5 Mind Changing Motivational Short Story In Hindi (2020)

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5 Motivational Short Story In Hindi

सच्चा शिष्य

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बहुत समय पहले की बात है, एक गुरुकुल था जो बहुत विशाल और प्रसिद्ध था। उसके आचार्य बहुत विद्वान थे। एक दिन की बात है, उन्होंने अपने सारे शिष्यों को अपने पास बुलाया और कहा, “प्रिय शिष्य, मैंने तुम्हें यहां पर एक समस्या का हाल खोंज ने के लिए बुलाया है। तुम्हारी शिक्षा पूरी हो गई है, और मेरी कन्या विवाह के योग्य हो गई है। लेकिन मेरे पास उसके विवाह के लिए धन नहीं है। समझ में नहीं आ रहा है कि मैं क्या करूं।”

धनबानों के पुत्र आगे बढ़े और बोले, “गुरुदेव आप चिंता ना कीजिए, हम अपने माता-पिता से धन मांग कर लाएंगे। आप उस धन को गुरु दक्षिणा के रूप में स्वीकार कर लीजिएगा, और अपने कन्या का विवाह कर देना।” आचार्य बोले, “मुझे इसमें संकोच होता है, तुम्हारी माता-पिता सोचेंगे के गुरु लोभी है।” 

आगे बड़े शिष्य थोड़ा पीछे हो गए। उनमें से एक शिष्य ने पूछा, “गुरुजी फिर क्या उपाय हैं?” आचार्य ने कुछ सोचते हुए कहा, “एक उपाय मेरे दिमाग में आया है। तुम लोग अपने अपने घरों से धन और वस्त्रों में इस प्रकार लाना, की किसी को भी पता ना चले। इससे मेरा काम भी हो जाएगा और मेरी इज्जत थी बंच जाएगी।”

शिष्यों ने गुरु की बात स्वीकार कर ली। दूसरे दिन से आज्ञाकारी शिष्य अपने-अपने घरों से धन और वस्त्रों लाने लागे। आचार्य उसे प्रसन्नता से लेते गए। कुछ दिनों पश्चात उन्होंने देखा कि अपने कन्या के विवाह के लिए पर्याप्त सामग्री जमा हो गई।

उन्होंने देखा एक शिष्य ऐसा था जो अभी तक कुछ भी नहीं लाया था। आचार्य ने उस शिष्य को पूछा, “तुम अपने घर से कुछ भी क्यों नहीं लाए?” शिष्य ने उत्तर दिया, “गुरुजी मेरे घर में किसी भी चीज के कमी नहीं है, परंतु मैं कुछ ला नहीं पाया।” आचार्य ने कहा, “क्या तुम गुरु के सेवा नहीं करना चाहते हो?”

शिष्य ने उत्तर दिया, “नहीं गुरुदेव, ऐसी बात नहीं है। आपने कहा था चीज इस प्रकार लाना की किसी को भी पता ना चले, मुझे घर में कोई ऐसा स्थान नहीं मिला, जहां कोई भी ना देखें। कोई देखे या ना देखें पर मैं तो वहां रहता ही हूं, मैं तो अपने कु कर्म को देखते ही रहूंगा।”

आचार्य ने तुरंत उस शिष्यों को गले लगा कर कहा, “तू ही मेरा सच्चा शिष्य है, मेरे कहने पर भी तूने पाप मार्ग नहीं अपनाया। यही तेरे चरित्र की दृरता का प्रमाण है। तेरे पास ही सच्चा धन है। तू ही मेरे कन्या के लिए यज्ञ बर है।” आचार्य को सही मायने में किसी सामान के आवश्यकता नहीं थी, बल्कि वह एक यज्ञ बर तलाश रहे थे।

इस बात से हमें यह शिक्षा मिलती है, की किसी के कहने पर भी कोई भी गलत मार्ग नहीं अपनाना चाहिए। और चोरी या कोई बुरा काम हमें कभी नहीं करना चाहिए। क्योंकि बुरा काम इंसान को हमेशा और बुराई की ओर खींचता जाता है।

जादुई चश्मा 

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किसी गांव में एक गरीब किसान अपने परिवारों के साथ रहता था। किसान के परिवार में उसकी पत्नी कमला और बेटा राधे उसके साथ ही रहते थे। वह दिन रात मेहनत करके किसी तरह अपने परिवार का गुजारा करता था।

