5 Beautiful Short Adventures Story In Hindi kids (2020)

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Basically In a adventure story a person says about his travel to a place and what happens with him. There are lot of adventure story like horror, funny and something suspense. Ok let’s see…

Short Adventures Story In Hindi kids

रहस्यमय टापू 

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एक समय की बात है, हेनरी और रिचर्ड दोनों अपने जहाज में सवार होकर समुंदर में सफर कर रहे थे। वह दोनों एक साथ गाना गा रहे थे और चल रहे थे, “यह मौका है हमारी, यह समंदर है हमारा। हम चलते हैं हिम्मत से, हमें है बस एक दूजे का सहारा।”

अचानक समुंदर की लहरों में तूफान आने लगा, तो उन्होंने आपस में कहा, “एक बवंडर हमारे और आ रहा है जो भी मिले कस के पकड़ रहना।” लेकिन बवंडर ने जहाज के टुकड़े-टुकड़े कर दिया। हेनरी किसी तरह बच पाया, क्योंकि उसने एक लकड़ी का सहारा ले रखा था।

समुंदर की लहरें बेहोश हेनरी को एक टापू पर ले आई, और अब जब हिंदी को होश आया, तो वह रिचर्ड के लिए रोने लगे। वह कहने लगे, “उस बवंडर ने मेरे भाई जैसे दोस्त को खा लिया, आप मैं क्या करूं क्या करूं, मैं अकेले इस टापू पर! हे भगवान यह तूने क्या किया! मैं अकेले कैसे जी सकता हूं!”

हेनरी रात भर रोता रहा। अगली सुबह हेनरी उठा, और टापू में घूमने लगा। उसे कुछ फल के पेड़ दिखे, और उसने फलों को तोड़कर खाया। वह चलता रहा, और आगे उसे एक गुफा दिखी। वह गुफा के अंदर गया, और उसने सोचा, “यह गुफा मेरे रहने के लायक है।” वह थोड़ी देर वहीं बैठा। और फिर उसकी ध्यान गुफा की पिछली और गया।

वहां बहुत सारा कोयला था। उसने वह देख कर कहा, “वाह यहां तो कोयले है, इसमें तो रात में आग का इंतजाम भी हो जाएगा।” हेनरी ने कुछ कोयले के टुकड़े तोड़ लिए। शाम को हेनरी कोयले की टुकड़े लेकर टापू की तट पर गया। वहां वह पत्थरों की मदद से कोयले को जलाया। और समंदर की ओर देखने लगा।

देखते ही देखते यह सब हेनरी की दिनचर्या बन गई थी। वह जंगल में मिलने वाले फल को खाता, गुफा से कोयले इकट्ठा करता, और उसे समंदर के पास जलाता, और फिर गुफा में आकर सो जाता। एक दिन की बात है, हेनरी कोयला इकट्ठा कर ही रहा था, की उसे कुछ चमकती हुई चीज दिखाई दी।

उसने सोचा, “यह क्या है!” हेनरी ने उस जगह का कोयला खुरिदा, और उस चीज को देखकर हिंदी खुशी से पागल सा हो गया, क्योंकि वह एक हीरा था। उसने और खोदा, तो उसे और ढेर सारी हीरा दिखाई दिए। वह बहुत खुश था। पर अगले ही पल उसकी मुस्कान उदासी में बदल गई।

वह कहां, “लेकिन मैं इसका क्या करूं? मैं इस टापू पर अकेला रहता हूं। अगर आज रिचार्ड मेरे साथ होता, तो हम कुछ भी करके यह सारे हीरा हमारे घर ले जाते। हमारे जिंदगी बदल चुकी होती। लेकिन आप क्या यह सब मेरे लिए सिर्फ पत्थर है!” और हेनरी ने वही रे वहीं फेंक दिए। और फिर वह आग जलाने लगा समुंदर के किनारे।

रोज की तरह हेनरी टापू के तट पर आग जला कर, समुंदर की ओर देखा करता। हेनरी को इस टापू पर आए हुए एक महीना हो चुका था, और अचानक हेनरी को एक दिन हुई सेल की आवाज सुनाई दी। वह चौक गया, और हेनरी तुरंत दौड़ता हुआ टापू के तट पर गया।

