिर्फ खाना छुड़ाने आएगा? यह कैसे हो सकता है? जो महल में दाखिल हो सकता है, वह बहुमूल्य चीजें चुराकर अपना जीवन आराम से बताएगा। क्या हुआ सिर हमारे महल खाना चुराने आएगा? सच का पता तब चलेगा, जब हम एक दिन उसके घर में भोजन करने जाएंगे।

अगले ही दिन राजा और मंत्री वेशभूषा बदलकर, हाथ में थोड़ी लेकर, किशन के घर जाता है। जाने के समय राजा ने रसोईया से पूछ कर गया है के आज वह खाने में क्या पका रहा है। जब किसान और उसका परिवार भोजन करने वाले थे, दो अजनबी उनके घर पहुंचे, और पूछा…”महोदय हम पड़ोस के गांव के किसान हैं, सफर के दौरान बहुत गर्मी महसूस हुई, क्या आप हमें कुछ खाने को देंगे?”

किसान ने बड़ी प्रसन्नता के साथ उनको अभिनंदन किया। उसने अपनी पत्नी को बर्तन लगाकर खाना पारस ने को कहा। वह बोला, महोदय जो भी भरोसा है खाइए। बस इसके बारे में मुझे कुछ पूछिएगा नहीं।

जब पत्नी ने खाना परोसा, तोह राजा और मंत्री ने समझ गया के यह महल के रसोई में वाकई गई खाना है। वह तो खाना खाने नहीं आए थे। तो राजा और मंत्री ने किसान से पूछा, तुमको इतना अच्छा खाना कहां से मिला? जो अमीरों के घर में भी नहीं मिलता?

किसान ने बोला, कृपया मुझे यह ना पूछो। राजा ने बोला, जब तक बताओगे नहीं, हम खाएंगे नहीं। और कुछ उपाय ना होने की वजह किसान ने राजा को सब कुछ बताई दिया।

उसके बाद सुनकर राजा क्रोधित हो गया, एकदम से खड़ा हुआ और छड़ी से उस बर्तन को तोड़ दिया। और बिना कुछ कहे राजा उनके मंत्री के साथ वहां से चले गए।

किसान के पत्नी टूटे बर्तन को लेकर रोने लगी। किसान ने कहा, मत रो, आखिर कब तक हम राजसिक भजन खा सकते थे ! आज से यह स्वादिष्ट खाना नहीं होगा, लेकिन चाल दावल तो होगा ना! ऐसा समझा कर किसान ने अपने पत्नी को चुप कराया।

किसान के बर्तन तोड़कर राजा और मंत्री महल पहुंचे। उन्हें वहां खाने के लिए कुछ नहीं मिला। उन्होंने इसकी वजह रसोई से पूछी।

तो रसोईया ने बताया, महाराज खाने की चीजें चूल्हे के ऊपर बर्तनों से गायब हो गया। देखिए बर्तन बाहर से कितने काले हैं लेकिन अंदर से एकदम चमत्कार साफ।

राजा ने किसान के घर में भी खाना नहीं खाया था। इसलिए मंत्री ने अपने घर से राजा और उसके परिवार के लिए खाना भेजा। और जैसे ही खाना राजा के घर पहुंचे, वह गायब हो गया।

राजा को तब समझ आया, किसान के साथ ऐसा दूरव्यवहार करने की वजह से उनको और उनकी परिवार को भूखा रहना पड़ रहा है।

एक बार फिर राजा उनके मंत्री के साथ किसान के घर जाता गया और हाथ जोड़कर बोला, मैंने तुम्हारे साथ बुरा व्यवहार किया, मुझे माफ कर दो। उस बर्तन के बदले में, मैं तुम्हें खेती के कुछ जमीन दे दूंगा। और आज से हमारे रसोई तुम्हारा है। और हर दिन रसोई में जो पकेगा उसका आधा मैं तुम्हारे घर भेज दूंगा। मुझे और मेरे परिवार को मारकर तुम्हें क्या मिलेगा! 