एक दिन किसान अपने बेटे राधे को कहा, “बेटा राधे तुम्हारी मां बाजार गए हैं, और मैं खेतों में बीज बोने जा रहा हूं, इसलिए तुम घर पर ही रहना। क्योंकि आजकल गांव में बहुत चोरियां हो रहे है।” राधे ने कहा, “ठीक है पिताजी, आप निश्चिंत होकर जाइए। मैं कहीं नहीं जाऊंगा।”

किसान ने खेतों में पहुंचकर खेत की खुदाई शुरू की, तभी उसे फबरे की किसी धातु पर टकराने की आवाज सुनाई दी। उसने मिट्टी हटाकर देखा, तो उसे एक चमकता हुआ डिब्बा दिखाई दिया। किसान ने उस डिब्बे को बाहर निकल कर देखा।

किसान सोचने लगे, “अरे वाह इसमें जरूर कोई खजाना होगा।” यह सोच कर किसान ने जैसे ही दिव्या को खोल कर देखा, वह उदास हो गया। वह कहने लगे, “हे भगवान किसने बस तो एक बेकार चश्मा है, मेरी तो सारी मेहनत ही खराब हो गई।” यह कहकर किसान ने उस चश्मे को वही रख दिया और अपना काम करने लगा।

थोड़ी देर बाद उसका बेटा राधे वहां पर आया और उससे कहां, “पिताजी आप कुछ देर आराम कर लीजिए, तब तक मैं खेत की रखवाली कर लेता हूं।” किसान ने कहा, “ठीक है बेटा, लेकिन जरा ध्यान से। आजकल जंगली जानवर खेत में कभी भी आ जाते हैं।”

किसान वही एक पेड़ के नीचे लेट कर सोचने लगा, “क्यों ना इस चश्मे को लगाकर दिखा जाए! कम से कम इस धूप से तो आराम मिलेगा। किसान में चश्मा लगाकर अपने बेटे को देखा। और उसे कुछ जंगली जानवर अपने बेटे पर हमला करते हुए नजर आए। उसने जल्दी से चश्मा उतार दिया।

वह कहने लगे, “अरे यह अचानक मुझे क्या हो गया था? यह सब क्या था? मुझे तो कुछ समझ में ही नहीं आया।” किसान ने दोबारा चश्मा लगाया, और अपने बेटे राधे की तरफ देखा, उसने दोबारा वही देखा जो उसने पहले देखे थे। किसान को समझ आ गया की यह कोई साधारण चश्मा नहीं, बल्कि जादुई चश्मा है।

किसान में जल्दी चश्मा उतारा और राधा की पास जाकर कहा, “बेटा राधे तुम जल्दी घर जाओ, यहां सारा काम मैं खुद ही कर लूंगा।” राधे ने पूछा, “क्या हुआ पिताजी? मैं तो अभी घर से ही आया हूं। मा भी घर ही आई थी, फिर आप मुझसे जाने के लिए क्यों कह रहे हैं?”

किसान में कहां, “काल से खेत का सारा काम तुम्हें ही तो करना है, इसलिए आज तुम सिर्फ आराम करो।” यह सुनकर राधे घर चला गया। किसान को समझ आ गया कि यह कोई साधारण चश्मा नहीं, बल्कि यह जादुई चश्मा है। जिसे पहन कर वह सबकी निकट भविष्य देख सकता है।

किसान बहुत खुश हुआ और कहां, “अरे वाह, अब तो मैं पूरे गांव का भविष्य देख सकता हूं। क्यों ना मैं लोगों का भला करने के लिए इस चश्मे का इस्तेमाल करूं।” और यह कह कर किसान काम छोड़कर गांव में घूमने चला गया।

वह गांव के लोगों का भविष्य देखता, और उसे ऐसा कोई काम नहीं करने देता जिससे उसे कोई नुकसान हो। गांव के सभी लोग उसका बहुत तारीफ करने लगे। एक दिन उसे उसका पुराना दोस्त लल्लन मिला, और वह सोचा क्यों ना मैं लल्लन का भविष्य देखूं।