उसने देखा, वहां एक जहाज था। हेनरी खुशी के मारे कुंदा, जहाज में हेनरी का दोस्त रिचर्ड था। रिचर्ड हेनरी को देखकर बहुत खुश हुआ, और उसने हेनरी को गले लगा लिया। हेनरी ने पूछा, “तुम जिंदा हो?” रिचर्ड ने कहा, “हां, मुझे यकीन था तुम्हें भी कुछ नहीं होगा। और मैं तुम्हें एक दिन जरूर ढूंढ लूंगा। चलो अब मेरे साथ”

हेनरी रिचर्ड के साथ जहाज पे चरने ही वाला था, कि उसे कुछ याद आया। उसने रिचर्ड को कहा, ” रिचर्ड यहां आओ, मुझे तुम्हें कुछ दिखाना है। चलो मेरे साथ।” हेनरी रिचर्ड को अपना साथ लेकर उस गुफे में गया। वहां उसने रिचर्ड को वह हीरे दिखाई। रिचर्ड ने हीरे देख कर कहा, “बाप रे इतने सारे हीरे!”

हेनरी ने कहा, “हां, और मैं यही सोच रहा था, की अगर तुम मेरे साथ हो, तो ही इन हीरो का मेरे लिए मूल्य है। वरना यह सब तो बस पत्थर है।” हेनरी ने रिचर्ड को गले लगाया और कहां, ” रिचर्ड तुम मेरी जिंदगी का असली हीरा हो। मेरे दोस्त, मेरे भाई अगर तुम नहीं आते, तो शायद मैं इस टापू पर मर जाता।” रिचर्ड ने कहा, “मेरे भाई, मैं तुम्हारे बगैर कैसे जी सकता हूं।”

फिर हेनरी और रिचर्ड ने हीरे जमा किए, और उन्हें जहाज में भर लिया। फिर वह जहाज लेकर, घर की ओर निकल पड़े। और एक बार फिर दोनों ने खुशी से वह पुराना गाना दोबारा गया। और फिर से वह दोनों बहुत खुशी से जीने लगे।

तीन जादूगर 

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कई साल पहले, तिब्बत पर राज करता था एक बूढ़ा जादूगर। उसका नाम था यन। यन बहुत दयालु और मददगार था। एक दिन की बात है, यन अपने बिस्तर पर लेटा था, और तभी एक आकाशवाणी हुई, ” यन, अब तुम्हारा अंत नजदीक है।”

यन यह सुनकर सोच में पर गया, के उसके बाद तिब्बत का क्या होगा। वह अपने जादुई प्याले के पास गया, और उसने बोला, ” है जादुई प्याले, बताओ मुझे कौन है मेरे जैसे जो मेरी गद्दी संभाले?” जादुई प्याले में वायु देखा, वायु उड़ सकता है, और वह हवा को कब कर सकता है। बायु बहुत ही शक्तिशाली है।

यह देख कर यन खुश होता है। और फिर अचानक वायु अग्नि में बदल जाता है। अग्नि के पास ज्वाला की शक्ति है, आज उसे जला नहीं सकती, और वह आग को काबू का सकता है। यन अब बहुत खुश हुआ। उसे लगा अग्नि वायु से बेहतर है। और तभी अग्नि जल में बदल गया।

जल के पास पानी की शक्ति थी। वह पानी पर चल सकता था, बारिश वर्षा सकता था। अब यन को यह नहीं समझ आ रहा था, कि उसकी गद्दी कौन संभालेगा। अग्नि, बायू या जल! यन सोच में पड़ गए, और उसने निर्णय लिया, कि वह तीनों जादूगरों से मिलेगा, और फिर अपना फैसला लेगा।

उसने अपनी जादुई छरी घुमाई, और तीनों भाइयों की गुफा में पहुंच गए। तीनों जादूगर साथ में खाना खा रहे थे। यन ने उनसे कहा, ” में यन हूं, साट सालों से तिब्बत का राजा जादूगर। मैं यहां तुम तीनों से मिलने आया हूं। 

क्योंकि अब मैं बुड्ढा हो चुका हूं, और मैं चाहता हूं की तुम तीनों में से सबसे ज्यादा शक्तिशाली जो हो, वह मेरे गद्दी संभाले मतलब मतलब तिब्बत का राजा जादूगर बनी। लेकिन तुम तीनों से सबसे ज्यादा शक्तिशाली जादूगर है कौन?”

