15+ Best Maa in Hindi poetry You Will Love (2020)

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15+ Best Maa in Hindi poetry

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Poetry On Maa 1

कैसे बचपन में उंगली पकड़ के चलना सिखाया था उन्होंने
भागते भागते गिर जाता था तो उठाना सिखाया था उन्होंने।

घर में सबसे पहले उठ के हर काम करती है वह आज भी
सब की डांट सुन कर भी खामोश रहती है वह आज भी।

मेरे चेहरे पर श्रीकांत भी आ जाए तो पहचान लेती है वह
मैं कितना भी डांट लूं, सुना लूं, फिर भी मुस्कुराती रहती है वह।


थोड़ी अनपढ़ है, मैं दो रोटी मांगता हूं तो चार रख देती है
50 रुपया मांगता हूं तो सौरभ देती है।पर कोई नहीं मां तो मां है।

बचपन से लेकर आखिरी सांस तक, मां हमारे लिए बहुत कुछ करती है
और यह समझते समझते हमारी पूरी उमार निकल जाती है।

हड्डियों के टूटने जितना दर्द खेल कर हमें पैदा किया करना
रात रात भर जागकर हमें चैन से सुलाना।

हमारे भूख लगने से पहले हमारे लिए स्वादिष्ट खाना तैयार कर लेना
घर के हर एक सदस्य की जिम्मेदारी को पूरे दिन और जान से निभाना।

कैसी कैसी मुश्किल घड़ी के सामना किया
लेकिन कभी अपने बच्चों पर आंच ना आने दिया।

जब बिना मांगे मिल जाता था तो उनके खाने में नुक्स निकलते थे, नखरे करते थे
आज घर से दूर जब मांगे पर भी नहीं मिलता तो याद 
आती है उस नापसंद दाल की, बिना नमक की सब्जी की।

मुझे आज भी याद है जब पहली बार मेरा दिल टूटा था 
मैं अपनी मां के गोंद पर जाकर खूब रोया था।

आए दिन हर कोई हमसे नाराज रहता है,
बस एक मां ही है जो हमसे कभी रूठ नहीं पाती।

कभी घर से निकल जाए तो उसकी दुआ कभी पीछा नहीं छोड़ती
हमेशा शान होती है, कभी जुदा नहीं होती।

उनकी इज्जत जितनी करो कमी ही है
मैं प्यार जितना दो कम ही है।

हां उसके बावजूद भी कहीं बाहर उनके इज्जत करने से छुप जाते हैं
यह उनके बूढ़े होते होते उनको बोझ समझने लगते हैं।

अगर है तुम्हारी जिंदगी में मां आज भी तो उनके पास दो वक्त बैठ के उनसे बात कर लिया करो, उन्हें अच्छा लगेगा।

मां कई नहीं होती मां एक ही होती है और एक ही बार मिलती है।
जिनके पास नहीं होती उनको पूछो अपना दर्द।

मैं ज्यादा जाता पता नहीं की कितना प्यार करता हूं उन्हें
लेकिन करता बहुत हूं।

I Love You Maa ❤️

Poetry On Maa 2

कभी स्वर्ग को जमी पर देखा है?
करीब से कभी मां को हंसते हुए देखा है?

उसको चैन नहीं मिलता मुझे बात किए बिना
उसको दिल नहीं निकलता मेरी आवाज सुने बिना।

वह मेरी हंसने से पहले मेरी नजर उतार देती है
मां है वह मेरी हंसते हंसते अपनी जान भी डाल देते हैं अपनी।

मेरे कहने से पहले उसने मेरा हर दर्द समझा है
मेरे बस एक आवाज से मेरे पूरे दिल का हालात समझा है।

मेरी हर गलती पर पर्दा डालती है वह
पर उसका एहसास भी हमसे कराया है वह।

आज जब वह वक्त है और वह मुझसे दूर
तो रोज मुझे कुछ सवालों के रूपमें कुछ वादा मांगती हैं
और अब भी अपने लिए कुछ नहीं
बस मुझसे मेरी ध्यान मांगती है।