किसान चश्मा लगाकर लल्लन को देखने लगा, किसने देखा लल्लन को एक व्यापारी जल्द ही बहुत सारी धन देने वाला। इतना देखते ही किसान के मन है लालच आ गया, और उसने आधा भविष्य देख के ही चश्मा उतार दिया। और उसने सोचा, “क्यों ना मैं लल्लन को भटका कर खुद ही उस व्यापारी से सारा धन ले लूं।”यह सोच कर किसान लल्लन के पास गया।

किसान ने कहा, “कैसे हो लल्लन भाई? और इतने जल्दी में कहां जा रहे हो?” लल्लन ने कहा, “मैं तो ठीक हूं भाई। बस जरा बाजार तक जा रहा था।” किसान ने छल से कहां, “लेकिन आज तो बाजार बंद है ना भाई!” लल्लन ने कहा, “क्या बाजार बंद है? पर क्यों”

किसान ने बताया, “मैं अभी बाजार से ही आ रहा हूं, आज वहां किसी व्यापारी के दुकान में आग लग गई है। इसीलिए आज बाजार बंद है।” लल्लन ने कहा, “फिर तो आज बाजार जाना बेकार है।” और यह कह कर लल्लन में घर चला गया।

और किसान पैसों की लालच में बाजार चला गया। बाजार पहुंचते ही किसान को एक व्यापारी मित्र मिला, जिसने उसे एक पैसों से भरा बैग देते हुए कहा, “अरे भाई अच्छा हुआ तुम मिल गए, क्या तुम यह बैग अपने पास रख सकते हो? क्योंकि मैं कुछ दिन के लिए दूर विदेश जा रहा हूं। और मैं ऐसे ही किसी पर भरोसा नहीं कर सकता। तो क्या तुम मेरे वापस आने तक इस बैग का ध्यान रखोगे?”

किसान ने मन ही मन सोचने लगा, “अरे वाह, मैं इस बैग को लेकर बहुत अमीर हो जाऊंगा। और व्यापारी मित्र के वापस आने तक, अपना घर भी बदल दूंगा। इससे वह मुझे कभी भी दोबारा ढूंढ नहीं पाएगा।”

ऐसा सोच कर किसान ने अपने व्यापारी मित्र से कहा, “अरे भाई तुम निश्चिंत होकर विदेश जाओ, मैं इस बैग का अच्छे से ध्यान रखूंगा।” यह कहते हुए किसान ने बैग ले लिया और व्यापारी वहां से चला गया। तभी वहां भागते हुए एक और व्यापारी आया। और किसान को जोर से पकड़ कर बोला, “तुमने मेरा बैग चुराया! अब तुम्हारी खैर नहीं!”

व्यापारी ने किसान को बहुत मारा, और इसी बीच वह चश्मा भी टूट गया। व्यापारी उसे बोलने का मौका दिए बिना ही उस बात को अपने साथ लेकर चला गया। अब किसान को समझ आ गया, कि वह पैसों से भरा बैग चोरी का था। और उसके मित्र ने उसे धोखा दिया था।

किसान अब को अपने किए पर बहुत पछतावा हुआ। और वह कहने लगा, “यह सब इस चश्मे के वजह से हुआ, अगर में इस चश्मे से भविष्य ना देखता, तो मेरे मन में कभी लाला नहीं आता, और ना ही मैं यह सब चीजों से फंसता।”

तो इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है, हमें कभी, भी किसी भी चीज का दूर उपयोग नहीं करना चाहिए। और कभी भी हमें लोभ नहीं करनी चाहिए, क्योंकि लोभ मनुष्य के चरित्र को बुराई की ओर खींचता है।

सांप का बदला 

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एक समय की बात है, एक इंसान एक समुंदर के पास से चल रहा था, तभी वह देखता है वहां पर एक पाइप गिरा होता है, और उस पाइप में एक सांप फसा हुआ होता है। यह देख कर वह इंसान उस सांप की तरफ देखता है और उसके तरफ चल पड़ता है।

वह आपके लिए उस इंसान के मन में दया आई, वह उस सांप को उस पाइप से निकालना जा रहे थे। लेकिन जब वह उस साप को बचाने के लिए उसको निकलने की कोशिश कर रहे थे, तभी वह साप उसे काट लेता है। और वह अपना हाथ झटक के तुरंत पीछे हो जाता है।