किसान स्तब्ध रह गया और बोला, महाराज मैंने आपके साथ कुछ नहीं किया। जब मेरे पत्नी बर्तन के टुब्रो को लेकर रोने लगी तो मैं उसे कहा हम दलिया खाकर भी जिंदा रह सकते हैं। आपके साथ जो भी हुआ, मेरे वजह से नहीं हुआ महाराज। मेरा भरोसा कीजिए।

फिर उस किसान के परिवारों को जैसा ही राजा वचन दिया था, रस्सी में पकाए गए खाने का आधा  खाना मिलने लगा। किसान और उसका परिवार राजा के दिए हुए जमीन पर आराम से रहने लगा। इस तरह किसान और उसके परिवार का जीवन समृद्ध हो गया।

Moral : घमंड पतन का मूल कारण। हमें घमंड नहीं करना चाहिए।

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एक लोटा दूध

बहुत समय पहले का बात है, काफी दिन बारिश ना होने के वजह से एक गांव में सूखा पड़ गया। हर तरफ हाहाकार मच गया। पानी की कमी के करण लोग मरने लगे।

गांव में एक ही आचार्य थे, जो पढ़े लिखे थे। लोगों ने उनको इस समस्या का समाधान खोजने के लिए अनुरोध किया। आचार्य ने सूखे को रोकने और गांव के बारिश हो जाए ऐसे होने में बहुत प्रयास किए। लेकिन कोई भी प्रयास सफल नहीं हुए।

गांव में सुखी के समोसा पहले की तरह बनी रहे। गांव के लोकेशन ने सभी रास्ता बंद हो चुके थे। सब बहुत दुखी हो चुके थे। और सब हाथ जोड़ के भगवान से पटना करने लगे के त तुम ही कुछ करो। अब तुम ही हमें बता सकते हो।

तब वहां भगवान द्वारा प्रेरित किया एक दूत प्रकट हुआ। और उसने गांव के लोगों को कहा, अगर इस गांव के सारे लोगों ने उस कुएं में, बीना देखें हुए कुएं के अंदर एक लोटा दूध डाल दे, तो आपके गांव में सूखे के समस्या का हाल हो जाएगी। और बारिश हो जाएगी। यह कहकर वह दूत वहां से गायब हो गया।

गांव के लोग यह समाधान जानकर बहुत खुशी हुई। और वो सारे गांव के लोगों को कुए के अंदर बिना झांकी एक लोटा दूध डालने का निवेदन किया। सभी लोग दूध डालने को तैयार हो गए।

रात को जब गांव के सारे लोगों ने कुएं के अंदर दूध डालने लगे, तब गांव के एक कंजूस व्यक्ति सोचा, के गांव के सारे लोगों ने तो उस कुएं में दूध डालेंगे ही, अगर वह कुएं में एक लोटा पानी डाल देगा, तो किसी को पता नहीं चलेगा।

यह सोचकर उस कंजूस व्यक्ति ने एक लोटा दूध कि जाएगा, एक लोटा पानी डाल दिया। अगली सुबह तक लोगों ने बारिश का इंतजार किया। लेकिन तभी भी गांव सूखा पड़ा हुआ था। और बारिश का कोई नाम ओर निशान दिख देख रहा था।

सब कुछ पहले जैसा ही था। लोग सोचने लगे, आखिर बारिश क्यों नहीं हुई! इस बात को पता लगाने के लिए उन्होंने गांव के बाहर उस कुएं में देखने गए।

जब उन्होंने कुएं में झांक कर देखा, तो सभी के सभी हैरान रह गए। पूरा कुया सिर्फ पानी में भरा पड़ा था। उसमें एक बूंद भी दूध नहीं था। सबने एक दूसरे की तरफ देखा, और तभी सब समझ गए क्या यह समस्या क्यों समाधान नहीं हुई।