I Love You Maa ❤️

Poetry On Maa 3

बचपन के बीती बातों को मैं भूल कभी ना पति हूं
प्यार तो बहुत करती हूं आपसे मां, लेकिन इजहार नहीं कर पाती हूं।

रुठ जाए खुदा भी लेकिन आप ना रूठना कभी
टूट जाऊं मैं कभी लेकिन आप ना टूटे ना कभी

आपको देख कर ही तो कुछ करने का हिम्मत पति हूं
प्यार तो बहुत करती हूं आपसे मां लेकिन इजहार नहीं कर पाती हूं।

बिना हौसला जब कमजोर सा पाव मुझे
चाहती हूं जब मैं रोयुं आप ही गले लगा मुझे।

आप नहीं होती साथ तो खुद को बहुत अकेला सा पाती हूं
प्यार तो बहुत करती हूं आपसे मां लेकिन इजहार नहीं कर पति हूं।

जाने अनजाने में आपका दिल दुखाया है तो मैंने
आज यह अनकही बातों को पन्नों में उतारा है मैंने।

जिंदगी के कुछ कठिन फैसले मैं सलाह आपकी ही चाहती हूं
प्यार तो बहुत करती हूं आपसे मां, लेकिन इजहार नहीं कर पाती हूं।

क्यों करें किसी गैर पर एतवार बताओ
क्यों बसाए एक नया घर बार बताओ ।

मैं तो जिंदगी भर आपकी और पापा के साथ रहना चाहते हूं
प्यार तो बहुत करती हूं आपसे मां, बस इजहार नहीं कर पाती हूं।

I Love You Maa ❤️

Poetry On Maa 4

जिसे हम लफ्जों मैं बयां ना कर सके वह है मां
जिनकी हर दुआओं में चमत्कार है वह है मां।

मुझे जरा सा भी चोट लग जाए तो परेशान हो जाती है मेरी मां
तकलीफ में मैं हूं तो घबरा जाती है मेरी मां।

दुनिया से तो लड़की ही है
पर कभी-कभी मेरे लिए मेरे पिता से लड़ जाती है मेरी मां

मेरे बड़ी से बड़ी भूल को माफ कर देती है मेरी मां
मेरे पहले शिक्षक है मेरी मां।

मेरे आंसुओं को पोंचकर मुझे हंसाने वाली है मेरी मां
मुझे बेहतर बनाने के लिए अपने से दूर भेज देती है मेरी मां।

अगर कभी झूठ बोलूं मैं उनसे तो झट से पकड़ लेती है मेरी मां
मेरी गलतियों पर मुझे समझाती है मेरी मां।

कपड़े मेरे लिए सिलाई ति भी है मेरी मां
अगर कभी में कमजोर पढ़ो तो मुझे रास्ता दिखाती भी है मेरी मां।

सबकी मदद करती है मेरी मां
मेरी राहों में हर पल मेरा साथ देती है मेरी मां।

मेरी जीवन को स्वर्ग बनाती है मेरी मां
मेरी जन्नत है मेरी मां।

जब से देखी है दुनिया
तेरी ममता ही पाई है मेरी मां।

यह तो चंद लाइने लिखी है मेरी मां के ऊपर
लेकिन मेरी मां ने तो मुझे ही लिखा है।

तेरी दुआ है तो है जो मैं भर्ती हूं
वरना तो मैंने तुझसे ही सीखा है मेरी मां।

जो है मेरे पास वह तेरी ही दुआओं का असर है मां
मैं जानता हूं मैं तुमसे कभी बयां नहीं किया 
लेकिन आज करना चाहती हूं
क्योंकि मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूं मैं।

ए खुदा यह तेरी ही रहमत है
चौपाई है मैं इतनी प्यारी मां
वह बहुत नसीब वाले होते हैं 
जिनको होती है मां।

I Love You Maa ❤️
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Poetry On Maa 5