और वह दोबारा फिर सोचता है, कि मैं इस सांप को कैसे निकालूं। तभी उसके बाजू में एक इंसान उसे देखते रहता है। और वो इंसान फिर से उस सांप के पास जाता है, और उसे फिर से निकलने की कोशिश करते हैं। लेकिन इस बार भी साहब उसे काट देता है, और वह फिर से पीछे हट जाता है।

वह उस सांप को देखते रहता है और सोचता है, कि कैसे मैं इस सांप को बाहर निकालूं। फिर कुछ देर सोचने के और प्रयास करने के बाद, वह उस सांप को निकाल लेता है। और वह सांप को समुंदर के किनारे एक महसूस जगह में छोड़ देता है।

तब बाजू में है खड़ा हुआ इंसान उसके पास आता है, और उसको पूछता है, “भैया आप यह क्यों कर रहे थे?आपको जॉब पता था की उस साप ने आप को दो बार कटा है, फिर भी आप उसके जान बचाने में लगे थे?”

तब हंसते हुए वह इंसान कहता है, “भैया यह बात सही है, कि सांप मुझे कट रहा था। लेकिन मैं आपको एक बात बताऊं, की यहां पर सबका एक स्वभाव होता है। सांप का स्वभाव है काटना, काटना मतलब जो भी उसके तरफ जाए या उसे लगे की कोई उसका चोट पहुंचाएगा, तभी वह काटता है। सांप एक जानवर है, वह अपनी इस स्वभाव को कभी नहीं बदल सकता। और मेरा स्वभाव है किसी की जान बचाना, और मैं यह कभी नहीं बदल सकता।”

तो इस कहानी से हमें यह सीख मिलती, की इंसान को कभी दूसरे प्राणी को देखकर अपने स्वभाव कभी नहीं बदलना चाहिए। कोई हमारा बुरा चाहे तो उसका यह मतलब नहीं, कि हम उसका बुरा चाहे। हमारा जो स्वभाव है हमें ऐसे ही रहना चाहिए।

सोच का असर 

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किसी गांव में भोला नाम का एक गोयाला रहता था, उसने अपने घर पर बहुत गाय पाल रखी थी। वह अपने गायों का दूध बेचकर अपना जीवन यापन करता था। भोला बहुत समझदार और व्यापारी कौशल वाला व्यक्ति था। भोला के दो बेटे थे, सोनू और मोनू। सोनू और मोनू स्कूल में पढ़ाई करते थे और साथ ही साथ पिता के कान के हाथ बंटाते थे। भोला भी समय ही समय उन्हें ज्ञान की बातें सुनाया करता था।

एक दिन भोला ने अपने बेटों को कुछ सिखाने के उद्देश्य मैं कहां, “बच्चों मैं इस बाग में एक बोल छुपा कर रखा है। जो भी उस बोल को ढूंढ कर लाएगा, मैं उसे उचित इनाम दूंगा। सोनू एक आशावादी सोच रखने वाला लड़का था।

पिता के बात सुनकर सोनू ने सोचा, “इतने बड़े बगीचा में बोल ढूंढना बहुत मुश्किल काम तो है, लेकिन असंभव नहीं है। मुझे उम्मीद है कि वह बोल मैं जरूर ढूंढ निकलूंगा।” वही मोनू एक निराशावादी सोच रखने वाला लड़का था।

भोला के बात सुन के उसने सोचा, “क्या मजाक है यह! इतनी बारी बगीचा में कोई कैसे इतना छोटा बोल ढूंढेगा। यह तो बिल्कुल असंभव है, यह तो मुझसे कभी नहीं होगा।” यही सोचकर मोनू बगीचे में एक पेड़ के नीचे जाकर सो गया।

इधर मोनू चैन से सो रहा था, उधर सोनू अपने जी जान से बोल को ढूंढने में लगा था। सोनू बोल ढूंढने के लिए बगीचे में हर जगह ढूंढ रहा था और देख रहा था। सोनू के काफी ढूंढने के बाद कभी भी उसे बोल नहीं मिली थी, अंत में सोनू वहां पर जा पहुंचा, जहां पर मोनू सो रहा था।

