चूहे का विवाह || 5+ Best Pancha Tantra Story With Pdf File

Hi, today we have for you this funny story from Pancha Tantra called चूहे का विवाह (Chuhe Ka Bibah). Hope this story will make you very glad.

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चूहे का विवाह

चूहे का विवाह

एक बार गंगा के तट के किनारे था एक सुंदर सा आश्रम, जहां पर कुछ तपस्वी रहते थे शांति से, और गुरु यज्ञ के कुछ चेले जो हमेशा ध्यान करने में मग्न रहते थे। गुरु यज्ञ आत्म अनुशासन का पालन करते थे। एक दिन जब गुरु जी स्नान कर रहे थे, तब एक चिल अपने पंजे में एक चूहे को लेकर उधर से उड़ रहा था।

अचानक से चूहा चील की पकड़ से छूट गया और सीधा गुरुजी की हाथों में गिर गया। जब गुरुजी देखा कि वह चिल अभी भी वहां पर उड़ रहा था, तो उन्हें लगा कि इस चूहे को अकेला छोड़ ना सही नहीं होगा। चूहे को एक बरगद के पेड़ के पास रखा और वह अपने स्नान पूर्ण किया।

अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करके उन्होंने उस चूहे को एक छोटी सी लड़की में बदल डाला और आश्रम ले गए। उन्होंने अपने धर्म पत्नी से कहा, “मेरे प्रिय इस बच्ची को एक संतान मानकर स्वीकार करो। क्योंकि हमारे पास खुद की संतान नहीं है।’ तो छोटी लड़की आश्रम में रहने लगी गुरुजी के ख्याल में।

चूहे का विवाह

उसने बहुत ही ज्ञान पाया और दुनिया के बारे में भी बहुत कुछ सिखा। दोनों गुरुजी और उनकी पत्नी को अपनी अनोखी पुत्री पर गर्व था। एक दिन गुरु जी ने ध्यान दिया कि अब उनकी बेटी विवाह की यज्ञ हो चुकी थी। अब क्योंकि वो खुद अनोखी थी तो उनको लगा कि उसके लिए कोई अनोखा सा सौभाग्य चुनना चाहिए।

अगली सुबह गुरु जी अपनी शक्तियों का उपयोग करके सूर्य देव को बुलाया और कहा, “कृपया मेरी पुत्री से विवाह करें। अगर आपकी मर्जी है तो मेरी इच्छा है कि आप उसकी सौभाग्य बने।” परंतु बेटी ने बोला, “पिताजी सूर्य भगवान तो पूरी दुनिया को रोशन करते हैं, पर वह बर्दाश्त से बाहर गर्म है और अंग जैसे हैं। मुझे उनसे विवाह नहीं करनी हैं। कृपया आप कोई और ढूंढ।”

गुरुजी सोचने लगे सूर्य भगवान से भी अच्छे और कौन है। सूर्य भगवान ने सलाह दी गुरुजी आप बादल राजा से बात कर सकते हैं, वह मुझसे भी महान है क्योंकि वह मुझे और मेरे रोशनी को छुपाते सकते हैं। तो गुरु जी ने अब बादल राजा को बुलाया और कहा, “अगर मेरे पुत्री की इच्छा है तो आप कृपया उसकी हाथ विवाह में स्वीकार करें।”

चूहे का विवाह

परंतु बेटी ने फिर से कहा, “पिताजी वादल राजा बहुत ही अंधेरे,गीले,और धंधे हैं, मुझे इनसे शादी नहीं करनी, कृपया किसी और को ढूंढ।” गुरुजी फिर से सोचने लगे कि बादल राजा से भी महान कौन है। बादल राजा ने सलाह दी, “गुरुजी आप बायो राजा से बात करें। वह मुझ से भी महान है क्योंकि वह मुझे उड़ा सकता है।” तो गुरु जी ने अब बायो राजा को बुलाया।

राजा से कहा, “अगर मेरी पुत्री का इच्छा है तो आप कृपया उसका हाथ विवाह में स्वीकार करें।” परंतु बेटी ने फिर से कहा, “पिता जी बालू राजा बहुत ही बेचैन और तेज है। हर समय दिशा बदलते रहते हैं मुझे इनसे शादी नहीं करनी आप किसी और को ढूंढें।” गुरुजी फिर से सोच में पड़ गए अब वायु राजा से भी महान कौन है।

बायू राजा ने सलाह दी, “गुरुजी आप पर्वत महाराज से बात कर सकते हैं क्योंकि वह मुझे रोक सकते हैं।” तो गुरु जी ने अब पर्वत महाराज को बुलाया और कहा, “अगर मेरी पुत्री की इच्छा है तो फिर आप कृपया करके मेरे पुत्री का हाथ विवाह में स्वीकार कीजिए।”

चूहे का विवाह

पर बेटी फिर से बोल उठी, “पिता जी पर्वत महाराज बहुत ही सख्त और कठोर है। एक ही जगह पर रहते हैं मुझे उनसे शादी नहीं करनी। उसने फिर से बोला कृपया आप किसी और को चुने।” गुरुजी फिर से सोचने लगे कि पर्वत महाराज से भी महान कौन है। 

पर्वत महाराज ने सलाह दी, “क्यों ना आप चूहे की राजा से बात करें। वह मुझसे भी महान है क्योंकि वह मुझ में भी क्षेत्र बना सकते हैं।” तो अब गुरुजी ने चूहा राजा को बुलाया और कहां, “अगर मेरी पुत्री की इच्छा है तो, आप कृपया करके मेरे पुत्री का हाथ विवाह में स्वीकार करें।”

जब बेटी चूहे राजा से मिली तो वह बहुत प्रसन्न हो गई। वह शर्माते हुए अपनी रजामंदी दे दी। अब अंत में गुरु जी अपनी शक्तियों का उपयोग करके अपनी बेटी को वापस एक सुंदर चूहे में बदल डाला। ताकि वह अपने विवाह कर्तव्य को निभा सके। अंत में गुरु जी की बेटी का विवाह हो गया।

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