लबों पर उसके कभी बद्दुआ नहीं होती
बस एक मां है जो कभी खफा नहीं होती।

इस तरह वह मेरे गुनाहों को धो देती है
मां बहुत गुस्से में होती है, तो रो देती है।

मैंने रोते हुए पोंचाय थे किसी दिन आंसू
मुद्दतों मां ने नहीं धोया दुपट्टा अपना।

अभी जिंदा है मां मेरी
मुझे कुछ भी नहीं होगा।

मैं जब घर से निकलता हूं 
दुआ भी मेरे साथ चलती है।

जब भी कश्ती मेरी सैलाब में आ जाती है
मां दुआ करती हुई ख्वाब में आ जाती है।

यह अंधेरे देख ले मुंह तेरा काला हो गया
मां ने आंखें खोल दी घर में उजाला हो गया।

मेरी ख्वाहिश है कि मैं फिर से फरिश्ता हो जाऊं
मां से इस तरह लिप्टू के फिर से बच्चा हो जाऊं।

मां के आगे यूं कभी खुलकर नहीं रोना
जहां बुनियाद हो इतनी नमी अच्छी नहीं होती।

लबों पर उसके कभी बद्दुआ नहीं होती
बस एक मां है, जो कभी खफा नहीं होती।

I Love You Maa ❤️

Poetry On Maa 6

उसके पल्लू ने ना जाने कितने तूफानों को मोड़ दिया
और छान के जहर को अमृत कर दिया
और कल आया था समुंदर मुझे भी डुबाने
मां ने उसे भी पल्लू में समेटा और निचोड़ दिया।

तुम्हें बिस्तर पर सुलाकर वह खुद दरी पे सो देती है
मां तुम्हारे खुशी के लिए सारे इच्छाएं तक खो देती है।
वह ममता की मूरत है अपने गुस्सा निकले तो निकले कैसे यारों
इसलिए मां ज्यादा गुस्से में रो देती है।

कभी अपने बाप पर हाथ मत उठाना
वरना तेरी जिंदगी हराम बन जाएगी
और कभी अपनी मां की गुलामी करके देख
यह पूरी दुनिया तेरी गुलाम बन जाएगी।

खुदा का भी अंदाजा नहीं था के मुझे कुछ यूं सुनाई दिया होगा
और जब कांधा दे रहा था अपनी मां की आरती का
तो कहने लगी तो कांधा किसी और को दे दे
थक गया होगा।
और कुछ खाया पिया भी है कि यूं ही शमशान चलाया है?
और नालायक इतनी धूप है फिर भी नंगे गांव में चला आया है।

जब उसने मुझे छोड़ दिया
तो मैं खुदा से अपनी मौत की दुआ मांगी
खुदा ने कहा,मौत तो मैं तुझे दे दूं
पर उस मां का क्या करूं
जो रोज तेरी लंबी उमर की दुआ मांगती है।

मांग लो यह मन्नत की फिर यही जहां मिले
फिर वही गोद, फिर वही मां मिले।


चलती फिरती हुई आंखों से आजा देखी है
मैंने जन्नत तो नहीं देखी है मगर अपने मां को देखी है।

मेरा दुश्मन परेशान है मेरी मां की दुआओं से
वह जब भी वार करता है तो खंजर टूट जाता है।

खुदा से इल्तजा है एक कि मेरा यह काम कर देना
मेरे मां के सारे गम मेरा इनाम कर देना।

I Love You Maa ❤️

Poetry On Maa 7

किसी भी मुश्किल का अब किसी हल नहीं मिलता
शायद अब कोई ही घर से मां के पैर झोंके नहीं निकलता।

हालात बुरे थे मगर अमीर बना कर रखी थी
हम गरीब थे यह बस मेरी मां जानती थी।

उसके होठों पर कभी बद्दुआ नहीं होती
बस एक मां है जो कभी खफा नहीं होती।

सख्त राहों में भी आसान सफर लगता है
यह मेरी मां के दुआओं का असर लगता है।

जब भी कश्ती मेरी सैलाब में आ जाति है
मां दुआ करती हुई ख्वाब में आ जाती है ।

रुह की रिश्तो की यह गहराईयां देखिए
चोट लगती है हमें और चिल्लाती है मां।

हम खुशियों में मां को भाले भूल जाएं
जब मुसीबत आ जाए तो याद आती है मां।

किसी को घर मिला या इससे में कोई दुकान आई
मैं घर में सबसे छोटा था मेरे हिस्से में मां आई।

