ख्याली पुलाव | Pancha Tantra Hindi Kids story you will love

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ख्याली पुलाव

ख्याली पुलाव , Panchatantra hindi kids stories

एक गांव में शंभू नाम का व्यापारी रहता था, शंभू के पास ४० मुर्गियां थी। जिनकी वह बड़े प्यार से देखभाल करता। मुर्गियों के अंडे एक टोकरी में भरता और पूरा गांव घूम घूम के अंडों को बेचता। जिससे वह पैसे कमाता। शंभू का परिवार छोटा और खुशहाल था। उसकी पत्नी जया और पुत्र राजू दोनों शंभू की मुर्गी पालने में मदद करती।

एक दिन की बात है, शंभू और राजू दोनों मुर्गियों को दाना डाल रहे थे उस समय जया रोते हुए आई। शंभू ने देखकर कहा, “क्या हुआ? तुम रो क्यों रहे हो?” जया ने रोते-रोते कहा, “मेरे मायके से खबर आई है मेरे मां की हालत बहुत खराब है।” वह बहुत रोने लगी तब संभू ने उसे बोला, ‘ओहो तब तो हमें जाना चाहिए। लेकिन इन मुर्गियों को कौन देखेगा?” तब राजू ने कहा, “पिताजी इन मुर्गियों को खयाल में रखूंगा। आप दोनों जाइए और नानी मां को दिखाइए।”

शंभू ने राजू को बोला, “पर बेटा तुम कैसे अकेले रहोगे।” राजू ने बोला, “पिताजी अब मैं बड़ा हो गया हूं, अब मैं अपना भी ख्याल रख सकता हूं, और इन मुर्गियों का भी।” राजू की मां ने बोला, “राजू ए सब संभाल लेगा, आप मेरे साथ चलिए।” पत्नी की बात मैं कर शंभू ने उन मुर्गियों को राजू के भरोसे छोड़ कर अपने ससुराल निकल पड़ता है।

यहां यह शंभू को राजू की चिंता सता रही थी। और वहां राजू बेफिक्र होकर मुर्गियों की अंडों को इकट्ठा कर रहे थे। थोड़ी देर में उसने बहुत सारे अंडे इकट्ठे कर ली। और वह बहुत खुश हुआ वह कहने लगा, “आज मैं बहुत खुश हूं, अरे मैं खुद बहुत सारे अंडे इकट्ठे कर ली हूं, अब मैं इन्हें बेचने जाऊंगा।” अंडों की बेचने के इरादे से राजू ने टोकरी लेकर निकल पड़ी। थोड़ी ही देर चलने के बाद उसकी पहली ग्राहक पड़ोस में रहने वाली काकी मिली।

ख्याली पुलाव , Panchatantra hindi kids stories

काकी ने राजू से बोला, “क्या हुआ राजू आज तुम? शंभू भैया कहां है?” राजू ने बोला, “पिताजी मां के साथ नानी के घर गई है। नानी मां की तबीयत खराब है।” काकी ने बोला, “चलो ठीक है।” इसके बाद वह राजू से चार अंडे लिए, और उससे चार  सिक्के देती है। वह चार सिक्के देखकर राजू बहुत खुश हो जाती है। और सोचने लगती है, एक अंडे का एक सिक्का मतलब ४० अंडे का चार आना।

फिर क्या था राजू की सोचने उड़ान भरना शुरू कर दिया था। वह चलते-चलते सोचने लगा, “मैं इन चार अंडे को लेकर मेले में जाऊंगा। वहां आसमानी झूले में बैठूंगा, बंदर की तमाशा देख लूंगा, फिर गोलगप्पा खाऊंगा, फिर गुलाब जामुन ,फिर खिलौनों की दुकान से बड़ी गाड़ी खरीद लूंगा और उस गाड़ी को मैं गांव की बच्चों को दिखाऊंगा। जो मेरी बड़ी गाड़ी को देखकर जल जाएंगे।”

उसके बाद जाते जाते उसको दूसरा गांव ग्राहक भी मिल गया। और उसने और ५ सिक्के कमाली। और राजू साथ में आसमान में चल रहा था। इसमें सोच का कोई अंत नहीं था। उसने जाते-जाते सोचा चलो अब तो ९ अंडे बिक गए। आप सिर्फ ३१ अंडे और बच्चे हैं। और सिर्फ दो-तीन घंटे में मैं मेले में पहुंच जाऊंगा।

राजू जब उसकी ख्याल में चल रहा था तब उसकी पैर एक पत्थर में टकरा गया और वह फिसल गया जिस वजह से सारे अंडे गिर गए और सारे अंडे फूट गए। और साथ ही राजू की सारे ख्याली सपने भी टूट गई। इसलिए तो कहते हैं जब तक अंडे ना फूटे तब तक चूजे नागिनी। मतलब ख्याली पुलाव और ना पकाओ।

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