ऐसा इसलिए हुआ था, की जो बात उस कंजूस व्यक्ति के दिमाग में आई थी, कि सभी लोग तो दूध डालेंगे ही, अगर वो एक लोटा पानी डाल देगा, तो किसी को पता नहीं चलेगा। और वही बात पूरे गांव वालों के दिमाग में आई थी। और हर व्यक्ति दूध के जगह एक लोटा पानी कुएं में डाल दिया था।

जो कुछ भी इस कहानी में हुआ, वह सब आजकल हमारे जीवन में होना सामान्य बात है। हम कहते हैं के, हमारे एक को बदलने से पूरा संसार नहीं बदल जाएगा।

लेकिन बूंद बूंद से ही तो सागर भरता है।

Moral : अगर हम दूसरे लोगों में अपना जिम्मेदारी डाले बिना पूरे इमानदारी और मेहनत से अपना काम करते हैं, तो हम अकेले ही इस समाज में बदलाव ला सकते हैं।

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चींटी और कबूतर 

एक समय की बात है।, एक पैर पर से एक चींटी नीचे तालाब में गिर गई। तब एक कबूतर ने चींटी को अपने जीवन बचाने के लिए जितोर कोशिश करते हुए देखा।

और फिर कबूतर ने एक पत्ते को तोड़ा, और नीचे तालाब में चींटी के पास फेंक दिया। चींटी छठ से पत्ते पर चार गई। और बड़ी कृतज्ञता भारी नजर से उसने कबूतर को धन्यवाद किया।वह चींटी बहुत थक गई थी।

कुछ सप्ताह हो बात की बात है, एक बहेलिया जंगल में आया। बहेलिया का काम ही पता है पक्षियों को पकड़ना। उसने कुछ दाने जमीन पर फेंके और अपने जाल बिछा दिया।

 वह चुपचाप कोई पक्षियों का जाल में फंसने का इंतजार कर रहा था। तब और चींटी जो वहीं कहीं से गुजर रही थी, उसने जब वह सारी तैयारी देखी तो तब वो क्या दिखती है, के वही कबूतर जिसने उसका जान बचाई थी, उड़कर वही जाल पर हंसने के लिए धीरे धीरे जमीन की ओर आ रहा है।

तब चींटी ने एकदम आगे बढ़ कर बहेलिया के पैर पर इतनी बुरी तरह काट दिया कि, बोहेलिया के मुंह से चीख निकल गई। और वह चिल्लाने लगा और कहने लगा, यह चिट्ठी! तेरी ऐसी की तैसी।

तब कबूतर ने एक दम देखा, कि वह शोर किधर से आ रहा है। और बोहेलियो को देखते ही, सब कुछ उसके समझ में आ गया। और वह दूसरी दिशा में उड़ गई, और उसका जीवन बच गया। ज़ी टीवी अपना काम पर चल दी।

Moral : कार भला सो हो भला।

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आलसी बेटा

किसी गांव में एक अमीर व्यक्ति उनके पत्नी और बेटे के साथ रहता था। उसके बेटे का नाम था सुमित। सुमित बहुत ही आलसी था। जब कि वो अमीर व्यक्ति बहुत मेहनती था।

वह अमीर व्यक्ति रोज सूर्य उदय के पहले शिव मंदिर जाता था। और उसके बाद वह अपने खेतों, तबेलो और जहां जहां उसका काम फेहला हुआ था वहां का चक्कर लगाता था।

वह अमीर व्यक्ति अपने बेटे के आलसीपन से बहुत परेशान था। वह अपने बेटे को कहता है,” बेटे उठ जाओ मेरे साथ खेतों में जाकर कुछ काम कर लो”।लेकिन उसका बेटा कहता है, “अभी नहीं पिताजी, अभी मुझे सोने दीजिए।”

वह व्यक्ति परेशान होकर खेतों में चला जाता है। कुछ समय के बाद उस अमीर व्यक्ति का तबीयत बहुत खराब रहने लगी, और कुछ ही दिनों में उसका मौत हो गई।

अमीर व्यक्ति के मौत के बाद भी , उसका आलसी बेटे ने कारोबार पर ध्यान नहीं दिया। जिससे उन्हें कारोबार पर बहुत नुकसान होने लगा।

यह बात देख कर सुमित के मां बहुत दुखी होकर उससे कहा,” बेटा, हमें कारोबार में बहुत नुकसान हो रहा है।”

सुमित कहता है,” लेकिन मैं इसे क्या कर सकता हूं?

