मूर्ख ब्राह्मण || Pancha Tantra Story With Pdf File

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मूर्ख  ब्राह्मण

मूर्ख ब्राह्मण Panchatranta stories in hindi

 एक गांव में सोमेश्वर नाम का एक गरीब ब्राह्मण था, सोमेश्वर मां दुर्गा का मशीन भक्त था। एक बार उसने अपने गुरु की आज्ञा मानकर मां दुर्गा की तपस्या करने का निश्चय किया। वह घने जंगल में चला गया और बरेली से पेड़ के नीचे एक पैर पर खड़े होकर तपस्या करने लगा। बहुत दिन बीत गए। करी धूप,बारिश, तेज हवा चलते हुए वह निग्रह से है उसी जगह डाटा रहा। उसने अपनी एकाग्रता को भंग होने नहीं दिया। इसकी भक्ति और निग्रह देख मां दुर्गा प्रसन्न हो गई। और उससे दिखाई दी।

मां दुर्गा वहां पर आया और उससे कहा, वत्स आंखें खोलो, मैं तुम पर प्रसन्न हूं। बोलो तुम्हें क्या चाहिए।” ब्राम्हण ने कहा, “प्रणाम माते, आपकी दर्शन पाकर मैं धन्य हुआ, मैं और क्या मांगू।” मां दुर्गा ने उससे बोला कि, “मैं तुम्हें एक वरदान देता हूं, तुम्हें जो चाहिए वह तुम मुझसे मांग लो।” ब्राह्मण ने कहा, “माते मुझे संजीवनी बूटी का वरदान दो, मुझे संजीवनी बूटी दे दो।” मां दुर्गा ने उसे बोला तथास्तु।

मूर्ख ब्राह्मण Panchatranta stories in hindi

संजीवनी बूटी देते हुए मां दुर्गा ने उसे कहा, वत्स यह संजीवनी बूटी लो जिसकी समृद्धि व्यक्ति पर तुम यह प्रयोग करोगे वह फिर से जीवित हो जाएगी। किसी भी मृत शरीर पर तुम इसके पत्तों का रस चिरकोगे तो वह फिर से जीवित होकर पहले की तरह शक्तिशाली हो जाएगा। यह संजीवनी ना कभी सूखे गी और ना ही कभी खत्म होगी।” इतना कहते ही मां दुर्गा लुप्त हो गई।

संजीवनी बूटी पा कर सोमेश्वर आनंद ही उठा। वह अपने गांव की और निकल पड़े। रास्ते में वह सोचने लगा इस संजीवनी की सहायता से मैं मृत्यु पर विजय प्राप्त कर सकूंगा। आप इसके आगे गांव में किसी की घर में दुख नहीं होगा। गांव के सभी लोग मेरी प्रशंसा करेगी। पूरे गांव में मैं प्रसिद्ध हो जाऊंगा। ऐसा भी हो सकता है कि सब ने मुझे गांव का सरपंच बना दे। चलते चलते उसके मन में कुछ अलग ही विचार आया, “क्या कभी मां दुर्गा ने मेरे साथ मजाक तो नहीं किया? या कोई साधारण से पत्ते तो नहीं? यह  सच में संजीवनी बूटी है कि नहीं यह जानने के लिए मुझे कुछ करना ही पड़ेगा।”

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सोमेश्वर इधर उधर देखते हुए कुछ खोजने लगा। रास्ते पर एक मृत शेर दिखाई दिया। सोमेश्वर वोह मृत शेर के पास गया और सोचने लगा, इस संजीवनी बूटी का प्रयोग मैं इस शेर पर करता हूं फिर पता चलेगा कि यह असली है या नकली। सोमेश्वर ने उस संजीवनी बूटी का पत्तों को हाथ में मसल शुरू किया। उसने बिना कुछ सोचे समझे उस पत्तों का रस मृत शेर के ऊपर दे दिया। और वोह मृत शेर फिर से जीवित हो गया। यह सब देख कर सोमेश्वर तो बहुत खुश हुआ।

उसने कहा, “अरे वाह यह तो सच में संजीवनी बूटी है।” वह शेर बहुत बुरा था और शिकार ना मिलने के कारण भूख से मर गया था। संजीवनी के कारण वह न केवल जीवित हुआ, वह पहले से ज्यादा शक्तिशाली हो गया। जीवित होते ही वह शेर ने जोर से दहाड़ मारा। यह देख कर ब्राम्हण बोल उठा, “हे भगवान यह मैंने क्या किया? शेर को जीवित कर दिया, अब मेरे खैर नहीं।”

मूर्ख ब्राह्मण Panchatranta stories in hindi

सामने साक्षात भूखा शेर देखकर सोमेश्वर की सिट्टी पिट्टी गुल हो गई। वह डर के मारे इधर-उधर भागने लगा। पर एक शेर की ताकत के सामने वह टिक ना सका। कुछ देर बाद शेर ने उसे पकड़ा लिया, और बुरी तरह से उसको मर दिया और खा गाया।

Moral : “इसलिए कोई भी काम करने से पहले उसके परिणाम के बारे में सोचना आवश्यक है।”

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