अग्नि ने कहा, “में सबसे ज्यादा शक्तिशाली हूं, क्योंकि मैं सबको जला सकता हूं, पर खुद नहीं चलता। वायु ने कहा, “मैं सबसे शक्तिशाली हूं। क्योंकि मैं वायु के मोर बदल सकता हूं। और उड़ भी सकता हूं। तभी जल ने कहा, “मैं भी सबसे ज्यादा स्पेशली हूं, क्योंकि मैं बारिश वर्षा सकता हूं, और पानी पर चल सकता हूं।”

यन ने कहा, “मैं तुम तीनों को पर खूंगा, और पता लगा ऊंगा, कि तुम तीनों में से सबसे शक्तिशाली जादूगर है कौन। और इसके लिए तुम तीनों को कॉल मेरे साथ जंगल चलना होगा ” अगले दिन तीनो भाई यन के साथ जंगल की ओर निकल पड़े।

जंगल में पहले उनको एक खूंखार शेर दिखा, शेर को देखकर यन घबराई। शेर ने जादूगरों का शिकार करना चाहा, और जैसे ही वह शेर झपका अग्नि ने उसे जलाकर राख कर दिया। यन ने कहा, “बहुत खूब अग्नि, तुमने हम सबकी जान बचाई, तुम शक्तिशाली हो।” यन की अग्नि की शक्ति बहुत अच्छी लगी। और वह लोग फिर से आगे चलने लगे।

थोड़ी दूर चलने के बाद उन्हें राह में एक दलदल नजर आया, यन सोच में पड़ गया कि अब वह लोग यह दल दल कैसे पार करेंगे। तभी बायूं ने आस पास पड़ी पत्थर दिखे, और वह अपनी शक्ति से उसको दलदल के ऊपर ले आया और वह एक रास्ता बना दिया। यन ने कहा, “वाह बायूं, बहुत अच्छे। तुमने तो नया मार्ग बना दिया। तुम बहुत शक्तिशाली हो।” यन को वायु की समझदारी पसंद आई। और वह आगे चलने लगे।

कुछ दूर और चलने के बाद, अचानक सामने आग नजर आई। जंगल में आग बहुत तेजी से फैला रही थी, तभी जलने अपनी शक्ति से पानी बर्षया, और आग बुझ गई। तभी यन ने कहा, “बहुत अच्छे जल, तुमने तो पूरा का पूरा जंगल बचा लिया। तुम भी बहुत शक्तिशाली हो।”

अब यन सोच में पड़ गया, की तीनों भाइयों से सबसे शक्तिशाली कौन हैं। अग्नि, वायु या जल? यन ने उन लोगों को थोड़ी देर तालाब के किनारे विश्राम करने के लिए आदेश दिया। और विश्राम करने के समय यन की नजर एक तोते पर पड़ी, जो पंख फैला के उड़ रहा था। फिर यन की नजर एक शॉप पर पड़ी, जो बहुत फुर्ती से चल रहा था। और फिर यन की नजर पास ही तालाब में एक मछली पर पड़ी, जो बहुत फुर्ती से कह रही थी।

अब यन के समझ में आया, और वह उन तीनों से कहा, “तुम तीनो भाई अलग हो, जैसे इस जंगल में रहने वाले जीब। यह देखो सांप, तोता और मछली। ना सांप उड़ सकता है, ना मछली रेंग सकती है, और ना सोता तेर सकता है। सबकी अपनी अपनी खासियत है। तुम तीनों भी अपने अपने गुणों में शक्तिशाली हो। मैं तुम तीनों को तिब्बत ले जाऊंगा और तुम तीनों मेरी गद्दी संभालोगे।”

यन तीनों भाइयों में से सबसे शक्तिशाली कौन है यह तेर नहीं कर पाया। क्योंकि तीनों अलग-अलग शक्ति से बलियान थे। यन को यह समझ में आ गया, के वह तीनों भाइयों का तुलना एक दूसरे से नहीं कर पाएगा, क्योंकि तीनों जादूगर अपने-अपने शक्ति के महारथी थे। इसलिए वह तीनों ही तिब्बत का राजा बना।

माली काका

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एक थे मालि काका, वोह बगीचे में पौधा लगा रहे थे। उसी समय उस नगर का राजा उधर से जा रहा था। राजा भेष बदलकर जनता का हाल जानने निकला था, राजा ने देखा की माली काका ने बड़ी लगन से पौधा लगाया। वह बूढ़े हो चले थे, फिर भी पौधा लगा रहे थे।

यह देख कर राजा को आश्चर्य हुआ, और मन ही मन वह सोचने लगा, “कब यह पौधा बड़ा होगा, कव फल देगा? जब फल देगा, तब तक क्या माली जिंदा रहेगा?” फिर वो राजा माली काका के पास पहुंचा, और उनसे पूछा, “तुम किस चीज का पौधा लगा रहे हो?” माली काका ने जवाब दिया, “नारियल का।”