मुझे कहां कारोबार की समझ है? मैं तो आज तक भी पिताजी के साथ खेतों में भी नहीं गया।”

स्मिथ के मां कहता है,”एक काम करो, दूसरे गांव में तुम्हारा नाना रहता है ना, उन्हें इन कारोबारी का बहुत समझ है। तुम उनसे जाकर मिल लो। उनके पास इसका जरूर कोई समाधान होगा।”सुमित अपने मां के बातों को सम्मति देकर कहता है,” ठीक है मां मैं कल ही चला जाऊंगा।”

अगले सुबह सुमित नाना के पास जाता है और क्या होता है,प्रणाम नानाजी। नाना जी कह गए, खुश रहो बेटा। बताओ कैसे आना हुआ?

सुमित क्या होता है, पिताजी के गुजर जाने के बाद हमें कारोबार में बहुत ही नुकसान हो रहा है। मां ने कहा अबकी कारोबार में बहुत समझ है। इसलिए आप ही मेरे परेशानियों का कोई हल निकालिए।

नानाजी कहता है, तेरी मां ने बिल्कुल ठीक कहा बेटा।

मेरे पास तुम्हारे परेशानियों का हाल है। सुमित क्या होता है, बताइए नाना जी। जल्दी बताइए।

नाना जी ने कहा, तुम्हें बस इतना करना होगा कि रोज सुबह सूरज के उगने से पहले शिव मंदिर जाना होगा। और उसके बाद, जहां जहां तुम्हारा काम फैला हुआ है, वहां जाना होगा। और तुम्हें ऐसा हर रोज करना होगा।

सुमित ने कहा, ठीक है नाना जी। आप जैसा ही कहा, हम ऐसे ही करेंगे।

अगले ही दिन सुमित सूरज उगने से पहले ही उठने लगा। और सबसे पहले शिव मंदिर जाता। और उसके बाद जहां-जहां उसका काम फैला था, वहां वहां जाने लगा।

रोज सुबह सबसे पहले वो खेत में जाता, फिर रेसन का दुकान, और फिर भैंसों के तबेले में। बहुत दिनों तक ऐसा ही चलता रहा। उसे रोज-रोज काम पर आते हुए देखकर मजदूर आपस में बात करने लगे के,” मालिक आब रोज-रोज काम देखने आते हैं। हमें यह रोज-रोज घोटाले बाजी बंद करना होगा।”

धीरे-धीरे सारे मजदूरों ने देखा, सुमित रोजाना अपने खेत और रेशन दुकान का चक्कर लगाते लगा। और पकड़े जाने के डर से, मजदूरी घोटाले करना बंद कर दिया।

घोटाले बंद होने की कारण, कारोबारियों में नुकसान की बंद हो गए। और धीरे-धीरे सुमित और उसके मां पहले की तरह आमिर होगए।

सुमित इसका मां को कहता है, देखो मां हम कितने अमीर हो ग। सच में नाना जी की सलाह काम कर गए।

ओर सुमित के मां नाना जी के पास जाकर उनको धन्यवाद करने का उपदेश देता है।

अगले ही दिन सुमित नाना जी के पास गया और कहां,

आपको बहुत-बहुत शुक्रिया, आपने तो चमत्कारी कर दिया। आपकी वजह से हमारा परिवार फिर से चल पड़ा।

नानाजी कहते हैं, बेटे इसमें मैंने कुछ नहीं किया। इसमें सब कुछ तुमने ही किया है। सुमित आश्चर्य होकर पूछता है, वह कैसे?