मांग लूं यह मन्नत की, फिर यही जहां मिले
फिर यही गोद मिले, और इन्हीं मां मिले की ।

I Love You Maa ❤️
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Poetry On Maa 8

मां के आंचल में तेरे मैं सरताज बन गया
तेरे लबों की मां मैं आवाज बन गया।

बिन तेरे मेरी मां मैं जाऊंगा कहां
पाया जो छाया तेरा मैं गुलाब बन गया।

बचपन की वह लोरी मां मुझको सता रही
वह कंधों के सवारी मां मुझे याद आ रही।


शहरों की शहरी बातें मुझको आती ना समझ
बस तेरी वो बातें अब याद आ रहा
पाया जो छाया तेरा,मैं गुलाब बन गया।

वह रूठना मनाना अब तो होता ना यहां
बातों बातों में मां अब मैं रोता ना यहां।

बचपन के वह खिलाने लाके अब तो दे दो ना
शहरों का अब यह शौक तो खराब कर दिया
पाया जो छाया तेरा तो मैं गुलाब बन गया।

I Love You Maa ❤️

Poetry On Maa 9

तुझे पहचानूंगा कैसे? तुझे देखा ही नहीं
ढूंढा करता हूं तुझे अपने चेहरे में कहीं
लोग कहते हैं मेरी आंखें मेरी मां सी है।

यूं तो लवरिज है पानी से मगर, प्यासी है
कान में छेद है पैदाइश ही आया होगा
तुम्हें मन्नत के लिए कान चिढाया होगा।

सामने दांतो का बंकफा है, तेरी भी होगा
एक चक्कर तेरी पांव के तले भी होगा

जाने किस जल्दी में थी जन्म दिया, दौड़ गई
क्या खुदा देख लिया था, कि मुझे छोड़ गई।

मेलके देखता हूं, मिल ही जाएगा तुझसे कहीं
तेरे बिन ऊपरी लगती है, मुझे सारी जमीन।

I Love You Maa ❤️

Poetry On Maa 10

डांट कर बच्चों को खुदा अकेले में रोती है
वह मां है साहब, जो ऐसे ही होती है।

तुम क्या सिखाओ गे मुझे प्यार करने का सलीका
मैंने मां के हाथ से एक थप्पड़, दूसरे से रोटी खाई है।

रुके तो चांद जैसी है, चले तो हवा जैसी है
वह मां ही है जो धूप में भी छांव जैसी है।

यह ऐसा कर्ज है जो मैं अदा नहीं कर सकता
मैं जब तक घर ना लोंटू मेरी मां सजदे में रहती है।

चलती फिरती हुई आंखों से आजा देखी है
मैंने जन्नत तो नहीं देखी मगर मैंने मां देखी है।

दवा असर ना करें तो नजर भी उतरती है
यह मां है जनाब हार कहां मानती है।

सारी दुनिया बोलती है बड़ा हो गया है कुछ कमाया कर
बस मां बोलती है कमजोर हो गया है कुछ खाया कर।

वह हर बार तुम्हें मनाएंगे चाहे तुम हर बार उन्हें ठुकरा देना
गार मां बाप से कोई मोहब्बत मिली, तो मुझे जिंदा दफना देना।

गिनती आज भी नहीं आती मेरी मां को यारों
मैं एक रोटी मांगता हूं वह हमेशा दो ही लेकर आती है।

मां के लिए क्या लिखूं
मां ने खुद मुझे लिखा है।

I Love You Maa ❤️
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Poetry On Maa 11

सबसे पावन, सबसे निर्मल, सबसे सच्चा, मां का प्यार
सबसे अनोखा, सबसे न्यारा, सबसे प्यारा मां का प्यार।

बच्चे को खुश देख देख के मन ही मन हंसता रहता
जब संतान पर विपदा हाय तराप ही उठता मां का प्यार।