वहां जाकर जैसे ही उसने झाड़ियों के पीछे देखा, जिसे बोल मिल गई। सोनू बोल पाकर बहुत खुश था, और मोनू की उसकी आवाज सुनकर उठ गया था। बोल मिलने की बात सुन कर भोला ने बहुत खुश हुआ।

भोला ने सोनू के प्रशंसा करते हुए कहा, “बहुत अच्छे, तुम्हारी आशावादी सोचने तुम्हें जितने दिया, और मोनू के निराशावादी सोच ने, उसे हरा दिया। मोनू ने पहले ही मान लिया था, इतनी बड़ी बगीचे में बॉल मिल ही नहीं सकती। और इसलिए वह कोशिश तक नहीं की।”

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है, हमें से कहीं ऐसे निराशावादी सोच रखने वाले लोग, प्रयास करने से डरते हैं, और कठिनाई से भागते हैं। जबकि हो सकता है समस्या का समाधान हमारे बिल्कुल नजदीक ही हो, और प्रयास ना करने से वह हमें नहीं मिल रहा है। इसलिए हमें कभी उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए, और प्रयास जरूर करनी चाहिए।

दो लकड़हारा 

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एक लकड़हारा कुछ वर्षों से एक ही जगह काम कर रहा था, लेकिन फिर भी उसकी तरक्की नहीं हुई। कुछ समय बाद वहीं पर एक नया लकड़हारा काम पर आया, और उसे एक साल के अंदर ही बहुत तरक्की मिल गई। जो पहला लकड़ खड़ा था उसे यह देखकर बहुत बुरा लगा।

वह सोचने लगा, “मैं यहां पर पुराना हूं, लेकिन मुझसे पहले फोन नए लग रहा को ज्यादा तरक्की मिल रही है।” यह सोच कर लकड़हारे को बहुत दुख पहुंचा। और उसने इस बात का विरोध किया।

एक दिन वह अपना मालिक के पास गया और अपने दिक्कत उसे बता दी। उसके मालिक ने उसे कहा, “तुम अभी भी उतने ही पेड़ काटते हो, कितने हैं कुछ साल पहले करते थे। लेकिन वह दूसरा लकड़हारा तो तुमसे बहुत ज्यादा पेड़ काट लेता है। अगर तुम भी चाहते हो की तुम्हारी तरक्की हो, तो तुमसे उसे ही जीतना काम करना पड़ेगा, और पहले से ज्यादा पेड़ कटना पड़ेंगे।”

लकड़हारे ने अपने मालिक के बातों पर सहमत दिया, और वह उसके पहले दिन से अधिक कम करना शुरू कर दिया। लेकिन फिर भी वह अधिकतर पेड़ नहीं कर सका। वह फिर से अपने मालिक के पास गया, और उन्हें सारी बात बताई।

उसके मालिक ने उससे कहा, “तुमको मेरे पास नहीं है बल्कि उस लकड़हारे के पास जाना चाहिए, क्योंकि वह कुछ ऐसा जानते हैं, जो हम दोनों भी नहीं जानते।” तो पुराना लकड़हारा, नए लकड़हारे के पास गया, और उससे पूछा, “तुम इतनी ही समय में, इतने सारे काम कैसे कर लेते हो?”

तभी नया लकड़हारा ने जवाब दिया, “पेड़ काटते काटते कुल्हाड़ी के धार खत्म हो जाते हैं, इसलिए मैं एक पेड़ काटने के बाद कुछ समय के लिए काम बंद कर देता हूं, और अपने कुल्हारी के धार तेज करता हूं। अब तुम अपने आप से पूछो की तुम कभी कुलारी की धार तेज की है!”

पुरानी पुरानी लकड़हारे को अब सारी बात समझ में आ गई थी। उसने भी ऐसा करना शुरू कर दिया। और कुछ ही दिनों बाद वह भी अधिक पेड़ काटना शुरू कर दिया। अधिक पेड़ काटने की कारण, एक साल की अंदर ही उसकी भी तरक्की हो गई।

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है, आपका सोचने का तरीका ही आपको कामयाबी दिलाता है। जब भी आपको आपकी मेहनत का फल ना मिले, तो समझ लेना चाहिए कि कुछ तो गड़बड़ है। और ऐसी परिस्थिति में आप कभी उसी लकड़हारे की तरह, अपनी कुलारी के धार तेज करने की जरूरत है।

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