नानाजी कहता है, यह सब केवल तुम्हारे अलस के वजह से हो रहा था। तुम्हारे हेलो उसके वजह से तुम कारोबार में ध्यान नहीं दे रहे थे। इसका फायदा उठाकर, तुम्हारे मजदूर कारोबार मै घोटाला कर रहे थे। आप क्यों की तुम रोजाना काम पर जाने लगे हो, तो पकड़े जाने के डर से तुम्हारे मजदूर घोटाला करना बंद कर दिया। और तुम्हारा काम चल पड़ा।

यह सुनकर सुमित को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने आलस करना छोड़ दिया। और वह अपना कारोबार बहुत समझदारी से समहलने लगा।

Moral : आलस एक बूढ़ी वाला है। इसलिए हमको आलस त्याग कर, काम समय पर करना चाहिए।

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मोटी बकरी

एक किसान के पास दो बैल थे। एक का नाम लाल और दूसरे का नाम भुरा था। दोनों ने मिलकर किसान के लिए बहुत परिश्रम करते थे। वह उसके लिए खेतों में हल चलाते थे और खेतों को जोतते थे।

बे उसकी बैलगाड़ी को खींच के शहर में, बाजार के दिनों में ले जाते थे। जब वे थक कर भूखे प्यासे घर को लौटते थे, तो किसान उनको बहुत अच्छी, ताजी और हरी घास खाने के लिए देता था।

वहां उनको अच्छा और ठंडी पानी भी पीने को देता था। वे दोनों बहुत संतुष्ट और खुश थे। कुछ समय के लिए सब कुछ ठीक चल रहा था। फिर एक दिन किसान एक बकरी खरीद के लाया।

किसान ने उस बकरी को भी हर प्रकार की खूब अच्छे खाने की चीजें देना शुरू कर दिया। वह उसे चने और मीठे गन्ने भी खिलाता था। बकरी यह सब चीजें खाने में बहुत आनंद उठाता था।वह खुशी से मिमियाती और मैं मैं करती हुई घुटनों के बल बैठकर, जो भी मिलता खाती रहती थी।

जब भूरे बैल ने देखा के बकरी तो बिना काम किए बहुत ही खुश और संतोष रहती है, तब वह बहुत व्याकुल हो गया। वह बड़बड़ आने लगा, और लाल बैल से शिकायत करते हुए कहने लगा,”हम दोनों हर दिन, हर समय, इतनी मेहनत करते हैं, और हमें खाने को केवल घास और भूसा मिलता है।

बकरी तो कुछ भी नहीं करती, वह तो सारा दिन खाती और खाती रहती है। मोटी और मोटी होती जा रही है।”

लाल बेलने मुस्कुराते हुए कहा,”किसान हमें भी अच्छे घास, भूसा और ठंडा पानी खाने पीने को देता है। वह हमारे विश्राम के लिए मुलायम और सूखी घास बिछड़ता है। हमें जो कुछ मिल रहा है, यदि तुम इसी में संतुष्ट रहोगे तो सदा खुश रहोगे। और बहुत समय तक जी सकोगे। तुम देख लेना, कि किसान अवश्य कोई करण

बश बकरी को मोटा कर रहा है।”

एक दिन दोनों बेलो ने देखा के किसान अपने साथी के साथ बहुत बढ़िया खाना खा रहा है, परंतु मोटी बकरी कहीं भी दिखाई नहीं दे रहा है। तब उन दोनों ने जाना, के किसान ने मोटी बकरी को अपने पुत्री के विवाह के भोजन के लिए काट दिया।

यह देख कर भूरा बेल समझ गया, की लाल बैल सही कह रहा था। उसने ठीक ही सोचा था।

Moral : दूसरे को ज्यादा सुख को देख, अपना सुख ना भूलो। ईश्वर ने जो भी दिया, उसी में संतुष्ट हो जी लो।

END

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