सुख की ठंडी छांव में शीतल पवन के जैसा लहराता
दुख की जलती धूप में सर पे साया बनता मां का प्यार।

मिल जाएगा यूं तो जग में कोई विकल्प हर रिश्ते का
बेमिसाल है लाजवाब है बड़ा अनूठा मां का प्यार।

करता शीश झुक कर विनती हमसे यही विधाता से
जैसे मुझे दिया है यह रब, सबको देना मां का प्यार।

I Love You Maa ❤️

Poetry On Maa 12

बचपन से लेकर आज तक
हर दिन मेरा ध्यान रखा है तुमने
दर्द रहता है तुम्हारे हाथ में
पर कभी कहां कुछ कहां है तुमने।

आज क्या बना हूं तेरे लिए
हारे रोज कितनी प्यार से पूछती हो
मेरी हर चीज का ध्यान रहता है तुम्हें
फिर क्यों अपना दवा लेना बोलती हो?

मां एक बात बताओ
आखिर इतना बड़ा दिल कहां से पाया है तुमने
जो हर बार अपने हिस्से का खाना
अपने हाथों से खिलाया है तुमने।

हमारे बारे में सोचते सोचते
अपने बारे में सोचना भूल गई ना ?
इतना कुछ दीया मुझे हमेशा
और आज फिर अपने लिए कुछ लेना भूल गई ना?

मां मुझे तो याद भी नहीं है
के आखरी बार तू कब शॉपिंग पर गाय है?
कोई बात हो या ना हो
पर घर आते जिसका चेहरा देखना चाहता हूं
वह तुम हो मां।

हार जाओ भी अगर कभी
जिसको देखकर फिर जीत चाहता हूं
वह तुम हो मां।

मां चलो ना साथ बैठ कर थोड़ी बात करते हैं
मेरे नहीं बल्कि आज तुम्हारे बचपन को याद करते हैं।

मां मुझे पता है कि मैं बहुत बुरा हूं
तुम इतना कुछ करती हो मेरे लिए
और मैं कहां कुछ करता हूं?

तुमने हर गलतियां अपनी हंसते हंसते माफ किया है
और मैं फिर भी तुमसे लड़ता हूं
Sorry Maa
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Poetry On Maa 13

खुद को देखता हूं ना जब
तो मैं दिन रात सपनों के पीछे भागा रहता हूं
पर जब तुम्हें देखता हूं
तो तुम मैं भी सिर्फ खुद को देखता हूं।

मां कैसे तुमने मेरे लिए अपने सारे ख्वाब तोड़ दिए
सपने तो रहे होंगे ना तुम्हारे भी कभी
तो वह फिर कैसे इतनी आसानी से छोड़ दिए?

मेरा ना एक दोस्त है मां
जिसके पास उसका मां नहीं है
खाना खाया क्या बेटा तुमने
उसे ऐसा कोई पूछने वाला नहीं है।

एहसास तब होता है मां
के मैं बहुत खुशकिस्मत हूं
जो आपने इन उंगलियों में
मैं आज ही तुम्हारा हाथ देख पाता हूं।

मां बस इतनी दुआए है उस रब से
के वह सपने दूर रहे मुझसे
जिसमें मां तुम साथ ना हो।

जिस बात पर तुम्हारे दिल को ढेस पहुंचे
मां मेरे जुबां पर कभी वह बात ना हो

हर चीज मुझे सिखाई है, हर चीज मुझे बताई है
मैं लापरवाह सा हूं, पर तुमने वह कमी भी मेरी सरहाई है।

कभी-कभी सोचता हूं के यह जिंदगी कैसी होती
बिन तुम्हारे आखिर मेरी ये रातें कैसी होती।

बचपन में बहुत रोता था मां
दो पल के लिए भी अगर तुम्हारा चेहरा ओझल हो जाए
सोचने से भी रू कांप उठती अब तो
बस दुआ है के कभी वह रात ना आए।

कोई सपने भी पूरे ना हुए अब
मां मुझे कोई गम नहीं होगा
मेरी मां मेरे साथ हर वक्त है
इससे ज्यादा सुकून और कहां होगा।

I Love You Maa ❤️

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