स्वर्ण हंस || Best Pancha Tantra Story For Kids with Pdf File (2020)

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स्वर्ण हंस

स्वर्ण हंस

एक बार एक पंडित और उसकी पत्नी गांव में एक छोटे से घर में नदी के किनारे रहते थे। बह लोग बेहद गरीब थे और जीवन यापन करने के लिए बहुत संघर्ष करते थे। पंडित अपने पत्नी को कई सुपरबुक देख कर खुश रखना चाहता था। एक दिन पंडित झील के पास बैठा था जबकि उसकी पत्नी रसोई में काम कर रही थी। पंडित शांतिपूर्ण दोपहर में कुछ प्रार्थना कर रहा था।

जब उसने अपनी आंखें खोली, तो देखा की झील पर एक सुंदर सुनहरा हंस उसकी तरफ आ रहा है। हंस के पास कई चमकीले सुनहरे पंख थे। जो बहुत सुंदर थे। नदी के किनारे चला गया और पंडित का अभिवादन किया, “है पंडित मैंने देखा है कि तुम और तुम्हारी पत्नी बहुत कठिन जीवन  जीते हो। मैं आप जैसे अच्छे लोगों का मदद करना चाहती हूं।”

पंडित ने कहा, “तुम बहुत दयालु हो मेरे दोस्त, भगवान ने मेरी प्रार्थना सुन ली। तुम्हारे पंख कितने सुंदर है क्या यह असली सोने से बने है?” उसने बोला, “जी यह असली सोने के हैं। मैं आपको एक एक करके अपने सुनहरे पंख देकर मदद करना चाहती हूं। आप उन्हें बेच सकते हैं। इसके जरिए जुटाए गए पैसों से आप लोग आसानी से रह सकते हैं I 

स्वर्ण हंस

पंडित ने बोला, “यह बहुत अद्भुत है, कृपया हमारे नम्र घर में हमारे साथ आए और रहे। मुझे यकीन है कि मेरी पत्नी तुमसे मिलना बहुत पसंद करेगी।” पंडित हंस को घर ले गया और अपनी पत्नी को दिखाया।उसकी पत्नी हैरान थी और अपने जीवन में कुछ सूख बुक पाकर बहुत खुश थी।

पत्नी ने तुरंत पूछा, “क्या आप हमें अभी एक पंख दे सकते हैं, कि हम इसे देख सके और इसे धारण कर सकें?” हंस ने एक पंख निकाला और उसे पंडित की पत्नी को दे दिया। उसने उसे कहा कि, “एक बार में एक से अधिक नाले क्योंकि यह सही नहीं होगा।” हंस पंडित और उसके पत्नी के साथ रहने लगा। हर दिन उसने उन्हें एक पंख दियाऔर इस परेशानी की समय में बहुत मदद की।

झील के चारों और उड़ता और उसे देखना तो हंसी नजारा था। पंडित और उसके पत्नी बहुत खुश थे उन्होंने पैसों के लिए पंख बेचना शुरू कर दिया था। एक सुनहरे पंख ने उन्हें पर्याप्त पैसा दियाएक दिया। पंडित अक्सर अपने पत्नी को याद दिलाता रहता था कि यह उपहार की पाकर बहुत भाग्यशाली है, और उन्हें इसका दूर प्रयाग कबी भी नहीं करनी चाहिए।

स्वर्ण हंस

कई दिन बीत गए और एक दिन पंडित पंख बेचने के लिए बाजार गया और उसकी पत्नी घर में खाना बना रही थी। जबकि स्वर्ण हंस एक कोने में सोया हुआ था। अचानक पंडित की पत्नी को एक विचार आया, “यह हंस हमारे साथ कब तक ऐसे रहेगा। हमें तो बस इसकी पंखा का जरूरत है। लेकिन इस प्रक्रिया में हमें इसे खिलाना है, स्नान करण है,और इसकी देखभाल भी करनी है।

हम इस हंस पर भरोसा नहीं कर सकते। अभी तो यहां से दूर जा भी सकता है और फिर कभी वापस नहीं आया तो हम फिर से गरीब हो जाएंगे ।यदि मैं मैं सभी पंख ले लू तो क्या बुरा होगा। उसके सोते हुए मैं जल्दी से उसकी सारी पार्क निकाल लूंगी। हमें अपने जीवन में एक भी दिन काम नहीं करना पड़ेगा। हम पंखों को सुरक्षित रूप में संभाल रख सकते हैं। और जब मन चाहे इस्तेमाल भी कर सकते हैं।”

पत्नी ने धीरे-धीरे हंस के पास पहुंच गई और उसे पकड़ लिया। हंस भयभीत हो गया। पत्नी पंख खींचने की कोशिश करने लगी। और हंस खुद को मुक्त करने के लिए संघर्ष करने लगा। पत्नी ने कहा, “मुझे तुम्हारे हालत की कोई चिंता नहीं है। मैं तुम्हारी साड़ी पंख मिलने की इंतज़ार नहीं कर सकता।”

हंस ने बोला, “अरे तुम ऐसा क्यों कर रही हो। अरे मूर्ख औरत मैं तुम्हारी और तुम्हारी परिवार की मदद करने की कोशिश कर रहा था। तुम एक लालची महिला हो और तुम जीवन के सुख भोग करने का लायक ही नहीं हो, क्योंकि तुम उनका दुरुपयोग करोगे।

स्वर्ण हंस

तुम्हारी पति तो तुम्हारे लिए सबसे अच्छा चाहते थे लेकिन अब तुम अपना अफसर खो चुकी हो। मेरी इच्छा के अनुसार मैं तुम्हें स्वर्ण पंख देता रहा। अब मुझे लगता है कि तुम्हारी मदद करने की कोई आवश्यकता नहीं है। अब मेरे पंख तुम्हारे लिए बस एक पक्षी के पंख से ज्यादा कुछ भी नहीं है। मैं यहां से जा रहा हूं और कभी भी वापस नहीं आऊंगा।”

हंस ने वहां से निकलने के लिए संघर्ष किया। और फिर उसने पंडित की पत्नी को जोर से  चोच मारा और खिड़की से बाहर उड़ गया। पंडित बस घर में घुसा ही था, तब वह हंस को उड़ते देखा। पंडित ने अपने पत्नी को कहा कि, “तुमने हंस के साथ क्या किया?”

पत्नी ने कहा, ‘जी मुझे उसकी सारी पंख चाहिए थे, और वह मुझे लेने नहीं दे रहा था।” फिर पंडित ने कहा, “मैंने तुम्हें उन्हें नहीं लेने के लिए कितने बार कहा था। तुमने सब कुछ बर्बाद कर दिया है और हम बाकी के जीवन जीने के लिए फिर से गरीब होंगे।”

Moral : “अतिरिक्त लालच से कुछ भी हासिल नहीं होता।”

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