राजा ने पूछा, “इसमें फल कब लगेंगे?” माली काका ने छोटा सा उत्तर दिया, “पंद्रा बरसों के बाद।” राजा ने पूछा, “क्या तुम इतने दिनों तक जीवित रह पाओगे?” माली काका ने जवाब दिया, “नहीं लेकिन मेरे बेटे बेटियां और नाती पोते तो इसके फल जरूर खाएंगे।”

राजा कुछ और पूछता, उसके पहले ही माली काका ने हंसकर कहा, “अरे भाई, मैं भी तो अब तक अपने बाप दादा के लगाए पेड़ों के फल खा रहा हूं। वह देखो वह जो अखरोट का पेड़ है, उसे मेरे दादा जी ने लगाया था।” राजा मन ही मन प्रसन्न होकर राजप्रासाद में लौट गया।

अगले ही दिन राजा ने माली काका को दरबार में बुलाया, और ढेर सारे इनाम दिए। क्योंकि जो दूसरों के भले के बारे में सोचता है, वह एक महान व्यक्ति होता है। और ऐसा ही काम, बूढ़े माली काका ने करके दिखाई थी।

जादुई जूते

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एक शहर में भाभीका नाम के एक बहुत ही प्यारी लड़की थी। भाभी का बहुत समझदार थी, लेकिन वह पैरों से अपाहिज थी। भाभीका रोज सपने देखती थी की, कि वह नाच रही है, भाग रही है। पर जब उसकी नींद खुलती, तो उसे अपनी अपाहिज होने पर बहुत दुख होता।

भाभीका अपने माता-पिता के सारी बात मानती थी। जैसे पढ़ना, लिखना, पौधों में पानी डालना, इसीलिए भाभीका उन दोनों का बहुत लाडली थी। उसके पिता माता हमेशा उसको खुश रखना चाहते थे, इसीलिए कभी उसको समुंदर के किनारे घूमने के लिए ले जाते, या कभी खेलने की मैदान में।

इसके बावजूद भाभीका खुश नहीं थी। क्योंकि भाभीका का कोई दोष नहीं था। एक दिन की बात है, भाभी का अपने क्लास रूम में बैठी थी, और उसके ध्यान बाहर खेलने बच्चों पर गया, वह सपना देखा कि वह भी उन बच्चों के साथ भागदौड़ के खेल रहा है। तभी अचानक शिक्षक की आवाज आई, और उन्होंने बोर्ड पर लिखा  स्पोर्ट्स डे।

उन्होंने बोला, “बच्चों काल स्कूल में खेल खेली जाएगी, और सभी बच्चों को इसमें भाग लेना है।” एक बच्चे ने कहा हम सब इस में भाग लेंगे, लेकिन भाभीका को छोड़कर क्योंकि वह तो चल नहीं सकती। तभी शिक्षक मां से बोले, “ऐसा नहीं बोलते, चलो भाभीका से माफी मांगो।” और उस बच्चे ने भाभीका से माफी मांगी।

स्कूल छुट्टी हो गया। और उदास भाभी का स्कूल के खेलने का मैदान के पास आई। आस पास कोई नहीं था, उदास भाभी का फूट-फूट कर रोने लगी। तभी अचानक उसे एक आवाज सुनाई दी, और वह यहां वहां देखने लगी। पर उसे कोई नहीं दिखाई दिया।

अचानक उसे लगा की आवाज जहां पर हूं बैठी है, उसके नीचे से आ रही है, और उसने झुक कर देखा। को देखा एक कबूतर का बच्चा उस बेंच के नीचे फंसा हुआ था। भाभी का उस नन्हे कबूतर की मदद करने लगी, उसने उसे प्यार से उठाया और उसको बेंच के ऊपर रख दिया, और कहां चलो अब तुम अपने घर जाओ।

अपने बच्चों को देखकर कबूतर की मां बहुत खुश हो गई। कबूतर की मां ने कहा, “शुक्रिया, तुम बहुत अच्छी हो, तुमने मेरी और मेरे बच्चों की मदद की, मैं तुम्हें एक तोहफा देना चाहती हूं।” ऐसा बोलकर मां कबूतर अपने घोंसले के अंदर चली गई, और अंदर से एक सोने का जूता ला कर भाबिका को देती है।

भाभीका उस जूतों को देख कर बोली, “मैं इन जूतों का क्या करूंगी? मैं तो चल नहीं सकती, मैं तो अपाहिज हूं।” तभी मां कबूतर ने बोला, “यह जूते मामूली जूते नहीं हैं, जादुई जूते हैं। इन्हें पहनकर तुम चल सकोगी, दौर सकोगी, और जो चाहो वह कर सकोगी।”

और भाभीका ने जैसे ही वह जूते पहने, वह अपने पैरों पर सच में चलने लगी। भाभी का बहुत खुश हो गई। जूते पहन कर भाभीका घर पहुंची, उसके माता-पिता पहली बार उसको चलता हुआ देख कर, आश्चर्य में पर गए। वह अपनी आंसू रोक नहीं पाए।

उसके माता-पिता उसको पूछा, “कि कैसे तुम अचानक चल पा रहे हो?” तब भाभीका ने कहा, “मैंने एक नन्हे कबूतर की मदद की, तो उसके मा ने यह जादुई जूते मुझको तोफे में ही में दिए। और जिसके वजह से मैं चल पा रही हूं।” और अगले ही दिन भाभी का ने खेल में हिस्सा लेने गई, सभी लोग वहां भाभीका को चलते देख कर चौक गए।

भाभी का ने दौड़ की खेल में हिस्सा लिया, और जादुई जूतों के कारण वह जीत गई। मां कबूतर का जादुई तोफा, जादुई जूते, भाभी का के जीवन का सबसे अच्छा तोफा साबित हुआ। इसके बाद भाभी का के पैर कभी नहीं रुके। वह वागती, नाचती वह भी बिना किसी के मदद के। और भाभी का अक्षर मां कबूतर और उसके बच्चे को मिलने आती है। और उसको धन्यवाद देते हुए कहती है, “बहुत-बहुत शुक्रिया आपकी वजह से ही मैं चल सकती हूं।”

जादुई ब्रश

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एक समय की बात है, एक  छोटा सा गांव था, गांव में एक गरीब कलाकार रहता था। जिसका नाम था कृष्णा। वह हर रोज अपना चित्र भेजने बाजार जाता था। लेकिन अच्छा खासा नहीं कमा पाता था।उन्हीं पैसों से ही उनको जीवन चलना था।

वह उदास होकर घर लौटने लगा। ठीक उसी समय उसको तालाब के पानी में तैरते हुए एक ब्रश दिखाई पड़ी। उसे देखते ही वह आश्चर्य चकित हो गया। और सोचा, इससे से तो मैं अच्छे चित्र बना सकता हूं।

उसने ब्रश को उठा लिया, और उसी खुशी में घर जाने लगा। घर पहुंचते ही वह उस ब्रश से चित्र बनाना शुरू कर दिया। पहले कृष्णा ने एक अपल का चित्र बनाया, और तुरंत ही हो सजीव होकर बहुत सारी अपल उछल कर कागज से बाहर आ गए।

पता चला की वह एक जादुई ब्रश है। फिर कृष्णा ने एक आम का चित्र बनाया, और बहुत सारी आम जीवित होकर उछल पड़े। वैसे ही कृष्णा ने सोने की सिक्के की चित्र बनाया, और एक की जगह बहुत सारे सिक्के प्रकट हुए।

इस तरह कृष्णा धनवान होने लगा। अड़ोस पड़ोस के लोगों को यह सब बहुत अजीब लगने लगा। वह सोचने लगा कृष्ण के धनवान होने के पीछे कुछ तो कारण है।

उसे जानने के लिए एक पड़ोसी उसके घर के खिड़की ओके बाहर से अंदर झांकने लगा, और बात पता लगाया। रात का समय पड़ोसी ने धीरे धीरे कृष्ण की घर के अंदर आकर, उस ब्रश को चुरा लिया।

चोरी के बाद वह पड़ोसी अपने घर जाते ही वह उस ब्रश से एक लकड़ी का चित्र बनाया, और तुरंत ही उस लकड़ी पर जान आ गई। पड़ोसी को अपने आंखें पर विश्वास नहीं हुआ।

उसे अच्छा सबक भी मिला, उसी लकड़ी से पड़ोसी को खूब पिटाई हुई। और अगले दिन पड़ोसी ने उस जादुई ब्रश वापस कर दिया। और उससे माफी मांगी।

यह कहानी से हमें यह सीख मिलती, किसी भी अद्भुत शक्ति का दुरुपयोग नहीं करना चाहिए। लालच में आकर बुरे काम कभी भी नहीं करना चाहिए। हमारे कष्ट का फल हमें जरूर मिलेगा।

Thank you

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